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शिमला मौलाना में चुनाव का बहिष्कार
अमर उजाला,पानीपत
Updated Thu, 10 Apr 2014 09:35 PM IST
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पानीपत। गांव शिमला मौलाना के ग्रामीणों ने नगर निगम के बाद लोकसभा चुनाव का बहिष्कार कर दिया और 1053 मतदाताओं में से केवल 105 मतदाताओं ने मतदान किया। वहीं पहले बहिष्कार की धमकी देने वाले निजामपुर गांव में मतदान हुआ और एक बड़ी संख्या में मतदाता मतदान केंद्र पर पहुंचे। यहां पर 935 में से 625 मतदाताओं ने मतदान किया। इस बीच प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों ने ग्रामीणों को समझाने का काफी प्रयास किया। लोकसभा चुनाव को लेकर वीरवार को हर मतदाता मतदान के लिए उत्साहित था, लेकिन पानीपत ग्रामीण विधानसभा के शिमला मौलाना गांव ने नगर निगम के बाद लोकसभा चुनाव का भी बहिष्कार कर दिया। ग्रामीण मतदान केंद्र के आसपास तो रहे, लेकिन मतदान करने नहीं गए। ग्रामीणों में प्रशासन व सरकार की अनदेखी पर रोष दिखा। शिमला मौलाना गांव में 1053 में से 105 मतदाताओं ने ही मतदान किया। वहीं दूसरी तरफ साथ-साथ संघर्ष की घोषणा करने वाले पड़ोसी निजामपुर गांव में मतदान सुबह से शाम तक चला। यहां पर 935 में से 625 मतदाताओं ने मतदान किया। वहीं ग्रामीणों का कहना है कि यहां पर एल्डिगो व बाबर मंडी का भी बूथ बनाया गया था। मतदान करने वालों में ज्यादातर इन्हीं दो स्थानों के मतदाता थे।
यह था कारण
शिमला मौलाना और निजामपुर को नगर निगम में शामिल कर लिया था और ग्रामीणों ने इसका विरोध किया था। ग्रामीण दोनों गांवों में ग्राम पंचायत का चुनाव बहाल कराना चाहते थे और अपनी मांगों को लेकर कई बार प्रशासनिक अधिकारियों से मिले थे। अधिकारियों ने ग्रामीणों को ग्राम पंचायत का चुनाव बहाल करने का आश्वासन दिया था, लेकिन दोनों गांवों की ग्राम पंचायत बहाल नहीं हो सकी। ग्रामीणों ने अर्थ वेलफेयर एसोसिएशन का गठन कर दिया और इसके बैनर तले संघर्ष का घोषणा कर दी। शिमला मौलाना और निजामपुर के ग्रामीणों ने नगर निगम चुनाव का पूर्ण बहिष्कार कर दिया था और गत दिनों लोकसभा चुनाव का भी बहिष्कार करने की चेतावनी दी थी। ग्रामीण अपनी मांगों को लेकर प्रशासनिक अधिकारियों से मिले थे। प्रशासन के सकारात्मक कदम न उठाने पर दोनों गांवों ने लोकसभा चुनाव का बहिष्कार किया था।
बच्चों के अभिभावक रहे मतदान से दूर
लोस चुनाव में एनएफएल स्थित केंद्रीय विद्यालय के बंद करने से खफा इन स्कूलों में पढ़ने वाले कई विद्यार्थियों के अभिभावक मतदान से दूर रहे। ऐसे अभिभावकों ने प्रशासन और जन प्रतिनिधियों पर अनदेखी का आरोप लगाया। ऐसे अभिभावकों का कहना है जन प्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने उनको स्कूल चालू करने का आश्वासन दिया था, लेकिन उन्होंने स्कूल को चालू कराने में कोई सहयोग नहीं दिया। ऐसे में वे उनका साथ नहीं देना चाहते। इन परिस्थितियों में जन प्रतिनिधियों को काफी झटका लगा।
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यह है स्कूल का मामला
एनएफएल ने टाउनशिप में स्थित केंद्रीय स्कूल को वित्तीय मदद दी जा रही थी, लेकिन इस बार एनएफएल प्रबंधन ने किसी तरह की वित्तीय मदद करने से साफ मना कर दिया और केंद्रीय विद्यालय संगठन को अवगत करा दिया। केंद्रीय विद्यालय संगठन ने ग्रांट न मिलने पर स्कूल को बंद करने का फैसला लिया और नए सत्र के तहत चार दिन स्कूल लगाने के बाद बंद करने का फरमान जारी कर दिया। संगठन द्वारा इससे पहले विद्यार्थियों को नोटिस भी जारी कर दिए थे।
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यह था कारण
शिमला मौलाना और निजामपुर को नगर निगम में शामिल कर लिया था और ग्रामीणों ने इसका विरोध किया था। ग्रामीण दोनों गांवों में ग्राम पंचायत का चुनाव बहाल कराना चाहते थे और अपनी मांगों को लेकर कई बार प्रशासनिक अधिकारियों से मिले थे। अधिकारियों ने ग्रामीणों को ग्राम पंचायत का चुनाव बहाल करने का आश्वासन दिया था, लेकिन दोनों गांवों की ग्राम पंचायत बहाल नहीं हो सकी। ग्रामीणों ने अर्थ वेलफेयर एसोसिएशन का गठन कर दिया और इसके बैनर तले संघर्ष का घोषणा कर दी। शिमला मौलाना और निजामपुर के ग्रामीणों ने नगर निगम चुनाव का पूर्ण बहिष्कार कर दिया था और गत दिनों लोकसभा चुनाव का भी बहिष्कार करने की चेतावनी दी थी। ग्रामीण अपनी मांगों को लेकर प्रशासनिक अधिकारियों से मिले थे। प्रशासन के सकारात्मक कदम न उठाने पर दोनों गांवों ने लोकसभा चुनाव का बहिष्कार किया था।
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बच्चों के अभिभावक रहे मतदान से दूर
लोस चुनाव में एनएफएल स्थित केंद्रीय विद्यालय के बंद करने से खफा इन स्कूलों में पढ़ने वाले कई विद्यार्थियों के अभिभावक मतदान से दूर रहे। ऐसे अभिभावकों ने प्रशासन और जन प्रतिनिधियों पर अनदेखी का आरोप लगाया। ऐसे अभिभावकों का कहना है जन प्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने उनको स्कूल चालू करने का आश्वासन दिया था, लेकिन उन्होंने स्कूल को चालू कराने में कोई सहयोग नहीं दिया। ऐसे में वे उनका साथ नहीं देना चाहते। इन परिस्थितियों में जन प्रतिनिधियों को काफी झटका लगा।
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यह है स्कूल का मामला
एनएफएल ने टाउनशिप में स्थित केंद्रीय स्कूल को वित्तीय मदद दी जा रही थी, लेकिन इस बार एनएफएल प्रबंधन ने किसी तरह की वित्तीय मदद करने से साफ मना कर दिया और केंद्रीय विद्यालय संगठन को अवगत करा दिया। केंद्रीय विद्यालय संगठन ने ग्रांट न मिलने पर स्कूल को बंद करने का फैसला लिया और नए सत्र के तहत चार दिन स्कूल लगाने के बाद बंद करने का फरमान जारी कर दिया। संगठन द्वारा इससे पहले विद्यार्थियों को नोटिस भी जारी कर दिए थे।