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तीन साल बाद मिले परिजन, नीशू नहीं जाना चाहती घर
अमर उजाला ब्यूरो/पानीपत
Updated Wed, 08 Jul 2015 12:21 AM IST
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बेटा और बेटी में फर्क समझने वाले लोगों की मानसिकता बदलने के लिए सरकार काफी समय से टीवी, रेडियो, अखबारों में विज्ञापनों और देश भर में बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान चलाकर भरसक प्रयास कर रही है।
इसके बावजूद लोगों के मन में बेटी और बेटी के बीच अंतर नहीं निकल रहा है। शामली के राजो महौला की रहने वाली 14 वर्षीय नीशू 2013 में अपने शहर से जीप पकड़ कर पानीपत पहुंच गई। जहां राहगीरों ने उसे चाइल्ड वेलफेयर कमेटी को सौंप दिया।
इसके बाद बच्ची से पूछताछ की। परिजनों के व्यवहार से सहमी बच्ची ने कुछ भी बताने से इनकार कर दिया। तब से नीशू सौंधापुर अनाथालय में रह रही है। पांच भाइयों की इकलौती बहन को मां-बाप का प्यार तो नहीं मिला, भाइयों के प्यार से भी वंचित रहना पड़ा है।
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अनाथालय के प्रधान अमरजीत सिंह नरवाल ने बताया कि नीशू को जब अनाथालय लाया गया तो उसके परिजनों के बारे में काफी पूछताछ की। उसने कुछ भी बताने से मना कर दिया।
इसके बाद से नीशू अनाथालय में ही रह रही है। तीन साल के बाद नीशू ने अपने परिजनों के बारे में कहा कि उसके माता-पिता इस दुनिया में नहीं है। उसके पांच भाई और भाभी हैं जो कि शामली के राजो महौला में रहते हैं।
इसके बाद नीशू के बारे में परिजनों को सूचना दी गई है। लेकिन नीशू अभी घर जाने से इनकार कर ही है।
अनाथालय के प्रधान ने बताया कि नीशू से घर जाने के बारे पूछा तो उसने कुछ भी कहने से मना कर दिया है। कहा कि वह यहीं पर पढ़ लिखकर कुछ बनना चाहती है। घर नहीं जाना चाहती। नीशू शहर के एलएसबीटी जाटल रोड में चौथी कक्षा में पढ़ रही है।
संबंधित विभाग से मिली जानकारी अनुसार नीशू को लेने के लिए उसके भाई और भाभी पहुंचे हैं। उन्होंने नीशू से साथ चलने और उसके अच्छे से ख्याल रखने की बात कहीं। पहले तो नीशू ने जाने से मना कर दिया है। लेकिन अभी नीशू पूरी तरह से जाने के लिए खुश नहीं हो पाई है।
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि नीशू पर किसी तरह का कोई दबाव नहीं बनाया जाएगा। उसकी मर्जी के बाद ही उसे परिजनों के साथ भेजा जाएगा।
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इसके बावजूद लोगों के मन में बेटी और बेटी के बीच अंतर नहीं निकल रहा है। शामली के राजो महौला की रहने वाली 14 वर्षीय नीशू 2013 में अपने शहर से जीप पकड़ कर पानीपत पहुंच गई। जहां राहगीरों ने उसे चाइल्ड वेलफेयर कमेटी को सौंप दिया।
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इसके बाद बच्ची से पूछताछ की। परिजनों के व्यवहार से सहमी बच्ची ने कुछ भी बताने से इनकार कर दिया। तब से नीशू सौंधापुर अनाथालय में रह रही है। पांच भाइयों की इकलौती बहन को मां-बाप का प्यार तो नहीं मिला, भाइयों के प्यार से भी वंचित रहना पड़ा है।
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अनाथालय के प्रधान अमरजीत सिंह नरवाल ने बताया कि नीशू को जब अनाथालय लाया गया तो उसके परिजनों के बारे में काफी पूछताछ की। उसने कुछ भी बताने से मना कर दिया।
इसके बाद से नीशू अनाथालय में ही रह रही है। तीन साल के बाद नीशू ने अपने परिजनों के बारे में कहा कि उसके माता-पिता इस दुनिया में नहीं है। उसके पांच भाई और भाभी हैं जो कि शामली के राजो महौला में रहते हैं।
इसके बाद नीशू के बारे में परिजनों को सूचना दी गई है। लेकिन नीशू अभी घर जाने से इनकार कर ही है।
अनाथालय के प्रधान ने बताया कि नीशू से घर जाने के बारे पूछा तो उसने कुछ भी कहने से मना कर दिया है। कहा कि वह यहीं पर पढ़ लिखकर कुछ बनना चाहती है। घर नहीं जाना चाहती। नीशू शहर के एलएसबीटी जाटल रोड में चौथी कक्षा में पढ़ रही है।
संबंधित विभाग से मिली जानकारी अनुसार नीशू को लेने के लिए उसके भाई और भाभी पहुंचे हैं। उन्होंने नीशू से साथ चलने और उसके अच्छे से ख्याल रखने की बात कहीं। पहले तो नीशू ने जाने से मना कर दिया है। लेकिन अभी नीशू पूरी तरह से जाने के लिए खुश नहीं हो पाई है।
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि नीशू पर किसी तरह का कोई दबाव नहीं बनाया जाएगा। उसकी मर्जी के बाद ही उसे परिजनों के साथ भेजा जाएगा।