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Panipat News: एनएचएम कर्मचारियों का बेमियादी हड़ताल का एलान, डिलीवरी सेवाएं प्रभावित
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पानीपत। एनएचएम कर्मचारियों ने अब मांगे न माने जाने तक हड़ताल पर रहने का ऐलान कर दिया है। पहले कर्मचारियों ने सोमवार तक हड़ताल पर रहने का फैसला किया था, सरकार ने इनकी मांगे नहीं मानी। अब मांगे न माने जाने तक कर्मचारी हड़ताल पर रहेंगे। हड़ताल में एनएचएम के 350 कर्मचारी शामिल हैं। इनमें 12 डॉक्टर, 33 स्टाफ नर्स, एंबुलेंस चालक, क्लर्क , डाटा एंटी ऑपरेशन समेत स्वास्थ्य विभाग के कई प्रोजेक्ट के अधिकारी व कर्मचारी शामिल हैं।
एनएचएम कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने से कई सेवाएं पूरी तरह से प्रभावित हैं। प्रसूति वार्ड में डिलीवरी सेवाओं में 20 प्रतिशत तक की कमी आ गई है। जहां पहले प्रतिदिन 35-40 डिलीवरी होती थी अब घटकर औसतन 25 डिलीवरी रह गई हैं। हड्डी रोग की भी सोमवार को महज 40 ओपीडी हुई हैं। टीकाकरण कार्यक्रम भी लगभग ठप हो गए हैं। सोमवार को भी एनएचएम कर्मचारियों ने जिला नागरिक अस्पताल के गेट पर एकत्रित होकर सरकार के खिलाफ रोष प्रदर्शन किया है।
जिला नागरिक अस्पताल में दो हड्डी रोग विशेषज्ञ हैं। एक हड़्डी रोग विशेषज्ञ एनएचएम के अंतर्गत है। वह अकसर हड्डी संबंधी सर्जरी करते हैं। दूसरे हड्डी रोग विशेषज्ञ ओपीडी करते हैं। हड़ताल से की हड्डी से कई सर्जरी रुक गई है।
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फिजियोथैरेपी विभाग की प्रभारी डॉ. नेहा बंसल एनएचएम की हड़ताल में शामिल है। इसलिए फिजियोथैरेपी सेवाएं पूरी तरह से बंद है। यहां हर रोज इलाज के लिए 30-40 मरीज आते हैं। इनमें अधिकतर बुजुर्ग शामिल हैं। इनको बिना इलाज ही घर लौटना पड़ रहा है।
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एसएनसीयू वार्ड की सेवाएं भी प्रभावित
एनएचएम की हड़ताल से एसएनसीयू वार्ड की सेवाएं भी प्रभावित हो रही है। एनएनसीयू का 80 प्रतिशत स्टाफ एनएचएम के अंतर्गत कार्यरत है। यहां के तीन डॉक्टर व 12 नर्सिंग ऑफिसर एनएचएम के अंतर्गत कार्यरत है। अब यहां पर दूसरे वार्डों से नर्सिंग ऑफिसर लगाए गए हैं।
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स्वास्थ्य विभाग का सारा कागजी काम ठप
एनएचएम की हड़ताल के कारण सारा कागजी काम ठप हो गया है । एनएचएम कर्मचारियों पर ही स्वास्थ्य विभाग की सभी रोगों की रिपोर्ट तैयार करने, डॉक्टरों व स्टाफ का वेतन बनाने, ढांचागत रिपोर्ट तैयार करने, बजट का लेखाजोखा तैयार करने का जिम्मा है। सरकारी कर्मचारियों की संख्या काफी कम है।
सरकार जल्द उनकी मांगे माने- मलिक
एनएचएम संघ के जिलाध्यक्ष अमित मलिक ने कहा सरकार ने उनकी मांगे नहीं मानी है । इसलिए हड़ताल का अनिश्चितकालीन कर दिया गया है। उनकी हड़ताल से लोगों को परेशानी हो रही है। इसकी जिम्मेदार सरकार है। सरकार उनके साथ अन्याय कर रही है। इसलिए उन्हें हड़ताल पर जाना पड़ा। वह एनएचएम के अंतर्गत कार्यरत हैं। आज तक उनको सातवां पे स्केल नहीं दिया गया है। वह सालों से अपनी मांगों को लेकर संघर्ष करते आए हैं। स्वास्थ्य विभाग पूर्ण रूप से एनएचएम कर्मचारियों पर निर्भर है लेकिन उनका शोषण हो रहा है। उनकी मांग है कि उन्हें सातवां पे स्केल दिया जाए। उनको पक्का किया जाए, ईएल , चिकित्सा सुविधा, सेवानिवृति पर ग्रेज्युटी व नौकरी की सुरक्षा जाए।
