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Panipat News: पिता की मौत पर भाइयों ने धक्के देकर निकाला, बेटे की मौत से मिला सदमा
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पानीपत। सामूहिक दुराचार से पीड़ित महिला को कदम-कदम पर दर्द मिला है। जिससे उसकी मानसिक स्थिति बिगड़ गई। एक साल पहले उसके पिता की मृत्यु हुई थी। वह अपने पति के साथ मायके पहुंची तो सौतेली मां और पांच भाइयों ने धक्के देकर वहां से निकाल दिया था। जिससे वह मानसिक रूप से बीमार हो गई थी। मई माह में उसके तीन साल के बेटे की मौत होने से उसे गहरा सदमा पहुंचा।
बेटे की आत्मा की शांति के लिए जिस दिन पाठ होना था उसी दिन वह घर से निकल गई थी। जिससे अभी तक शांतिपाठ भी नहीं हो सका। पति का कहना है कि उसके पास इतने पैसे भी नहीं कि वह रोहतक जाकर पत्नी को देख आए। ठेकेदार से पैसे मांगे हैं, पैसे मिलने के बाद वह उसके पास जाएगा।
पानीपत के किला थाना क्षेत्र में रहने वाले पति ने बताया कि करीब 12 साल पहले उसका विवाह दिल्ली के उस्मानपुर पहला पुश्ता निवासी महिला से हुआ था। उनके तीन बच्चे हुए। जिसमें बड़ी दो बेटी हैं, और एक बेटा था। उसने बताया कि पत्नी बचपन से ही उतार चढ़ाव वाले माहौल में रही। उसकी मां किसी अन्य व्यक्ति के साथ चली गई थी। जिस कारण उसके पिता ने दूसरी शादी कर ली थी। सौतेली मां उससे नफरत करती थी।
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शादी के बाद सौतेली मां और पांच भाइयों ने मुंह मोड़ लिया। एक साल पहले उसके पिता की मौत हो गई। जिसकी सूचना पर वह पत्नी को लेकर उसके मायके गया। जहां पर सौतेली मां और पांच भाइयों ने उसे धक्के देकर घर से निकाल दिया था। जिससे उसे मानसिक आघात पहुंचा और वह विक्षिप्तों जैसी हरकत करने लगी। मई माह में उनके तीन साल के बेटे की बीमारी से मौत हो गई। इसके बाद पत्नी को गहरा सदमा लगा। 25 जून को बेटे की आत्मा की शांति के लिए पाठ रखा था, लेकिन पाठ से पहले ही वह घर से निकल गई थी। जिस कारण शांतिपाठ भी अधूरा रह गया। तीन जुलाई को उसके पास फोन आया था कि उसकी पत्नी रोहतक में है और ट्रेन की चपेट में आने से उसका पैर कट गया।
पहले भी चली गई थी घर से ः महिला के पति ने बताया कि उसकी पत्नी दो बार पहले भी घर से निकल चुकी थी। एक बार तो वह खुद ही छह दिन बाद वापस आ गई थी। करीब पांच माह पहले वह एक बार फिर से निकल गई। जिसके बाद वह एक माह तक जींद के एक आश्रम में रही। जहां उसका उपचार हुआ तो उसकी याददाश्त वापस आ गई और उसने फोन कर लिया। जिसके बाद वह उसे जींद से लेकर आए थे।
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बेटे की आत्मा की शांति के लिए जिस दिन पाठ होना था उसी दिन वह घर से निकल गई थी। जिससे अभी तक शांतिपाठ भी नहीं हो सका। पति का कहना है कि उसके पास इतने पैसे भी नहीं कि वह रोहतक जाकर पत्नी को देख आए। ठेकेदार से पैसे मांगे हैं, पैसे मिलने के बाद वह उसके पास जाएगा।
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पानीपत के किला थाना क्षेत्र में रहने वाले पति ने बताया कि करीब 12 साल पहले उसका विवाह दिल्ली के उस्मानपुर पहला पुश्ता निवासी महिला से हुआ था। उनके तीन बच्चे हुए। जिसमें बड़ी दो बेटी हैं, और एक बेटा था। उसने बताया कि पत्नी बचपन से ही उतार चढ़ाव वाले माहौल में रही। उसकी मां किसी अन्य व्यक्ति के साथ चली गई थी। जिस कारण उसके पिता ने दूसरी शादी कर ली थी। सौतेली मां उससे नफरत करती थी।
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शादी के बाद सौतेली मां और पांच भाइयों ने मुंह मोड़ लिया। एक साल पहले उसके पिता की मौत हो गई। जिसकी सूचना पर वह पत्नी को लेकर उसके मायके गया। जहां पर सौतेली मां और पांच भाइयों ने उसे धक्के देकर घर से निकाल दिया था। जिससे उसे मानसिक आघात पहुंचा और वह विक्षिप्तों जैसी हरकत करने लगी। मई माह में उनके तीन साल के बेटे की बीमारी से मौत हो गई। इसके बाद पत्नी को गहरा सदमा लगा। 25 जून को बेटे की आत्मा की शांति के लिए पाठ रखा था, लेकिन पाठ से पहले ही वह घर से निकल गई थी। जिस कारण शांतिपाठ भी अधूरा रह गया। तीन जुलाई को उसके पास फोन आया था कि उसकी पत्नी रोहतक में है और ट्रेन की चपेट में आने से उसका पैर कट गया।
पहले भी चली गई थी घर से ः महिला के पति ने बताया कि उसकी पत्नी दो बार पहले भी घर से निकल चुकी थी। एक बार तो वह खुद ही छह दिन बाद वापस आ गई थी। करीब पांच माह पहले वह एक बार फिर से निकल गई। जिसके बाद वह एक माह तक जींद के एक आश्रम में रही। जहां उसका उपचार हुआ तो उसकी याददाश्त वापस आ गई और उसने फोन कर लिया। जिसके बाद वह उसे जींद से लेकर आए थे।