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2011 में वजन घटाने नीरज पहुंचे थे शिवाजी स्टेडियम, 2021 के ओलंपिक में बढ़ाया देश का मान
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पानीपत। नीरज चोपड़ा। फोटो सोशल मीडिया।
- फोटो : Panipat
पानीपत। जिले के गांव खंडरा में 24 सितंबर 1997 को जन्में नीरज चोपड़ा सिर्फ अपना वजन घटाने के मकसद से पानीपत के शिवाजी स्टेडियम पहुंचे थे, लेकिन पहली बार में ही 25 मीटर भाला फेंक कोच को अचंभित कर दिया था। वर्ष 2011 में उन्होंने शिवाजी स्टेडियम में कदम रखा और आज ठीक एक दशक बाद 2021 ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीत पूरे देश को गौरवान्वित किया।
बचपन से ही वजन ज्यादा होने के कारण घर वालों को स्वास्थ्य की चिंता हुई तो चाचा सुरेंद्र चोपड़ा उन्हें शिवाजी स्टेडियम में एथलेटिक्स कोच जितेंद्र जागलान के पास लाए। उन्होंने कोच से कहा कि अभी इसकी उम्र 14 साल है और उम्र के हिसाब से काफी वजन है। कोच ने कहा कि नीरज को सभी खेल खिलाकर देखेंगे। इसके बाद नीरज के चाचा ने उनको रोज स्टेडियम भेजना शुरू कर दिया।
कोच जितेंद्र ने जब नीरज को पहली बार जैवलिन दिया तो उन्होंने पहली बार में ही 25 मीटर दूर फेंककर कोच को हैरत में डाल लिया। कोच ने अंदाजा लगा लिया था कि यह लड़का कमाल करेगा। उनके कोच ने बताया कि पहली बार में कोई भी खिलाड़ी केवल 15 से 20 मीटर ही भाला फेंक पाता है। नीरज ने केवल 14 साल की उम्र में ही अपने पहले प्रयास में 25 मीटर से ज्यादा भाला फेंक दिया।
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पानीपत के स्टेडियम में सीखी गई उछलकर भाला फेंकने वाली तकनीक ने जिताया स्वर्ण
नीरज चोपड़ा ने अपने अभ्यास के दौरान ही उछलकर भाला फेंकना सीख लिया था। इसकी मदद से ही वह टोक्यो ओलंपिक में स्वर्ण पदक विजेता बने हैं। नीरज के कोच जितेंद्र ने बताया कि पूरे भारत में केवल 2 से 3 प्रतिशत खिलाड़ी ही उछलकर भाला फेंकने में निपुण हैं, जिसमें से नीरज एक हैं। उसने यह तकनीक काफी कम उम्र में सीख ली थी। उनके कोच का कहना है कि उछलकर भाला फेंकने पर खिलाड़ी हाथ के साथ पैर का भी पूरा प्रयोग कर पाता है। जिससे भाला ज्यादा दूर तक जाता है। कोच जितेंद्र का कहना है कि भाला फेंकते हुए 20 प्रतिशत हाथ और 80 प्रतिशत बाकी शरीर का योगदान होता है।
पानीपत, पंचकूला से लेकर जर्मनी तक हुई नीरज की ट्रेनिंग
पानीपत, पंचकूला, कैथल, पटियाला, भुवनेश्वर से लेकर जर्मनी तक नीरज चोपड़ा की ट्रेनिंग हुई है। पानीपत से खेल की शुरुआत करने के बाद नीरज समतल मैदान की तलाश में जयवीर अहलावत के साथ यमुनानगर के स्टेडियम में तैयारी करने के लिए चले गए थे। वहीं टोक्यो ओलंपिक से डेढ़ साल पहले अपनी मुख्य तैयारी में लग गए। लगभग छह महीने भुवनेश्वर के कलिंगा स्टेडियम में उनकी ट्रेनिंग हुई। भुवनेश्वर के बाद नीरज ने पटियाला में ट्रेनिंग ली थी। इसके बाद वह अपनी फाइनल तैयारी करने के लिए जर्मनी चले गए थे और अब टोक्यो में भाला फेंककर भारत को सोना दिलाया।
किस वर्ष में कितने मीटर फेंका भाला
-2013 69.66 मीटर
-2014 70.19 मीटर
- 2015 81.04 मीटर
- 2016 86.48 मीटर
-2017 85.63 मीटर
- 2018 88.06 मीटर (सर्वश्रेष्ठ)
- 2020 87.86 मीटर
- 2021 87.58 मीटर (टोक्यो ओलंपिक)
एशियन से वर्ल्ड यू-20 में जीत चुुके हैं पदक
1. आईआईएएफ वर्ल्ड यू-20 चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक
2. एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक
3. कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक
4. एशियन गेम्स चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक
5. ग्रैंड प्रिक्स चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक
6. टोक्यो ओलंपिक में स्वर्ण पदक
13 को पंचकूला में मुख्यमंत्री और 15 को प्रधानमंत्री करेंगे सम्मानित
