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परमात्मा ही हमारा साथ देता है : आचार्य हरिकांत दीक्षित
Tue, 16 Sep 2025 12:50 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
Updated Tue, 16 Sep 2025 12:50 AM IST
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श्रीमद्भागवत कथा करते हुए आचार्य हरिकांत दीक्षित। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
इसराना। घासी राम धर्मशाला परिसर में सोमवार को श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन कथा वाचक आचार्य हरिकांत दीक्षित ने श्री कृष्ण जन्मोत्सव पर ब्याखान किया। उन्होंने कहा कि जीवन में जो घटित होना है वो होकर रहता है। उन्होंने कहा कि कोई अपना नहीं होता परमात्मा ही हमारा साथ देता है।
भगवान श्रीकृष्ण का जन्म चंद्र वंश में उस वक्त हुआ जब वासुदेव व देवकी मथुरा में कंश की जेल में बंद थे। पहरेदार सो गए तो शिशु कृष्ण को वहां से बाहर भेज दिया व उसके स्थान पर कन्या को लाकर रख दिया। कन्या को कंश ने जैसे ही मारना चाहा तो कन्या हवा में उछल कर ऊपर चली गई जो आज काली के नाम से पूजी जाती हैं। बामण व बलि महाराज के स्मरण सुनाते हुए उन्होंने बताया कि बामण ने राजा बलि महाराज के पास जाकर तीन पग पृथ्वी दान में मांगी। बामण ने दो पग में पूरी पृथ्वी को नाप कर पूछा कि तीसरा पग कहां रखू। इस पर बलि महाराज ने अपना सिर आगे कर दिया। सिर पर पग रखते ही बलि महाराज पाताल लोक में पहुंच गया।
रामजन्म वृतांत बताते हुए कहा कि हम सबका जीवन मर्यादित हो, राम चरित हमें जीवन जीना सिखाता है। भूमि से पाप का भार उतारने के लिए भगवान ने श्रीकृष्ण के रूप में अवतार लिया। इस मौके पर मंदिर के पुजारी ओम हरी दीक्षित, श्रवण गर्ग, राजू गोयल, सुनील पंडित व विक्रम शर्मा मौजूद रहे।
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इसराना। घासी राम धर्मशाला परिसर में सोमवार को श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन कथा वाचक आचार्य हरिकांत दीक्षित ने श्री कृष्ण जन्मोत्सव पर ब्याखान किया। उन्होंने कहा कि जीवन में जो घटित होना है वो होकर रहता है। उन्होंने कहा कि कोई अपना नहीं होता परमात्मा ही हमारा साथ देता है।
भगवान श्रीकृष्ण का जन्म चंद्र वंश में उस वक्त हुआ जब वासुदेव व देवकी मथुरा में कंश की जेल में बंद थे। पहरेदार सो गए तो शिशु कृष्ण को वहां से बाहर भेज दिया व उसके स्थान पर कन्या को लाकर रख दिया। कन्या को कंश ने जैसे ही मारना चाहा तो कन्या हवा में उछल कर ऊपर चली गई जो आज काली के नाम से पूजी जाती हैं। बामण व बलि महाराज के स्मरण सुनाते हुए उन्होंने बताया कि बामण ने राजा बलि महाराज के पास जाकर तीन पग पृथ्वी दान में मांगी। बामण ने दो पग में पूरी पृथ्वी को नाप कर पूछा कि तीसरा पग कहां रखू। इस पर बलि महाराज ने अपना सिर आगे कर दिया। सिर पर पग रखते ही बलि महाराज पाताल लोक में पहुंच गया।
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रामजन्म वृतांत बताते हुए कहा कि हम सबका जीवन मर्यादित हो, राम चरित हमें जीवन जीना सिखाता है। भूमि से पाप का भार उतारने के लिए भगवान ने श्रीकृष्ण के रूप में अवतार लिया। इस मौके पर मंदिर के पुजारी ओम हरी दीक्षित, श्रवण गर्ग, राजू गोयल, सुनील पंडित व विक्रम शर्मा मौजूद रहे।
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