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एनएचएम कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने से कई सेवाएं पूरी तरह से प्रभावित हैं। प्रसूति वार्ड में डिलीवरी सेवाओं में 20 प्रतिशत तक की कमी आ गई है। जहां पहले प्रतिदिन 35-40 डिलीवरी होती थी अब घटकर औसतन 25 डिलीवरी रह गई हैं। हड्डी रोग की भी सोमवार को महज 40 ओपीडी हुई हैं। टीकाकरण कार्यक्रम भी लगभग ठप हो गए हैं। सोमवार को भी एनएचएम कर्मचारियों ने जिला नागरिक अस्पताल के गेट पर एकत्रित होकर सरकार के खिलाफ रोष प्रदर्शन किया है।
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जिला नागरिक अस्पताल में दो हड्डी रोग विशेषज्ञ हैं। एक हड़्डी रोग विशेषज्ञ एनएचएम के अंतर्गत है। वह अकसर हड्डी संबंधी सर्जरी करते हैं। दूसरे हड्डी रोग विशेषज्ञ ओपीडी करते हैं। हड़ताल से की हड्डी से कई सर्जरी रुक गई है।
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फिजियोथैरेपी विभाग की प्रभारी डॉ. नेहा बंसल एनएचएम की हड़ताल में शामिल है। इसलिए फिजियोथैरेपी सेवाएं पूरी तरह से बंद है। यहां हर रोज इलाज के लिए 30-40 मरीज आते हैं। इनमें अधिकतर बुजुर्ग शामिल हैं। इनको बिना इलाज ही घर लौटना पड़ रहा है।
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एसएनसीयू वार्ड की सेवाएं भी प्रभावित
एनएचएम की हड़ताल से एसएनसीयू वार्ड की सेवाएं भी प्रभावित हो रही है। एनएनसीयू का 80 प्रतिशत स्टाफ एनएचएम के अंतर्गत कार्यरत है। यहां के तीन डॉक्टर व 12 नर्सिंग ऑफिसर एनएचएम के अंतर्गत कार्यरत है। अब यहां पर दूसरे वार्डों से नर्सिंग ऑफिसर लगाए गए हैं।
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स्वास्थ्य विभाग का सारा कागजी काम ठप
एनएचएम की हड़ताल के कारण सारा कागजी काम ठप हो गया है । एनएचएम कर्मचारियों पर ही स्वास्थ्य विभाग की सभी रोगों की रिपोर्ट तैयार करने, डॉक्टरों व स्टाफ का वेतन बनाने, ढांचागत रिपोर्ट तैयार करने, बजट का लेखाजोखा तैयार करने का जिम्मा है। सरकारी कर्मचारियों की संख्या काफी कम है।
सरकार जल्द उनकी मांगे माने- मलिक
एनएचएम संघ के जिलाध्यक्ष अमित मलिक ने कहा सरकार ने उनकी मांगे नहीं मानी है । इसलिए हड़ताल का अनिश्चितकालीन कर दिया गया है। उनकी हड़ताल से लोगों को परेशानी हो रही है। इसकी जिम्मेदार सरकार है। सरकार उनके साथ अन्याय कर रही है। इसलिए उन्हें हड़ताल पर जाना पड़ा। वह एनएचएम के अंतर्गत कार्यरत हैं। आज तक उनको सातवां पे स्केल नहीं दिया गया है। वह सालों से अपनी मांगों को लेकर संघर्ष करते आए हैं। स्वास्थ्य विभाग पूर्ण रूप से एनएचएम कर्मचारियों पर निर्भर है लेकिन उनका शोषण हो रहा है। उनकी मांग है कि उन्हें सातवां पे स्केल दिया जाए। उनको पक्का किया जाए, ईएल , चिकित्सा सुविधा, सेवानिवृति पर ग्रेज्युटी व नौकरी की सुरक्षा जाए।