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Panipat News: नीरज चोपड़ा के गांव में स्टेडियम बनने का सपना चार साल बाद भी अधूरा, नहीं मिल रही जमीन
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पानीपत। आर्मी के सबसे बड़े स्टेडियम को रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने नीरज चोपड़ा आर्मी स्टेडियम का नाम दिया था। वहीं दूसरी ओर नीरज चोपड़ा के गांव में ही आज तक स्टेडियम नहीं बन पाया। सरकार की स्टेडियम बनाने की घोषणा को भी चार साल बीत चुके हैं। अब तक स्टेडियम के लिए जमीन तक तय नहीं हो पाई। देश को पहला एथलेटिक्स ओलंपिक स्वर्ण पदक, पहली डायमेंट लीग और वर्ल्ड चैंपियनशिप में पहला पुरुष रजत पदक दिलाने वाले खिलाड़ी के गांव को एक स्टेडियम तक नहीं मिल पाया है। अमर उजाला ने खंडरा गांव में नीरज के परिवार और गांव के युवाओं से बात की तो उनका रोष सामने आया। युवाओं का कहना है कि सरकार सिर्फ बड़े-बड़े सपने दिखाती है।
खंडरा गांव में स्टेडियम के लिए 20 बार जगह चयनित की गई, लेकिन हर बार विवाद हो गया। इसलिए अब तक भूमि फाइनल नहीं हो पाई है। मुख्यमंत्री ने गांव में छह करोड़ की लागत से स्टेडियम बनाने का एलान किया था। चार साल बाद भी घोषणा पूरी नहीं हो पाई। 2021 में टोक्यो ओलंपिक जीतने के बाद सीएम मनोहर लाल ने ही 47 एकड़ में स्टेडियम बनवाने का एलान किया था। गांव के युवा दीपक कुमार ने बताया कि बाल जटान में 47 एकड़ जमीन चयनित होने के बाद उस जमीन को रिजेक्ट कर दिया गया। वहीं खंडरा में सरकारी स्कूल के पास जो जमीन चयनित की गई थी उस पर केस चल रहा है।
खंडरा के आसपास के 10 गांवों को इस स्टेडियम से आस है। गांव के 200 खिलाड़ी रोजाना 12 किलोमीटर दूरी तय करके शिवाजी स्टेडियम आते हैं। आसपास के मैदानों में भी कुछ खिलाड़ी अभ्यास करते हैं, लेकिन वहां न तो कोच हैं न ही उपकरण।
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चाचा भीम चोपड़ा का कहना है कि गांव में कई बार जमीन दिखाने के बाद भी चयनित नहीं हो पा रही है। बार-बार सरकारी काम में दिक्कत आ रही है। अब उनके परिवार ने सरकार पर ही छोड़ दिया है कि वह कब और कैसे स्टेडियम बनाते हैं।
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खंडरा गांव में स्टेडियम के लिए 20 बार जगह चयनित की गई, लेकिन हर बार विवाद हो गया। इसलिए अब तक भूमि फाइनल नहीं हो पाई है। मुख्यमंत्री ने गांव में छह करोड़ की लागत से स्टेडियम बनाने का एलान किया था। चार साल बाद भी घोषणा पूरी नहीं हो पाई। 2021 में टोक्यो ओलंपिक जीतने के बाद सीएम मनोहर लाल ने ही 47 एकड़ में स्टेडियम बनवाने का एलान किया था। गांव के युवा दीपक कुमार ने बताया कि बाल जटान में 47 एकड़ जमीन चयनित होने के बाद उस जमीन को रिजेक्ट कर दिया गया। वहीं खंडरा में सरकारी स्कूल के पास जो जमीन चयनित की गई थी उस पर केस चल रहा है।
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खंडरा के आसपास के 10 गांवों को इस स्टेडियम से आस है। गांव के 200 खिलाड़ी रोजाना 12 किलोमीटर दूरी तय करके शिवाजी स्टेडियम आते हैं। आसपास के मैदानों में भी कुछ खिलाड़ी अभ्यास करते हैं, लेकिन वहां न तो कोच हैं न ही उपकरण।
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चाचा भीम चोपड़ा का कहना है कि गांव में कई बार जमीन दिखाने के बाद भी चयनित नहीं हो पा रही है। बार-बार सरकारी काम में दिक्कत आ रही है। अब उनके परिवार ने सरकार पर ही छोड़ दिया है कि वह कब और कैसे स्टेडियम बनाते हैं।