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नए साल का तोहफा, बढ़ी जीएसटी की स्लैब वापस
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पानीपत। टेक्सटाइल उत्पादों पर लगे 12 प्रतिशत जीएसटी के फैसले को वित्त मंत्रालय ने वापस ले लिया है। ये टेक्सटाइल नगरी को सरकार की ओर से नव वर्ष का तोहफा मिला है। विधायक प्रमोद विज ने भी इस संबंध में अपने सोशल मीडिया अकाउंट से इसकी जानकारी उद्यमियों को दी है। सरकार के इस फैसले का कपड़ा व्यापारियों ने आभार जताया है। बढ़े हुए जीएसटी की स्लैब को वापस लेने के लिए उद्यमियों ने वीरवार को ही विधायक प्रमोद विज को ज्ञापन सौंपा था। इससे पहले प्रदेश व्यापार संगठन भी इस स्लैब का लगातार विरोध कर रहा था।
कपड़ा व्यापारियों ने सरकार के सामने ये रखी थीं बातें
व्यापारियों ने सरकार को कहा कि प्रोडक्ट महंगा होने से पानीपत का कारोबार प्रभावित होगा। इससे ग्राहक कम आएंगे। पानीपत का कारोबार उधारी पर निर्भर करता है। इस पर लगी जीएसटी हर माह जमा करानी होगी। 12 फीसदी जीएसटी लगने से टैक्स कलेक्शन ज्यादा होगा इससे परेशानियां बढ़ेगी।
जिले को देना पड़ता 1100 करोड़ अधिक टैक्स
पानीपत के लगभग सभी उत्पाद पर 12 फीसदी जीएसटी होने से कंबल, चादर, पर्दे, सोफा कवर के रेट बढ़ जाते। इससे 7 फीसदी टैक्स भी बढ़ता। उद्यमियों के अनुसार पानीपत को 1 हजार करोड़ रुपये अधिक टैक्स देना पड़ता। उद्यमियों के अनुसार पानीपत स्टेट जीएसटी को पिछले आठ माह में लगभग 900 करोड़ रुपये टैक्स के रूप में दे चुका है।
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सरकार का आभार व्यक्त करते हैं
12 फीसदी जीएसटी होने से उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता। कंबल के रेट काफी अधिक बढ़ जाते। ग्राहकों को दुकानों तक लाने में परेशानी होती। वो बढ़ी जीएसटी की स्लैब के खिलाफ संघर्ष कर रहे थे। सरकार ने उनकी मांगों को माना। इसके लिए सरकार का आभार व्यक्त करते हैं। -अशोक नारंग, प्रधान कंबल मार्केट
सरकार के फैसले का स्वागत
सरकार ने अपना फैसला फिलहाल स्थगित किया है। ये सरकार का फैसला अच्छा है। जीएसटी की स्लैब बढ़ने से उद्यमियों पर अतिरिक्त मार पड़ती। -प्रीतम सचदेवा, कंबल उद्यमी एवं पानीपत इंडस्ट्रियल एसोसिएशन प्रधान
सरकार हर वर्ग को ध्यान में रखकर करती है काम
सरकार ने उद्यमियों की परेशानियों को देखते हुए जीएसटी बढ़ाने का फैसला वापस ले लिया है। सरकार हर वर्ग को ध्यान में रखकर काम करती है। वो भी वित्त मंत्री का आभार व्यक्त करते हैं। -प्रमोद विज, विधायक पानीपत शहरी
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कपड़ा व्यापारियों ने सरकार के सामने ये रखी थीं बातें
व्यापारियों ने सरकार को कहा कि प्रोडक्ट महंगा होने से पानीपत का कारोबार प्रभावित होगा। इससे ग्राहक कम आएंगे। पानीपत का कारोबार उधारी पर निर्भर करता है। इस पर लगी जीएसटी हर माह जमा करानी होगी। 12 फीसदी जीएसटी लगने से टैक्स कलेक्शन ज्यादा होगा इससे परेशानियां बढ़ेगी।
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जिले को देना पड़ता 1100 करोड़ अधिक टैक्स
पानीपत के लगभग सभी उत्पाद पर 12 फीसदी जीएसटी होने से कंबल, चादर, पर्दे, सोफा कवर के रेट बढ़ जाते। इससे 7 फीसदी टैक्स भी बढ़ता। उद्यमियों के अनुसार पानीपत को 1 हजार करोड़ रुपये अधिक टैक्स देना पड़ता। उद्यमियों के अनुसार पानीपत स्टेट जीएसटी को पिछले आठ माह में लगभग 900 करोड़ रुपये टैक्स के रूप में दे चुका है।
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सरकार का आभार व्यक्त करते हैं
12 फीसदी जीएसटी होने से उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता। कंबल के रेट काफी अधिक बढ़ जाते। ग्राहकों को दुकानों तक लाने में परेशानी होती। वो बढ़ी जीएसटी की स्लैब के खिलाफ संघर्ष कर रहे थे। सरकार ने उनकी मांगों को माना। इसके लिए सरकार का आभार व्यक्त करते हैं। -अशोक नारंग, प्रधान कंबल मार्केट
सरकार के फैसले का स्वागत
सरकार ने अपना फैसला फिलहाल स्थगित किया है। ये सरकार का फैसला अच्छा है। जीएसटी की स्लैब बढ़ने से उद्यमियों पर अतिरिक्त मार पड़ती। -प्रीतम सचदेवा, कंबल उद्यमी एवं पानीपत इंडस्ट्रियल एसोसिएशन प्रधान
सरकार हर वर्ग को ध्यान में रखकर करती है काम
सरकार ने उद्यमियों की परेशानियों को देखते हुए जीएसटी बढ़ाने का फैसला वापस ले लिया है। सरकार हर वर्ग को ध्यान में रखकर काम करती है। वो भी वित्त मंत्री का आभार व्यक्त करते हैं। -प्रमोद विज, विधायक पानीपत शहरी