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300 करोड़ से अधिक का जुर्माना लगा, 90 बंद हुई, 170 को नोटिस जारी हुआ, फिर भी कचरा जलाने से नहीं आए बाज
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पानीपत। फैक्टरी से निकलता धुआं
- फोटो : Panipat
संदीप सिंह
पानीपत। पानीपत के प्रदूषण को नियंत्रित करने व लोगों को प्रदूषण मुक्त जीवन देने के एनजीटी, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड व हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने तमाम प्रयास किए हैं। एनजीटी ने प्रदूषण फैलाने वाली रेड और ऑरेंज जोन की 150 से अधिक फैक्टरियों पर 300 करोड़ रुपये से अधिक का जुर्माना भी लगाया। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने वायु प्रदूषण करने वाली और अवैध रूप से चलने वाली 90 फैक्टरियों को पिछले दो साल में बंद कर दिया। इतना ही नहीं बोर्ड ने 170 फैक्टरियों को कारण बताओ नोटिस भी दिया, फिर भी प्रदूषण पर लगाम नहीं लग पा रही है। अब कुछ उद्योगपति रात को फैक्टरियों में कचरा-जूते-चप्पल, फटे पुराने कपड़े व प्रतिबंधित फ्यूल का प्रयोग कर रहे हैं। अगस्त व सितंबर में ऐसी 18 फैक्टरियों पर कार्रवाई भी की गई है, लेकिन इसके बाद भी कुछ उद्यमी बाज नहीं रहे हैं। अब भी फैक्टरियों के बॉयलर में रात के वक्त कचरा जलता है। सुबह 10 बजे तक चिमनियों से काला धुआं निकलता देखा जा सकता है।
जो फैक्टरी प्रदूषण को बढ़ावा दे रही हैं, वह मुख्य रूप से कुटानी रोड, बबैल रोड, सनौली रोड, काबड़ी रोड, गोहाना रोड, बापौली व बाहरी कॉलोनियों में स्थित हैं। उद्यमी एक रुपया प्रति किलोग्राम के भाव से कचरा खरीदते हैं। इनमें फटे पुराने कपड़े, चप्पल जूते, प्लास्टिक होता है। एक दिन फैक्टरी चलाने पर इनका खर्च अधिकतम 5 हजार रुपये तक आता है, जबकि नियमानुसार कोयले का प्रयोग करने पर एक फैक्टरी का एक दिन का खर्च कम से कम 30 हजार रुपये से 1 लाख तक का होता है। नियमानुसार कोयले का प्रयोग करने वाले उद्यमी 12 रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से कोयला एवं ईंधन खरीदते हैं।
सुबह फैक्टरी होती है सील, रात को खुल जाती है
सेक्टर 29 पार्ट टू के बड़े उद्यमी ने बताया कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड पर राजनेताओं का दबाव रहता है। बोर्ड सुबह फैक्टरी को सील करता है तो उद्यमी रात को सील तोड़ देते हैं। रात भर प्रतिबंधित फ्यूल का प्रयोग होता है। बबैल रोड पर 10 दिन पहले कई फैक्टरी सील की गई थी। रात को उनकी सील तोड़कर काम किया गया है।
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90 प्रतिशत बीमारी का कारण दूषित हवा और पानी
90 प्रतिशत बीमारी दूषित हवा व पानी के कारण होती हैं। यही कारण है कि आज अविकसित बच्चे जन्म ले रहें है। टीबी, कैंसर, सांस रोग और त्वचा रोग भी तेजी से बढ़ रहा है।
अवैध रूप से चलने वाली फैक्टरियों में ऑनलाइन मॉनिटरिंग सिस्टम नहीं
शहर के बाहरी क्षेत्रों में अवैध रूप से जो फैक्टरी चल रही हैं, उनके पास सीएलयू नहीं है। उनको प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से एनओसी भी नहीं मिली है। इसी कारण सीपीसीबी की ओर से इन फैक्टरियों में ऑनलाइन मॉनीटरिंग सिस्टम नहीं लगाया गया है। इस सिस्टम से सीपीसीबी चंडीगढ़ में फैक्टरियों की मॉनीटरिंग करती है। सिस्टम के पकड़ में न आने के कारण इन पर कार्रवाई नहीं हो पाती।
सिर्फ तीन हजार फैक्टरी ही रजिस्टर्ड
शहर के अधिकांश हिस्सों में 18 हजार से ज्यादा छोटी-बड़े उद्योग चल रहे हैं। इनमें से सिर्फ 3 हजार फैक्टरी ही रजिस्टर्ड हैं। छोटी फैक्ट्रियों में माल को तैयार कर बड़ी फैक्ट्रियों में सप्लाई किया जाता है। इसके चलते शहर में जल और वायु का प्रदूषण बिगड़ता जा रहा है।
समीर एप पर करें शिकायत
सीपीसीबी ने दो साल पहले समीर एप लॉन्च किया था। एप के डाउनलोड हो जाने के बाद बाएं हाथ पर पब्लिक कंप्लेंट का ऑप्शन होता है। इस पर क्लिक करने के बाद नई विंडो खुलती है। इसमें शिकायत की कई कैटेगरी हैं। इसमें शिकायत की फोटो क्लिक कर अपलोड करने का ऑप्शन भी है।
अवैध रूप से चलने वाली व प्रदूषण को बढ़ावा देने वाली फैक्टरियों पर लगातार कार्रवाई चल रही है। उनको सील भी किया जा रहा है। बिजली निगम को उनके कनेक्शन काटने के लिए पत्र लिखा जा रहा है। पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वालों पर नियमानुसार कार्रवाई भविष्य में भी जारी रहेगी।
