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वीपीसीबी व भू जल प्राधिकरण रिफाइनरी द्वारा पर्यावरण को पहुंचाए गए नुकशास के आंकलन की रिपोर्ट नहीं कर सका पेश, एनजीटी ने 30 मार्च

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 19 Feb 2020 01:18 AM IST
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NGT take action for panipat polution
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल) पानीपत पर करोड़ों रुपये का हर्जाने की समीक्षा कर रहा है। रिफाइनरी पर वायु और जल प्रदूषण कर पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचाने का आरोप है। एनजीटी ने सीपीसीबी, भू जल प्राधिकरण की टीमों को पर्यावरण के नुकसान का आंकलन करने के निर्देश जारी किए थे। इस मामले की सुनवाई एनजीटी में सोमवार को हुई। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और भूजल प्राधिकरण इस मामले से संबंधित रिपोर्ट पेश नहीं कर पाया। इसलिए हर्जाना तय नहीं हो पाया है। अब एनजीटी ने मामले की सुनवाई के लिए अगली तारीख 30 मार्च तय की है। एनजीटी के कड़े रुख को देखते हुए ये अंदाजा लगाया जा रहा है कि रिफाइनरी पर भारी भरकम जुर्माना लग सकता है।
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पानीपत रिफाइनरी पर यह कार्रवाई अपनी ही इकाई के केमिकल युक्त पानी को बगैर शोधित किए जमीन के अंदर डालने पर की जा सकती है। मामले की जांच करने वाली कमेटी ने माना है कि इकाई के आसपास के 70 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में भूजल भी दूषित हो चुका है, जिससे थर्मल क्षेत्र के गांव वासी गंभीर बीमारी की चपेट में आ गए हैं। एनजीटी ने अगस्त के महीने में पानीपत रिफायनरी की ओर से फैलाए गए प्रदूषण और उसकी क्षतिपूर्ति के लिए एसआईआर-एनईईआरआई) और सेंट्रल ग्रांउड वॉटर बोर्ड (सीजीडब्ल्यूबी) की संयुक्त टीम बनाई थी। जिसने रिफायनरी और आसपास के इलाकों में प्रदूषण की जांच की थी। टीम ने विस्तार से जांच करके जुर्माना तथा जीर्णोद्धार के लिए आंकलन तैयार किया है।
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उसी के आधार पर की गई जांच में यह खुलासा हुआ है कि पानीपत रिफाइनरी में केमिकल युक्त पानी को बगैर शोधित किए जमीन के अंदर डाला गया है। जिसके कारण आसपास के 70 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र का भूजल दूषित हो चुका है। इतना ही नहीं आसपास आक्सीजन की कमी होने के कारण थर्मल क्षेत्र के गांव वासी गंभीर बीमारी की चपेट में आ गए हैं।
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इस रिपोर्ट को तैयार करने के लिए एक्सपर्ट की राय भी ली गई थी। एक्सपर्ट और तीनों संस्थाओं से रिपोर्ट मिलने के बाद 20 सितंबर को बैठक हुई, जिसमें उपायुक्त पानीपत ने एक्सपर्ट राय के लिए मैसर्स इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड को शामिल किया गया। एक्सपर्ट और कमेटी ने 20 नवंबर को एनजीटी को रिपोर्ट सौंप दी।
इस रिपोर्ट के आधार पर हो सकता है हर्जाना तय
1. ऑक्सीजन में आई कमी एवं अवैध रूप से केमिकल युक्त पानी बहाने पर भूजल के दूषित होने पर क्षतिपूर्ति 26.90 करोड़ रुपये 2. लोगों के स्वास्थ्य एवं पर्यावरण की क्षतिपूर्ति: 92.59 करोड़ रुपये
3. भूजल को हुए नुकसान की क्षतिपूर्ति 540 करोड़ रुपये
क्षतिपूर्ति की कुल राशि: 659.49 करोड़ रुपये
सरपंच ने रिफाइनरी के खिलाफ दायर की थी अपील
थर्मल के पास रिफाइनरी से लगे गांव सिठाना, बोहली, ददलाना, रजापुर और महबूदुपर में प्रदूषण से दिक्कत थी। लोग बीमार हो रहे थे। लिवर और त्वचा संबंधी बीमारियों की चपेट में आ गए थे। जिस पर सिठाना गांव के सरपंच सतपाल सिंह ने वर्ष 2018 में एनजीटी में अपील की थी, इसके बाद एनजीटी ने जुर्माना लगाया था और आगे की जांच के लिए संयुक्त कमेटी का गठन किया था।

शुगर मिल पर भी लग चुका है 20 लाख रुपये जुर्माना
एनजीटी लगातार पानीपत को लेकर सख्त है। शुगर मिल पर भी वायु प्रदूषण को लेकर 20 लाख रुपये जुर्माना लग चुका है। शुगर मिल ने दोबारा अपनी अपील दायर कर जुर्माने की राशि कम करने की मांग की थी, लेकिन इसको खारिज कर दिया गया था।
एनजीटी ने पानीपत को लेकर ये दिए बड़े फैसले
-रिफाइनरी पर 17.31 करोड़ रुपये जुर्माना
-रिफाइनरी द्वारा पर्यावरण को पहुंचाए गए नुकसान का आंकलन करने के निर्देश
-शुगर मिल पर 20 लाख रुपये जुर्माना
-भूमि से केमिकल युक्त पानी निकालने वाले ट्यूबवेल को सील करने के निर्देश
-रेड व ओरेंट कैटेगिरी वाले उद्योगों पर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने पर करोड़ों रुपये जुर्माना
-ग्रीन बेल्ट से कब्जे हटाकर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश
-हाइवे से कब्जे हटाने के निर्देश किए गए जारी
-एनसीआर में आने वाले उद्योगों के लिए पीएनजी की सप्लाई की अनिवार्य
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