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सामाजिक परिवर्तन के लिए मानसिक परिवर्तन जरूरी : मीनू सिंह
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पानीपत। आर्य पीजी कॉलेज के कानूनी प्रकोष्ठ, हिंदी साहित्य परिषद, एनएसएस, रेडक्रॉस व हरियाणा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के संयुक्त तत्वावधान में संविधान दिवस के अवसर पर वाद-विवाद व भाषण प्रतियोगिता का आयोजन करवाया गया। प्रतियोगिता में कॉलेज के सभी संकायों के विद्यार्थियों ने भाग लिया। प्रतियोगिता में वाद-विवाद प्रतियोगिता का विषय संविधान लोकतंत्र की आत्मा है रहा। विद्यार्थियों ने दिए गए विषय पर बहुत ही शानदार विचार प्रस्तुत किए। प्रतियोगिता में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव मीनू सिंह ने मुख्य अतिथि के तौर पर शिरकत की। कॉलेज प्राचार्य डॉ. जगदीश गुप्ता व उपप्राचार्या डॉ. अनुराधा सिंह ने मुख्य अतिथि का कॉलेज प्रांगण में पहुंचने पर पुष्पगुच्छ देकर स्वागत किया। मुख्य अतिथि मीनू सिंह ने बताया कि सामाजिक परिवर्तन के लिए मानसिक परिवर्तन जरूरी है।
उन्होंने कहा कि इसलिए विधिक सेवा प्राधिकरण न केवल जिला व राज्य स्तर पर बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर लोगों को जागरूक करने के साथ-साथ न्याय दिलाने का काम भी कर रहा है। विधिक सेवा प्राधिकरण समय-समय पर स्कूलों व महाविद्यालयों में ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन करता रहता है जिसमें विद्यार्थियों व युवाओं को समाज में व्याप्त बुराइयों जैसे घरेलू हिंसा, दहेज प्रथा, महिलाओं का शोषण इत्यादि के खिलाफ कैसे कानून का सहारा लेकर न्याय पाया जा सकता है और इन बुराइयों को समाप्त करने की ओर अग्रसर हुआ जा सकता है। साथ ही उन्होंने पॉक्सो एक्ट, यातायात के नियमों का पालन व युवाओं को ड्रग्स के दुष्प्रभावों के प्रति सचेत किया।
प्रतियोगिताओं के परिणाम में बीकॉम वोकेशनल द्वितीय वर्ष की छात्रा सुषमा ने प्रथम, एमकॉम प्रथम वर्ष की छात्रा दिव्या ने द्वितीय तथा बीए तृतीय वर्ष के छात्र अंकित व बीसीए प्रथम वर्ष की छात्रा केश्वी ने तृतीय स्थान हासिल किया। प्रतियोगिता में निर्णायक मंडल की भूमिका हिंदी विभाग की प्राध्यापिका डॉ. शालिनी, कविता व राजनीति विज्ञान के प्राध्यापक दीपक ने निभाई। वहीं, मंच संचालन इतिहास विभागाध्यक्ष डॉ. विजय सिंह ने किया।
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इस अवसर पर पैनल एडवोकेट सुमनलता, चंचल, जिला समन्वयक डॉ. हितेश, कॉलेज की एनएसएस इकाई की प्रभारी डॉ. मनीषा ढुढेजा, प्राध्यापक गोपाल मलिक, राजा तोमर, ललित, सुरेंद्र, दीपक, संदीप के साथ सभी स्टाफ सदस्य मौजूद रहे।
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उन्होंने कहा कि इसलिए विधिक सेवा प्राधिकरण न केवल जिला व राज्य स्तर पर बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर लोगों को जागरूक करने के साथ-साथ न्याय दिलाने का काम भी कर रहा है। विधिक सेवा प्राधिकरण समय-समय पर स्कूलों व महाविद्यालयों में ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन करता रहता है जिसमें विद्यार्थियों व युवाओं को समाज में व्याप्त बुराइयों जैसे घरेलू हिंसा, दहेज प्रथा, महिलाओं का शोषण इत्यादि के खिलाफ कैसे कानून का सहारा लेकर न्याय पाया जा सकता है और इन बुराइयों को समाप्त करने की ओर अग्रसर हुआ जा सकता है। साथ ही उन्होंने पॉक्सो एक्ट, यातायात के नियमों का पालन व युवाओं को ड्रग्स के दुष्प्रभावों के प्रति सचेत किया।
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प्रतियोगिताओं के परिणाम में बीकॉम वोकेशनल द्वितीय वर्ष की छात्रा सुषमा ने प्रथम, एमकॉम प्रथम वर्ष की छात्रा दिव्या ने द्वितीय तथा बीए तृतीय वर्ष के छात्र अंकित व बीसीए प्रथम वर्ष की छात्रा केश्वी ने तृतीय स्थान हासिल किया। प्रतियोगिता में निर्णायक मंडल की भूमिका हिंदी विभाग की प्राध्यापिका डॉ. शालिनी, कविता व राजनीति विज्ञान के प्राध्यापक दीपक ने निभाई। वहीं, मंच संचालन इतिहास विभागाध्यक्ष डॉ. विजय सिंह ने किया।
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इस अवसर पर पैनल एडवोकेट सुमनलता, चंचल, जिला समन्वयक डॉ. हितेश, कॉलेज की एनएसएस इकाई की प्रभारी डॉ. मनीषा ढुढेजा, प्राध्यापक गोपाल मलिक, राजा तोमर, ललित, सुरेंद्र, दीपक, संदीप के साथ सभी स्टाफ सदस्य मौजूद रहे।