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चोट लगने पर कुश्ती छोड़ नवदीप ने थामा था भाला, अब पैरा ओलंपिक में पदक की आस

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 17 Aug 2021 02:24 AM IST
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Navdeep had stopped wrestling due to injury, now hoping for a medal in Para Olympics
ओलंपिक में पानीपत के नीरज चोपड़ा को स्वर्ण पदक मिलने के बाद अब पैरा ओलंपिक में जिले के ही नवदीप से पदक की आस है। इसराना के गांव बुआना लाखु के रहने वाले नवदीप 28 अगस्त से टोक्यो में शुरू हो रहे पैरा ओलंपिक में दम दिखाएंगे। नवदीप की लंबाई महज 4 फुट है। इसके बावजूद उन्होंने कम लंबाई को कभी अपने खेल के आड़े नहीं आने दिया। खास बात यह है कि कुश्ती से अपने खेल जीवन की शुरुआत करने वाले नवदीप को अब जेवलिन थ्रो में महारत हासिल है, जिसमें वो एकबार फिर पानीपत का नाम विश्व पटल पर लाने के लिए प्रयासरत हैं।
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कुश्ती से खेल की शुरुआत करने वाले नवदीप ने राज्यस्तरीय मुकाबलों में पदक भी जीते, लेकिन 15 साल की उम्र में कमर में चोट लगने के कारण उन्हें कुश्ती छोड़नी पड़ी। फिर उन्होंने कुश्ती छोड़ भाला पकड़ लिया। शुरुआत में भाला न होने के कारण नवदीप बॉल फेंक कर ही अभ्यास करते थे, लेकिन लगन और मेहनत से वे आगे बढ़ते गए। ओलंपिक में स्वर्ण पदक विजेता नीरज चोपड़ा की तरह ही नवदीप ने भी पहले प्रयास में ही पैरा ओलंपिक के लिए क्वालीफाई किया है। उन्होंने 43.58 मीटर भाला फेंककर पैरा ओलंपिक में स्थान बनाया है। यह पैरा ओलंपिक में जेवलिन थ्रो में क्वालीफाई करने के वर्ल्ड रिकॉर्ड से महज 50 सेंटीमीटर ही कम है। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि अब पैरा ओलंपिक के जेवलिन थ्रो में नवदीप भी देश के लिए पदक जीतेगा। - संवाद
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रोजाना 8 से 10 घंटे बहा रहे पसीना
नवदीप ने अमर उजाला से बातचीत के दौरान बताया कि उनकी तैयारी काफी अच्छी चल रही है। इस वक्त पैरा ओलंपिक के लिए रोज 8 से 10 घंटे दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में मेहनत कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि 4 सितंबर को उनका मुकाबला है, जिसमें वह अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करेंगे।
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- जेवलिन थ्रो सीखने के एक साल बाद ही लाए थे स्वर्ण पदक
वर्ष 2015 में कुश्ती खेलने के दौरान नवदीप की कमर में गुम चोट लग गई थी। केवल 5 महीने में ही चोट से उबरने के साथ साथ नवदीप ने नया खेल जेवलिन थ्रो शुरू कर दिया था। एक साल में खेल को सीखने के साथ ही वर्ष 2016 में नेशनल चैंपियनशिप पंचकूला में उन्होंने जेवलिन में पहला स्वर्ण पदक जीता था।
जयपुर में मिली एक हार के बाद से कोई मुकाबला नहीं हारे नवदीप
वर्ष 2016 में जयपुर में आयोजित राष्ट्र स्तरीय जेवलिन थ्रो चैंपियनशिप में भाग लेने के दौरान नवदीप हार गए थे, जिसके बाद से वह काफी भावुक हो गए थे। उन्होंने पहले से अधिक मेहनत की और अपने अभ्यास का समय दोगुना कर दिया। उसके बाद से नवदीप कोई मुकाबला नहीं हारे हैं।
- नवदीप के लिए स्पेशल मंगवानी पड़ती थी जेवलिन
नवदीप का कद छोटा होने के कारण उनके लिए स्पेशल मेरठ और इंदौर से जेवलिन मंगानी पड़ती थी। सामान्य जेवलिन थ्रो करने वाले खिलाड़यों का जेवलिन 700 ग्राम का होता है, लेकिन नवदीप के लिए जेवलिन 600 ग्राम का होता है।

- पैरा ओलंपिक में बेेटा पूरा करेगा सपना: पिता
नवदीप के पिता दलबीर ने बताया कि वह भी अपने समय में कुश्ती करते थे और उनके बारे में सुनकर ही नवदीप ने कुश्ती की शुरुआत की थी। नवदीप के पिता को बढ़ती उम्र एवं जिम्मेदारियों के चलते कुश्ती छोड़नी पड़ी, जिसकी वजह से उनका ओलंपिक में जाने का सपना अधूरा रह गया। पिता का कहना है कि जो काम मैं नहीं कर सका, बेटा 20 साल की उम्र में करने जा रहा है।
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