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Panipat News: पंचायत मंत्री के आवास पर गरजे मनरेगा मजदूर
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पानीपत। मनरेगा मजदूरों ने मांगों के समर्थन में पंचायत मंत्री महिपाल ढांडा के आवास पर प्रदर्शन किया। इसके बाद उन्होंने पंचायत मंत्री के नाम उनके प्रतिनिधि हरपाल ढांडा को ज्ञापन सौंपा। इससे पहले मनरेगा मजदूरों ने बाबरपुर अनाज मंडी में सभा का आयोजन किया। अखिल भारतीय खेत मजदूर यूनियन हरियाणा के प्रधान जगमाल सिंह, मनरेगा श्रमिक यूनियन जींद के नेता राजेश कुमार ने सभा की संयुक्त से अध्यक्षता की और संचालन अखिल भारतीय खेत मजदूर यूनियन के सहसचिव राजेंद्र छौक्कर एवं मनरेगा कामगार यूनियन कैथल के नेता नरेश कुमार ने किया।
सीटू प्रदेश अध्यक्षा सुरेखा, अखिल भारतीय खेत मजदूर के प्रदेश महासचिव प्रेमचंद व राज्य कोषाध्यक्ष विनोद कुमार ने कहा कि वर्तमान समय में दिहाड़ीदार मजदूर एवं गरीबों के लिए रोजगार का भारी संकट है। अगर सरकार चाहती तो बेरोजगारी के इस संकट में गरीबों के लिए मनरेगा वरदान साबित हो सकता है लेकिन मजदूरों को मनरेगा में काम नहीं दिया जाता। आज अनेकों ब्लाकों में मनरेगा में काम मांगने के लिए मजदूर बीडीपीओ कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं। मजदूरों को न काम दिया जा रहा और ना ही बेरोजगारी भत्ता मिलता है। सरकार ने जीयो टैग से ऑनलाइन हाजरी लगाने का फरमान जारी करके मजदूरों को काम से वंचित करने का रास्ता अपना लिया है। आज तक ऐसा कहीं नहीं देखा कि मजदूर को हाजरी लगाने के लिए पांच किलो मीटर दूर सुबह और शाम जाना पड़ता हो। मनरेगा के तहत गांव या आसपास के इलाके की बजाय दूर-दूर काम दिया जाता है और मजदूरों को अपने जेब से ही पैसा खर्च करके कार्यस्थल पर पहुंचना पड़ता है। जबकि वर्ष 2020 से पहले गांव से पांच किलोमीटर दूर कार्यस्थल होने पर मजदूरों को 10 प्रतिशत अधिक दिहाड़ी का भुगतान किया जाता था। दो-दो साल तक मनरेगा मेटों की मजदूरी का भुगतान नहीं किया जाता। पहले मरनरेगा रोजगार सहायक लगता था लेकिन इस सरकार ने लगाना बंद कर दिया। इस मौके पर सीटू राज्य सचिव कामरेड विनोद, जगपाल सिंह , रमेशचंद्र, सुनील दत्त, संदीप सिंह, राजेश, राजेश जलालपुरा नरेश कुमार मौजूद रहे।
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सीटू प्रदेश अध्यक्षा सुरेखा, अखिल भारतीय खेत मजदूर के प्रदेश महासचिव प्रेमचंद व राज्य कोषाध्यक्ष विनोद कुमार ने कहा कि वर्तमान समय में दिहाड़ीदार मजदूर एवं गरीबों के लिए रोजगार का भारी संकट है। अगर सरकार चाहती तो बेरोजगारी के इस संकट में गरीबों के लिए मनरेगा वरदान साबित हो सकता है लेकिन मजदूरों को मनरेगा में काम नहीं दिया जाता। आज अनेकों ब्लाकों में मनरेगा में काम मांगने के लिए मजदूर बीडीपीओ कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं। मजदूरों को न काम दिया जा रहा और ना ही बेरोजगारी भत्ता मिलता है। सरकार ने जीयो टैग से ऑनलाइन हाजरी लगाने का फरमान जारी करके मजदूरों को काम से वंचित करने का रास्ता अपना लिया है। आज तक ऐसा कहीं नहीं देखा कि मजदूर को हाजरी लगाने के लिए पांच किलो मीटर दूर सुबह और शाम जाना पड़ता हो। मनरेगा के तहत गांव या आसपास के इलाके की बजाय दूर-दूर काम दिया जाता है और मजदूरों को अपने जेब से ही पैसा खर्च करके कार्यस्थल पर पहुंचना पड़ता है। जबकि वर्ष 2020 से पहले गांव से पांच किलोमीटर दूर कार्यस्थल होने पर मजदूरों को 10 प्रतिशत अधिक दिहाड़ी का भुगतान किया जाता था। दो-दो साल तक मनरेगा मेटों की मजदूरी का भुगतान नहीं किया जाता। पहले मरनरेगा रोजगार सहायक लगता था लेकिन इस सरकार ने लगाना बंद कर दिया। इस मौके पर सीटू राज्य सचिव कामरेड विनोद, जगपाल सिंह , रमेशचंद्र, सुनील दत्त, संदीप सिंह, राजेश, राजेश जलालपुरा नरेश कुमार मौजूद रहे।
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