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Panipat News: नकली दूध, पनीर और मावे की जांच तक नहीं... सीएओ से मिले ग्रामीण
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हरियाणा डेयरी डेवलेपमेंट के सीएओ रोहित यादव के साथ बैठक करते उरलाना कलां के पशुपालक व अन्य। स्
माई सिटी रिपोर्टर
पानीपत/मतलौडा। उरलाना कलां गांव के गुरुद्वारे में रविवार को हुई महापंचायत के बाद भी सोमवार को नकली दूध, पनीर और मावे की जांच तक नहीं करवाई गई। प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई न होने से नाराज ग्रामीणों और किसान संगठनों के प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को चंडीगढ़ पहुंचकर हरियाणा डेयरी डेवलपमेंट फेडरेशन के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी (सीएओ) रोहित यादव से मुलाकात की।
प्रतिनिधिमंडल ने गांव में चल रही केमिकल भट्ठियों पर कार्रवाई, मिलावटी उत्पादों के कारोबार पर रोक और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। साथ ही प्रशासन को 22 सितंबर तक कार्रवाई का अल्टीमेटम दिया। कार्रवाई नहीं होने पर पानीपत जिला सचिवालय में अनिश्चितकालीन धरना शुरू करने की चेतावनी दी गई। प्रतिनिधिमंडल ने वीटा की ओर से किसानों से खरीदे जाने वाले दूध के दाम बढ़ाने की मांग भी रखी।
उरलाना खुर्द के पूर्व सरपंच गुरचरण सिंह, यादवीर, सुखविंदर सिंह डबर, जगदीप सिंह ओलख, अमरजीत मोहरी और सुखजिंदर सिंह जब्बार समेत हरियाणा डेयरी यूनियन और विभिन्न किसान संगठनों के पदाधिकारी प्रतिनिधिमंडल में शामिल रहे।
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ग्रामीणों का दावा है कि मिलावटी उत्पादों से तैयार मिठाइयां बाजार की तुलना में काफी कम कीमत पर बेची जा रही हैं। कुछ मिठाइयां बाजार भाव से करीब तीन गुना तक कम कीमत में उपलब्ध होने का दावा किया गया। उनका कहना है कि कम कीमत के कारण इनकी मांग अधिक है, जिससे शुद्ध दूध और उससे बने उत्पाद तैयार करने वाले कारोबारियों और पशुपालकों को नुकसान हो रहा है।
ग्रामीण का 200 भट्ठियां चलने का दावा
ग्रामीणों का कहना है कि उरलाना कलां और आसपास के क्षेत्रों में करीब 200 केमिकल भट्ठियां चल रही हैं। इनमें तौर पर केमिकल, डिटर्जेंट और अन्य घटिया सामग्री का इस्तेमाल कर दूध, पनीर, मावा और मिठाइयां तैयार की जा रही हैं। सामान्य दिनों में प्रतिदिन करीब 150 क्विंटल और त्योहारी सीजन में 300 क्विंटल तक नकली मावा और पनीर तैयार किया जाता है। उनका दावा है कि इन उत्पादों की हरियाणा, दिल्ली और पंजाब के विभिन्न शहरों में सप्लाई की जाती है। ग्रामीणों ने कहा कि ऐसे उत्पादों के सेवन से लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
दूध के दाम बढ़ाने की मांग
चंडीगढ़ में प्रतिनिधिमंडल ने वीटा मिल्क सेंटर की ओर से किसानों से खरीदे जाने वाले दूध के दाम बढ़ाने की मांग भी रखी। पलविंदर सिंह, जज सिंह, प्रिंस बडैच और गुरजीत सिंह अंबाला ने कहा कि चारे, पशुओं के रखरखाव और अन्य खर्च बढ़ने से पशुपालन किसानों के लिए मुश्किल होता जा रहा है। उन्होंने कहा कि कई किसानों और युवाओं ने कर्ज लेकर डेयरियां स्थापित की हैं, लेकिन शुद्ध दूध का उचित मूल्य नहीं मिलने से उन्हें आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि महापंचायत में मिलावट के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर प्रस्ताव पारित किया गया था। सोमवार को मौके पर खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम नहीं पहुंचने से ग्रामीणों में रोष रहा। उन्होंने कहा कि 22 सितंबर तक कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन शुरू किया जाएगा।
केमिकलयुक्त दूध और उससे तैयार होने वाले उत्पाद स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक हैं। खाद्य सुरक्षा विभाग को तुरंत मौके पर भेजकर सैंपलिंग कराने के निर्देश दिए गए हैं। सैंपल में किसी भी प्रकार की मिलावट पाए जाने पर दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। -डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ, उपायुक्त, पानीपत।
