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फेस्टिवल सीजन में नहीं मिल रही कंफर्म सीट

Thu, 17 Oct 2013 11:05 PM IST
अमर उजाला, पानीपत
अमर उजाला, पानीपत Updated Thu, 17 Oct 2013 11:05 PM IST
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no confirm seat in festive season
पानीपत मेंफेस्टिवल सीजन के चलते यात्रियों को ट्रेनों में कन्फर्म सीट
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नहीं मिल रही है। जहां आम्रपाली में इस समय नो रूम चल रहा है वहीं आम्रपाली, सरयू यमुना और सचखंड समेत कई ट्रेनों में कंफर्म सीट की लंबी-लंबी वेटिंग चल रही है।

ट्रेन की सीट न मिलना यात्रियों को अपनों के साथ त्योहारों में एकाध दिन बिताने में रोड़ा बनी है।
अपने किसी भी कामकाज, नौकरी या बिजनेस के सिलसिले में घरों से बाहर रहने वालों की सोच रहती है कि दीवाली पैतृक गांव या शहर में अपने घर में ही मनाई। इसी सोच के चलते घरों से बाहर दूर दराज क्षेत्रों में रहने वाले दीवाली से एक या दो दिन पहले ही अपने घर जाना चाहते हैं। ऐसे में लोगों ने पहले ही रेलों मेें सीट बुकिंग करानी शुरू कर दी है।

यह है ट्रेनों की स्थिति
इस समय कई ट्रेनों में तो नो रूम और कइयों में लंबी वेटिंग चल रही है। 18 अक्तूबर को डाउन साइड में आम्रपाली एक्सप्रेस में नो रूम, सरयू यमुना एक्सप्रेस में स्लीपर में 180, सचखंड स्लीपर में 185, जम्मू मेल में थर्ड एसी में 220 व स्लीपर में 75, दादर में स्लीपर में 85, झेलम में 125 और नूरी में 200 वेटिंग चल रही है। जम्मू की तरफ जाने वाली  संपर्क क्रांति में स्लीपर में 128 वेटिंग चल रही है।

कोच बढ़ाने पर भी नहीं मिली राहत
फेस्टिवल सीजन को ध्यान मेें रखते हुए यात्रियों को सुविधा देने के उद्देश्य से रेल मंडल ने कई ट्रेनाें में कोच भी बढ़ाए थे। कोच बढ़ाने के बाद भी कोई खास राहत नहीं मिल पाई है।

रेल मंडल ने चंडीगढ़ से इलाहाबाद के बीच चलने वाली 14217-18 उंचाहर एक्सप्रेस ट्रेन में एक कोच एसी थर्ड और एक स्लीपर कोच जोड़ा है। दिल्ली से लखनऊ के बीच चलने वाली 12231-32 सद्भावना एक्सप्रेस में एक कोच थर्ड एसी और स्लीपर कोच जोड़ा। इसके अलावा बनारस-जम्मूतवी 12237-38 बेगमपुर सुपरफास्ट एक्सप्रेस ट्रेन में एक स्लीपर कोच लगाया था। इनके अलावा कई नई ट्रेन भी चलाई थी। लेकिन उनमें से कइयाें के रूट अलग थे तो कई ट्रेनों का पानीपत में ठहराव ही नहीं है। इस कारण उनका शहरवासियों को कोई खास लाभ नहीं मिल पाया।

दिन भर रहती है लंबी लाइन

टिकट बनवाने वालों की सुबह लाइन लगना शुरू जाती है। औद्योगिक नगरी पानीपत में ज्यादातर आबादी यूपी व बिहार समेत अन्य राज्याें की हैं। यहां पर कामगार, मजदूर और अन्य तबका बाहर से आकर बसा है। ज्यादातर लोगों की सोच रहती है कि वे अपने पैतृक स्थान पर जाकर ही दीवाली या अन्य त्योहार मनाए।

वर्जन
त्योहाराें के समय ट्रेनों में यात्रियों की संख्या ज्यादा होती है। इसको ध्यान में रखते हुए मंडल ने कई ट्रेनो में कोच भी बढ़ाए हैं। कोच बढ़ाने या घटाने का काम उच्च अधिकारियों का होता है।
अजय माइकल, पीआरओ, उत्तर रेलवे दिल्ली मंडल
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