{"_id":"67a9148ef867f10f5b0f10fe","slug":"no-one-could-escape-the-blow-of-karma-ashish-panipat-news-c-244-1-pnp1007-131944-2025-02-10","type":"story","status":"publish","title_hn":"कर्मों की मार से कोई भी नहीं बच पाया : आशीष","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कर्मों की मार से कोई भी नहीं बच पाया : आशीष
विज्ञापन
पानीपत। मानव पाप कर्म करने में एक क्षण भी नहीं सोच रहा है। वह हिंसा करने, झूठ बोलने, चोरी करने, असंयम के रास्ते पर चलने में आगे है। इसलिए उसके दान, सेवा, सहयोग आदि अच्छी प्रवृति के सद् पुरुषार्थ कमजोर पड़ जाते हैं। दुनिया में कर्मों की मार से आज तक कोई भी नहीं बच पाया है, भले ही वह अवतारी पुरुष ही क्यों न हो।
ये शब्द राष्ट्र संत उत्तर भारतीय प्रवर्तक आशीष मुनि महाराज ने रविवार को अग्रवाल मंडी जैन स्थानक में अपने प्रवचन के दौरान कहे। प्रवर्तक महाराज यहां तत्व चिंतक उत्तम मुनि महाराज, स्वाध्याय साधक विराग मुनि महाराज, बालचंद महाराज, ठाणा-4 के साथ मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि पाप करते हुए डरें, सौ बार सोचें कि इसका दुष्परिणाम क्या हो सकता है। जैसे आग में हाथ डालते वक्त मानव डरता है, वैसे ही पाप मार्ग से डरते रहना, बचकर रहना, कुपथ को त्याग कर चलना ही धर्म का मार्ग है, आत्म कल्याण का मार्ग है। मत भूलिए कि दुनिया में कर्मों की मार से आज तक कोई भी नहीं बच पाया है, भले ही वह अवतारी पुरुष ही क्यों न हो।
उत्तम मुनि महाराज ने कहा कि मानव बड़े-बड़े भवनों में रहने से, महंगी गाड़ी में सफर करने से या बड़े पद पर प्रतिष्ठित होने से बड़ा नहीं होता बल्कि वह बड़ा तब होता है जबकि उसके जीवन में शील, संयम व सदाचार हो।
विज्ञापन
उन्होंने संसार के हर जीव में महावीर बसा है, दुख दो न किसी को, यह उसी ने तो कहा है, सबसे बड़ी है जगत में दया, दान की दौलत, उपकार की दौलत, इस अहसास की दौलत इक रहम की दौलत से यह संसार बसा है।
विज्ञापन
ये शब्द राष्ट्र संत उत्तर भारतीय प्रवर्तक आशीष मुनि महाराज ने रविवार को अग्रवाल मंडी जैन स्थानक में अपने प्रवचन के दौरान कहे। प्रवर्तक महाराज यहां तत्व चिंतक उत्तम मुनि महाराज, स्वाध्याय साधक विराग मुनि महाराज, बालचंद महाराज, ठाणा-4 के साथ मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि पाप करते हुए डरें, सौ बार सोचें कि इसका दुष्परिणाम क्या हो सकता है। जैसे आग में हाथ डालते वक्त मानव डरता है, वैसे ही पाप मार्ग से डरते रहना, बचकर रहना, कुपथ को त्याग कर चलना ही धर्म का मार्ग है, आत्म कल्याण का मार्ग है। मत भूलिए कि दुनिया में कर्मों की मार से आज तक कोई भी नहीं बच पाया है, भले ही वह अवतारी पुरुष ही क्यों न हो।
विज्ञापन
उत्तम मुनि महाराज ने कहा कि मानव बड़े-बड़े भवनों में रहने से, महंगी गाड़ी में सफर करने से या बड़े पद पर प्रतिष्ठित होने से बड़ा नहीं होता बल्कि वह बड़ा तब होता है जबकि उसके जीवन में शील, संयम व सदाचार हो।
विज्ञापन
उन्होंने संसार के हर जीव में महावीर बसा है, दुख दो न किसी को, यह उसी ने तो कहा है, सबसे बड़ी है जगत में दया, दान की दौलत, उपकार की दौलत, इस अहसास की दौलत इक रहम की दौलत से यह संसार बसा है।