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पानीपत/मतलौडा। उरलाना कलां गांव के गुरुद्वारे में रविवार को हुई महापंचायत के बाद भी सोमवार को नकली दूध, पनीर और मावे की जांच तक नहीं करवाई गई। प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई न होने से नाराज ग्रामीणों और किसान संगठनों के प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को चंडीगढ़ पहुंचकर हरियाणा डेयरी डेवलपमेंट फेडरेशन के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी (सीएओ) रोहित यादव से मुलाकात की।
प्रतिनिधिमंडल ने गांव में चल रही केमिकल भट्ठियों पर कार्रवाई, मिलावटी उत्पादों के कारोबार पर रोक और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। साथ ही प्रशासन को 22 सितंबर तक कार्रवाई का अल्टीमेटम दिया। कार्रवाई नहीं होने पर पानीपत जिला सचिवालय में अनिश्चितकालीन धरना शुरू करने की चेतावनी दी गई। प्रतिनिधिमंडल ने वीटा की ओर से किसानों से खरीदे जाने वाले दूध के दाम बढ़ाने की मांग भी रखी।
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उरलाना खुर्द के पूर्व सरपंच गुरचरण सिंह, यादवीर, सुखविंदर सिंह डबर, जगदीप सिंह ओलख, अमरजीत मोहरी और सुखजिंदर सिंह जब्बार समेत हरियाणा डेयरी यूनियन और विभिन्न किसान संगठनों के पदाधिकारी प्रतिनिधिमंडल में शामिल रहे।
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ग्रामीणों का दावा है कि मिलावटी उत्पादों से तैयार मिठाइयां बाजार की तुलना में काफी कम कीमत पर बेची जा रही हैं। कुछ मिठाइयां बाजार भाव से करीब तीन गुना तक कम कीमत में उपलब्ध होने का दावा किया गया। उनका कहना है कि कम कीमत के कारण इनकी मांग अधिक है, जिससे शुद्ध दूध और उससे बने उत्पाद तैयार करने वाले कारोबारियों और पशुपालकों को नुकसान हो रहा है।
ग्रामीण का 200 भट्ठियां चलने का दावा
ग्रामीणों का कहना है कि उरलाना कलां और आसपास के क्षेत्रों में करीब 200 केमिकल भट्ठियां चल रही हैं। इनमें तौर पर केमिकल, डिटर्जेंट और अन्य घटिया सामग्री का इस्तेमाल कर दूध, पनीर, मावा और मिठाइयां तैयार की जा रही हैं। सामान्य दिनों में प्रतिदिन करीब 150 क्विंटल और त्योहारी सीजन में 300 क्विंटल तक नकली मावा और पनीर तैयार किया जाता है। उनका दावा है कि इन उत्पादों की हरियाणा, दिल्ली और पंजाब के विभिन्न शहरों में सप्लाई की जाती है। ग्रामीणों ने कहा कि ऐसे उत्पादों के सेवन से लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
दूध के दाम बढ़ाने की मांग
चंडीगढ़ में प्रतिनिधिमंडल ने वीटा मिल्क सेंटर की ओर से किसानों से खरीदे जाने वाले दूध के दाम बढ़ाने की मांग भी रखी। पलविंदर सिंह, जज सिंह, प्रिंस बडैच और गुरजीत सिंह अंबाला ने कहा कि चारे, पशुओं के रखरखाव और अन्य खर्च बढ़ने से पशुपालन किसानों के लिए मुश्किल होता जा रहा है। उन्होंने कहा कि कई किसानों और युवाओं ने कर्ज लेकर डेयरियां स्थापित की हैं, लेकिन शुद्ध दूध का उचित मूल्य नहीं मिलने से उन्हें आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि महापंचायत में मिलावट के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर प्रस्ताव पारित किया गया था। सोमवार को मौके पर खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम नहीं पहुंचने से ग्रामीणों में रोष रहा। उन्होंने कहा कि 22 सितंबर तक कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन शुरू किया जाएगा।
केमिकलयुक्त दूध और उससे तैयार होने वाले उत्पाद स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक हैं। खाद्य सुरक्षा विभाग को तुरंत मौके पर भेजकर सैंपलिंग कराने के निर्देश दिए गए हैं। सैंपल में किसी भी प्रकार की मिलावट पाए जाने पर दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। -डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ, उपायुक्त, पानीपत।