आगामी 13 अगस्त को हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल और 15 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नीरज को सम्मानित करेंगे। इस बीच भारतीय सेना की ओर से भी उन्हें सम्मानित किया जाएगा। इसके बाद ही नीरज चोपड़ा अपने गांव खंडरा आ सकेंगे।
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बचपन से ही वजन ज्यादा होने के कारण घर वालों को स्वास्थ्य की चिंता हुई तो चाचा सुरेंद्र चोपड़ा उन्हें शिवाजी स्टेडियम में एथलेटिक्स कोच जितेंद्र जागलान के पास लाए। उन्होंने कोच से कहा कि अभी इसकी उम्र 14 साल है और उम्र के हिसाब से काफी वजन है। कोच ने कहा कि नीरज को सभी खेल खिलाकर देखेंगे। इसके बाद नीरज के चाचा ने उनको रोज स्टेडियम भेजना शुरू कर दिया।
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कोच जितेंद्र ने जब नीरज को पहली बार जैवलिन दिया तो उन्होंने पहली बार में ही 25 मीटर दूर फेंककर कोच को हैरत में डाल लिया। कोच ने अंदाजा लगा लिया था कि यह लड़का कमाल करेगा। उनके कोच ने बताया कि पहली बार में कोई भी खिलाड़ी केवल 15 से 20 मीटर ही भाला फेंक पाता है। नीरज ने केवल 14 साल की उम्र में ही अपने पहले प्रयास में 25 मीटर से ज्यादा भाला फेंक दिया।
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पानीपत के स्टेडियम में सीखी गई उछलकर भाला फेंकने वाली तकनीक ने जिताया स्वर्ण
नीरज चोपड़ा ने अपने अभ्यास के दौरान ही उछलकर भाला फेंकना सीख लिया था। इसकी मदद से ही वह टोक्यो ओलंपिक में स्वर्ण पदक विजेता बने हैं। नीरज के कोच जितेंद्र ने बताया कि पूरे भारत में केवल 2 से 3 प्रतिशत खिलाड़ी ही उछलकर भाला फेंकने में निपुण हैं, जिसमें से नीरज एक हैं। उसने यह तकनीक काफी कम उम्र में सीख ली थी। उनके कोच का कहना है कि उछलकर भाला फेंकने पर खिलाड़ी हाथ के साथ पैर का भी पूरा प्रयोग कर पाता है। जिससे भाला ज्यादा दूर तक जाता है। कोच जितेंद्र का कहना है कि भाला फेंकते हुए 20 प्रतिशत हाथ और 80 प्रतिशत बाकी शरीर का योगदान होता है।
पानीपत, पंचकूला से लेकर जर्मनी तक हुई नीरज की ट्रेनिंग
पानीपत, पंचकूला, कैथल, पटियाला, भुवनेश्वर से लेकर जर्मनी तक नीरज चोपड़ा की ट्रेनिंग हुई है। पानीपत से खेल की शुरुआत करने के बाद नीरज समतल मैदान की तलाश में जयवीर अहलावत के साथ यमुनानगर के स्टेडियम में तैयारी करने के लिए चले गए थे। वहीं टोक्यो ओलंपिक से डेढ़ साल पहले अपनी मुख्य तैयारी में लग गए। लगभग छह महीने भुवनेश्वर के कलिंगा स्टेडियम में उनकी ट्रेनिंग हुई। भुवनेश्वर के बाद नीरज ने पटियाला में ट्रेनिंग ली थी। इसके बाद वह अपनी फाइनल तैयारी करने के लिए जर्मनी चले गए थे और अब टोक्यो में भाला फेंककर भारत को सोना दिलाया।
किस वर्ष में कितने मीटर फेंका भाला
-2013 69.66 मीटर
-2014 70.19 मीटर
- 2015 81.04 मीटर
- 2016 86.48 मीटर
-2017 85.63 मीटर
- 2018 88.06 मीटर (सर्वश्रेष्ठ)
- 2020 87.86 मीटर
- 2021 87.58 मीटर (टोक्यो ओलंपिक)
एशियन से वर्ल्ड यू-20 में जीत चुुके हैं पदक
1. आईआईएएफ वर्ल्ड यू-20 चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक
2. एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक
3. कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक
4. एशियन गेम्स चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक
5. ग्रैंड प्रिक्स चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक
6. टोक्यो ओलंपिक में स्वर्ण पदक
13 को पंचकूला में मुख्यमंत्री और 15 को प्रधानमंत्री करेंगे सम्मानित
आगामी 13 अगस्त को हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल और 15 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नीरज को सम्मानित करेंगे। इस बीच भारतीय सेना की ओर से भी उन्हें सम्मानित किया जाएगा। इसके बाद ही नीरज चोपड़ा अपने गांव खंडरा आ सकेंगे।