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Panipat News: जिला नागरिक अस्पताल में ऑनलाइन भुगतान शुरू
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संदीप सिंह
पानीपत। पंजीकरण, रेबीज व एमएलआर फीस का ऑनलाइन भुगतान कराने वाला पानीपत जिला नागरिक अस्पताल में प्रदेश का पहला अस्पताल बन गया है। अब यहां कोई भी भुगतान नकदी में नहीं किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग की पेमेंट की ऑनलाइन की ये पहल मरीजों पर भारी पड़ रही है। अगर कोई मरीज एंडरॉयड मोबाइल , फोन पे, गुगल पे व पेटीएम का इस्तेमाल नहीं करता है तो उसको इलाज नहीं मिलेगा। इलाज के लिए उन्हें भुगतान करने की इस अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करना होगा।
नागरिक अस्पताल की इमरजेंसी में एमएलआर व प्राथमिक उपचार लेने के लिए 250 व पांच रुपये का भुगतान स्कैनर से करना होगा। यहां नगद भुगतान को पूरी तरह से बंद कर दिया गया है। ऐसे में मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। अस्पताल में ऐसे 50 प्रतिशत मरीज आते हैं जो एंडरॉयड फोन का इस्तेमाल नहीं करते। वो ऑनलाइन पेमेंट के लिए डॉक्टरों व स्टाफ की मिन्नतें करते रहते हैं।
इनको दूसरों मरीजों को नकदी देकर फिर स्कैनर से पेमेंट करानी पड़ रही है। मरीजों को अपने किसी परिचित को भी यहां बुलाना पड़ता है जो ऑनलाइन पेमेंट करने की सेवाओं को जानता हो। इस परेशानी से डॉक्टर व स्टाफ भी परेशान हो चुका है। मरीज स्वास्थ्य अधिकारियों से यहां ऑनलाइन पेमेंट के साथ साथ नकद पेमेंट की सेवाओं को शुरू करने की मांग कर रहे हैं।
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डॉक्टर व स्टाफ कर्मचारी नहीं कर सकते मदद
इस सेवा के साथ एक नियम से भी बनाया गया है कि डॉक्टर व अन्य स्वास्थ्य कर्मचारी इस स्कैनर से किसी मरीज की पेमेंट का भुगतान नहीं कर सकते। अगर वो ऐसा करते हैं तो उन पर सवाल उठ सकते हैं। कोई भी मरीज व तीमारदार ये आरोप लगा सकता है ऑनलाइन पेमेंट का भुगतान करने के लिए उनसे अधिक पैसे लिए गए हैं। ऐसे में मरीजों के सामने ये और गहरा संकट खड़ा हो रहा है।
हर रोज स्वास्थ्य कर्मियों से हो रहे हैं झगड़े-
इमरजेंसी वार्ड में कार्यरत डाॅक्टर, नर्सों व सुरक्षाकर्मियों ने कहा कि यहां हर रोज 100 से अधिक मरीज आते हैं। एमएलआर के लगभग 25-30 मरीज होते हैं। बाकी प्राथमिक उपचार वाले होते हैं। जब इनको सिर्फ ऑनलाइन पेमेंट करने को कहा जाता है वो नकद पेमेंट करने पर अड़ जाते हैं। जब तक पर्ची नहीं बनती मरीज को डॉक्टर कागज पर परामर्श नहीं दे सकता। हर रोज डॉक्टरों, स्टाफ नर्सोें व सुरक्षाकर्मियों के साथ तीमारदार झगड़ा कर रहे हैं।
क्या कहते हैं मरीज
युवक से मिन्नत कर भुगतान कराया
दीनानाथ कॉलोनी निवासी भीम सिंह ने बताया कि उसको एमएलआर कटवानी है। यहां काउंटर पर वो नकदी पैसे दे रहा था लेकिन कर्मियों ने ऑनलाइन भुगतान करने को कहा । वो एंडरॉयड मोबाइल का इस्तेमाल नहीं करता। उसको काफी देर तक इधर से उधर घूमना पड़ा। फिर उसने एक युवक की मिन्नत की। उस युवक ने भुगतान किया। उसने उस युवक को नकद पैसे दे दिए।
नकद भुगतान की सेवाएं होनी चाहिए
बतरा कॉलोनी निवासी रानी ने कहा कि वो गरीब लोग हैं। इसलिए सरकारी अस्पताल में इलाज के लिए आते हैं। यहां इलाज के लिए आना है तो एंडरॉयड मोाबइल व ऑनलाइन पेमेंट करनी आनी चाहिए। ये गरीब लोगों के साथ अन्याय है। वो यहां इलाज के लिए आती थी। पांच रुपये का भुगतान करने के लिए उसको कई लोगों की मिन्नतें करनी पड़ी।
सिविल सर्जन डॉ. जयंत आहूजा ने बताया कि जाे लोग एंडरॉयड मोबाइल व ऑनलाइन पेमेंट नहीं कर सकते। उनकी मदद स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी करेंगे। वो खुद उनकी पेमेंट करेंगे। कर्मियों को ये निर्देश दिए जा चुके हैं। लोगों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं होने दी जाएगी।