-कमलजीत सिंह, रिजनल ऑफिसर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
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पानीपत। पानीपत के प्रदूषण को नियंत्रित करने व लोगों को प्रदूषण मुक्त जीवन देने के एनजीटी, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड व हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने तमाम प्रयास किए हैं। एनजीटी ने प्रदूषण फैलाने वाली रेड और ऑरेंज जोन की 150 से अधिक फैक्टरियों पर 300 करोड़ रुपये से अधिक का जुर्माना भी लगाया। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने वायु प्रदूषण करने वाली और अवैध रूप से चलने वाली 90 फैक्टरियों को पिछले दो साल में बंद कर दिया। इतना ही नहीं बोर्ड ने 170 फैक्टरियों को कारण बताओ नोटिस भी दिया, फिर भी प्रदूषण पर लगाम नहीं लग पा रही है। अब कुछ उद्योगपति रात को फैक्टरियों में कचरा-जूते-चप्पल, फटे पुराने कपड़े व प्रतिबंधित फ्यूल का प्रयोग कर रहे हैं। अगस्त व सितंबर में ऐसी 18 फैक्टरियों पर कार्रवाई भी की गई है, लेकिन इसके बाद भी कुछ उद्यमी बाज नहीं रहे हैं। अब भी फैक्टरियों के बॉयलर में रात के वक्त कचरा जलता है। सुबह 10 बजे तक चिमनियों से काला धुआं निकलता देखा जा सकता है।
जो फैक्टरी प्रदूषण को बढ़ावा दे रही हैं, वह मुख्य रूप से कुटानी रोड, बबैल रोड, सनौली रोड, काबड़ी रोड, गोहाना रोड, बापौली व बाहरी कॉलोनियों में स्थित हैं। उद्यमी एक रुपया प्रति किलोग्राम के भाव से कचरा खरीदते हैं। इनमें फटे पुराने कपड़े, चप्पल जूते, प्लास्टिक होता है। एक दिन फैक्टरी चलाने पर इनका खर्च अधिकतम 5 हजार रुपये तक आता है, जबकि नियमानुसार कोयले का प्रयोग करने पर एक फैक्टरी का एक दिन का खर्च कम से कम 30 हजार रुपये से 1 लाख तक का होता है। नियमानुसार कोयले का प्रयोग करने वाले उद्यमी 12 रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से कोयला एवं ईंधन खरीदते हैं।
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सुबह फैक्टरी होती है सील, रात को खुल जाती है
सेक्टर 29 पार्ट टू के बड़े उद्यमी ने बताया कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड पर राजनेताओं का दबाव रहता है। बोर्ड सुबह फैक्टरी को सील करता है तो उद्यमी रात को सील तोड़ देते हैं। रात भर प्रतिबंधित फ्यूल का प्रयोग होता है। बबैल रोड पर 10 दिन पहले कई फैक्टरी सील की गई थी। रात को उनकी सील तोड़कर काम किया गया है।
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90 प्रतिशत बीमारी का कारण दूषित हवा और पानी
90 प्रतिशत बीमारी दूषित हवा व पानी के कारण होती हैं। यही कारण है कि आज अविकसित बच्चे जन्म ले रहें है। टीबी, कैंसर, सांस रोग और त्वचा रोग भी तेजी से बढ़ रहा है।
अवैध रूप से चलने वाली फैक्टरियों में ऑनलाइन मॉनिटरिंग सिस्टम नहीं
शहर के बाहरी क्षेत्रों में अवैध रूप से जो फैक्टरी चल रही हैं, उनके पास सीएलयू नहीं है। उनको प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से एनओसी भी नहीं मिली है। इसी कारण सीपीसीबी की ओर से इन फैक्टरियों में ऑनलाइन मॉनीटरिंग सिस्टम नहीं लगाया गया है। इस सिस्टम से सीपीसीबी चंडीगढ़ में फैक्टरियों की मॉनीटरिंग करती है। सिस्टम के पकड़ में न आने के कारण इन पर कार्रवाई नहीं हो पाती।
सिर्फ तीन हजार फैक्टरी ही रजिस्टर्ड
शहर के अधिकांश हिस्सों में 18 हजार से ज्यादा छोटी-बड़े उद्योग चल रहे हैं। इनमें से सिर्फ 3 हजार फैक्टरी ही रजिस्टर्ड हैं। छोटी फैक्ट्रियों में माल को तैयार कर बड़ी फैक्ट्रियों में सप्लाई किया जाता है। इसके चलते शहर में जल और वायु का प्रदूषण बिगड़ता जा रहा है।
समीर एप पर करें शिकायत
सीपीसीबी ने दो साल पहले समीर एप लॉन्च किया था। एप के डाउनलोड हो जाने के बाद बाएं हाथ पर पब्लिक कंप्लेंट का ऑप्शन होता है। इस पर क्लिक करने के बाद नई विंडो खुलती है। इसमें शिकायत की कई कैटेगरी हैं। इसमें शिकायत की फोटो क्लिक कर अपलोड करने का ऑप्शन भी है।
अवैध रूप से चलने वाली व प्रदूषण को बढ़ावा देने वाली फैक्टरियों पर लगातार कार्रवाई चल रही है। उनको सील भी किया जा रहा है। बिजली निगम को उनके कनेक्शन काटने के लिए पत्र लिखा जा रहा है। पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वालों पर नियमानुसार कार्रवाई भविष्य में भी जारी रहेगी।
-कमलजीत सिंह, रिजनल ऑफिसर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड