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सार्थक पहल: कोरोना काल में घर बैठे करवाएं अस्थि विसर्जन, ऑनलाइन देखें पूरी प्रक्रिया
Wed, 09 Jun 2021 10:17 AM IST
निवेदिता वर्मा
जितेंद्र नरवाल, अमर उजाला, पानीपत (हरियाणा)
जितेंद्र नरवाल, अमर उजाला, पानीपत (हरियाणा)
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Wed, 09 Jun 2021 10:17 AM IST
सार
यदि किसी के पास ऑनलाइन माध्यम नहीं है तो उनके घर फोटो पहुंचाई जाती है। गंगा जल की बोतल भी भेजी जाती है। पूरी व्यवस्था निशुल्क है। अगर कोई अपने मन से दान दक्षिणा देना चाहता है तो पंडितों को दे सकता है या पीएम रिलीफ फंड में जमा करवा सकता है।
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अस्थि विसर्जन
- फोटो : सांकेतिक तस्वीर
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विस्तार
कोरोना के कारण लाखों परिवारों ने अपनों को खोया है। हिंदू रीति रिवाज के अनुसार अंतिम संस्कार के बाद अस्थियां गंगा में प्रवाहित की जाती हैं, लेकिन लॉकडाउन के चलते ये संभव नहीं हो पा रहा। इन हालातों में डाक विभाग के माध्यम से ओम दिव्य दर्शन संस्था ने एक सार्थक पहल की है। इसके तहत लोग अब घर बैठे अपनों की अस्थियों का विसर्जन कर सकते हैं।
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इतना ही नहीं वे ऑनलाइन अस्थि विसर्जन और रीति रिवाज के अनुसार श्राद्ध की पूरी प्रक्रिया भी देख सकेंगे। जिनके पास ऑनलाइन माध्यम नहीं है, उनके घर पूरी प्रक्रिया की फोटो भेजी जाएंगी। साथ ही अस्थि विसर्जन के बाद घर पर गंगाजल की एक बोतल पहुंचाई जाएगी। ये पूरी प्रक्रिया निशुल्क है।
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सबसे खास बात ये है कि ये पूरी व्यवस्था केवल देशवासियों के लिए नहीं बल्कि विदेशों में रह रहे लोगों के लिए भी है। हरिद्वार, वाराणसी, प्रयागराज और गया में अस्थि विसर्जन किया जाएगा। इसकी शुरुआत एनआरआई व्यापारी और ओम दिव्य दर्शन के संस्थापक अरविंद राजपूत ने की है। उन्होंने बताया कि इस काम के लिए उनकी संस्था ने 270 पंडितों को नियुक्त किया है। वे रोजाना विधिपूर्वक करीब 350 तक अस्थि विसर्जन करने का काम करते हैं।
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हर विसर्जन के लिए दो पंडित होते हैं। एक अस्थि विसर्जन करता है तो दूसरा श्राद्ध करवाता है। इस पूरी प्रकिया को संबंधित परिवार को ऑनलाइन दिखाया जाता है। इस दौरान एक ग्रुप में 6 से 7 लोगों का अस्थि विसर्जन भी किया जा सकता है। इसके लिए किसी से कोई चार्ज नहीं लिया जाता। अगर कोई अपने मन से दान दक्षिणा देना चाहता है तो पंडितों को दे सकता है या पीएम रिलीफ फंड में जमा करवा सकता है।
कराना होगा पंजीकरण
अस्थि कलश विसर्जन के लिए परिवार के सदस्यों को पहले ओम दिव्य दर्शन के पोर्टल http://omdivyadarshan.org/ पर रजिस्ट्रेशन करवाना होगा। यहीं से चैट या फोन नंबर से संपर्क सूत्र भी मिल जाएगा। अब कलश में अस्थियों को डालकर इसे अच्छे तरीके से कवर करना होगा। इसके बाद इसे डाकघर के माध्यम से संबंधित जगह (हरिद्वार, वाराणसी, प्रयागराज और गया) भेजना होगा। इस पर अपने नाम, पते, मोबाइल नंबर के साथ ओम दिव्य दर्शन भी लिखना होगा। इसे डाक विभाग संबंधित जगह के ओम दिव्य दर्शन संस्था के पदाधिकारियों तक पहुंचाएगा। यहां विधि पूर्वक इन अस्थियों का विसर्जन किया जाएगा।
कोरोना महामारी को देखते हुए आया ख्याल : राजपूत
मूल रूप से यूपी के मथुरा के रहने वाले एनआरआई अरविंद राजपूत ने बताया कि वे पिछले 22 सालों से सिंगापुर में रह रहे हैं, वहीं उनका व्यापार है। वर्तमान में वे अपने परिवार के साथ मुंबई में रहते हैं। कोरोना वैश्विक महामारी में लोगों को अपनों को खोते हुए और उनका संस्कार तक कर पाने को देखा तो उनके मन में ख्याल आया कि एक ऐसी व्यवस्था की जाए जिससे लोग घर बैठे ही अपनों का अंतिम संस्कार कर सकें और इसे देख भी सकें। इसी सोच के लिए चलते ये विकल्प चुना। आज देश भर से रोजाना हजारों फोन आते हैं। रोजाना सैकड़ों अस्थियों के कलश आते हैं, जिनको विधि पूर्वक पंडित विसर्जन और श्राद्ध करवाने का काम करते हैं।