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पानीपत। पंजीकरण, रेबीज व एमएलआर फीस का ऑनलाइन भुगतान कराने वाला पानीपत जिला नागरिक अस्पताल में प्रदेश का पहला अस्पताल बन गया है। अब यहां कोई भी भुगतान नकदी में नहीं किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग की पेमेंट की ऑनलाइन की ये पहल मरीजों पर भारी पड़ रही है। अगर कोई मरीज एंडरॉयड मोबाइल , फोन पे, गुगल पे व पेटीएम का इस्तेमाल नहीं करता है तो उसको इलाज नहीं मिलेगा। इलाज के लिए उन्हें भुगतान करने की इस अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करना होगा।
नागरिक अस्पताल की इमरजेंसी में एमएलआर व प्राथमिक उपचार लेने के लिए 250 व पांच रुपये का भुगतान स्कैनर से करना होगा। यहां नगद भुगतान को पूरी तरह से बंद कर दिया गया है। ऐसे में मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। अस्पताल में ऐसे 50 प्रतिशत मरीज आते हैं जो एंडरॉयड फोन का इस्तेमाल नहीं करते। वो ऑनलाइन पेमेंट के लिए डॉक्टरों व स्टाफ की मिन्नतें करते रहते हैं।
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इनको दूसरों मरीजों को नकदी देकर फिर स्कैनर से पेमेंट करानी पड़ रही है। मरीजों को अपने किसी परिचित को भी यहां बुलाना पड़ता है जो ऑनलाइन पेमेंट करने की सेवाओं को जानता हो। इस परेशानी से डॉक्टर व स्टाफ भी परेशान हो चुका है। मरीज स्वास्थ्य अधिकारियों से यहां ऑनलाइन पेमेंट के साथ साथ नकद पेमेंट की सेवाओं को शुरू करने की मांग कर रहे हैं।
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डॉक्टर व स्टाफ कर्मचारी नहीं कर सकते मदद
इस सेवा के साथ एक नियम से भी बनाया गया है कि डॉक्टर व अन्य स्वास्थ्य कर्मचारी इस स्कैनर से किसी मरीज की पेमेंट का भुगतान नहीं कर सकते। अगर वो ऐसा करते हैं तो उन पर सवाल उठ सकते हैं। कोई भी मरीज व तीमारदार ये आरोप लगा सकता है ऑनलाइन पेमेंट का भुगतान करने के लिए उनसे अधिक पैसे लिए गए हैं। ऐसे में मरीजों के सामने ये और गहरा संकट खड़ा हो रहा है।
हर रोज स्वास्थ्य कर्मियों से हो रहे हैं झगड़े-
इमरजेंसी वार्ड में कार्यरत डाॅक्टर, नर्सों व सुरक्षाकर्मियों ने कहा कि यहां हर रोज 100 से अधिक मरीज आते हैं। एमएलआर के लगभग 25-30 मरीज होते हैं। बाकी प्राथमिक उपचार वाले होते हैं। जब इनको सिर्फ ऑनलाइन पेमेंट करने को कहा जाता है वो नकद पेमेंट करने पर अड़ जाते हैं। जब तक पर्ची नहीं बनती मरीज को डॉक्टर कागज पर परामर्श नहीं दे सकता। हर रोज डॉक्टरों, स्टाफ नर्सोें व सुरक्षाकर्मियों के साथ तीमारदार झगड़ा कर रहे हैं।
क्या कहते हैं मरीज
युवक से मिन्नत कर भुगतान कराया
दीनानाथ कॉलोनी निवासी भीम सिंह ने बताया कि उसको एमएलआर कटवानी है। यहां काउंटर पर वो नकदी पैसे दे रहा था लेकिन कर्मियों ने ऑनलाइन भुगतान करने को कहा । वो एंडरॉयड मोबाइल का इस्तेमाल नहीं करता। उसको काफी देर तक इधर से उधर घूमना पड़ा। फिर उसने एक युवक की मिन्नत की। उस युवक ने भुगतान किया। उसने उस युवक को नकद पैसे दे दिए।
नकद भुगतान की सेवाएं होनी चाहिए
बतरा कॉलोनी निवासी रानी ने कहा कि वो गरीब लोग हैं। इसलिए सरकारी अस्पताल में इलाज के लिए आते हैं। यहां इलाज के लिए आना है तो एंडरॉयड मोाबइल व ऑनलाइन पेमेंट करनी आनी चाहिए। ये गरीब लोगों के साथ अन्याय है। वो यहां इलाज के लिए आती थी। पांच रुपये का भुगतान करने के लिए उसको कई लोगों की मिन्नतें करनी पड़ी।
सिविल सर्जन डॉ. जयंत आहूजा ने बताया कि जाे लोग एंडरॉयड मोबाइल व ऑनलाइन पेमेंट नहीं कर सकते। उनकी मदद स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी करेंगे। वो खुद उनकी पेमेंट करेंगे। कर्मियों को ये निर्देश दिए जा चुके हैं। लोगों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं होने दी जाएगी।