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Panipat News: ब्लड बैंक के लिए मांगी एक करोड़ की मशीनें
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पानीपत। जिला नागरिक अस्पताल के एक हजार यूनिट क्षमता वाले ब्लड बैंक को अपग्रेड किया जा रहा है।
यहां ब्लड कंपोनेंट मशीन लाने की तैयारी की जा रही है। कंपोनेंट मशीन व अन्य मशीनों की खरीदारी के लिए स्वास्थ्य विभाग ने मुख्यालय में एक करोड़ रुपये का बजट बनाकर भेजा है। इस बजट से अत्याधुनिक मशीनें खरीदी जाएंगी। थैलेसीमिया का वार्ड बनाया जाएगा। मुख्यालय की ओर से जिले के भर के नागरिक अस्पतालों को 20 करोड़ रुपये मिलने हैं।
उल्लेखनीय है जून तक जिला नागरिक अस्पताल के अपग्रेड होने की उम्मीद है। स्वास्थ्य विभाग ब्लड बैंक को अपग्रेड करने में रिफाइनरी की मदद भी ले रहा है। गौरतलब है कि कंपोनेंट मशीनें डेंगू, बर्न केस, थैलेसीमिया व एड्स के मामलों में लाभकारी होगी। अब मरीजों को ब्लड कंपोनेंट मशीन के लिए पीजीआई व दूसरे जिलों की रोजाना दौड़ लगानी पड़ रही है।
ब्लड सेपरेटर मशीन खून में शामिल तत्वों को अलग अलग कर देती है। यह मशीन लाल रक्त कणिकाएं (आरबीसी), श्वेत रक्त कणिकाएं (डब्ल्यूबीसी), प्लेटलेट्स, प्लाज्मा, फ्रेश फ्रोजन प्लाज्मा (एफएफपी) को अलग करती है।। पैथालॉजिस्ट डॉ. रजत गुप्ता विशेषज्ञों के अनुसार थैलेसीमिया के मरीजों को आरबीसी, डेंगू के मरीजों को प्लेटलेट्स, बर्न के मरीजों को प्लाज्मा व एफएफपी व एड्स के मरीजों को डब्ल्यूबीसी की जरूरत पड़ती है।
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यहां ब्लड कंपोनेंट मशीन लाने की तैयारी की जा रही है। कंपोनेंट मशीन व अन्य मशीनों की खरीदारी के लिए स्वास्थ्य विभाग ने मुख्यालय में एक करोड़ रुपये का बजट बनाकर भेजा है। इस बजट से अत्याधुनिक मशीनें खरीदी जाएंगी। थैलेसीमिया का वार्ड बनाया जाएगा। मुख्यालय की ओर से जिले के भर के नागरिक अस्पतालों को 20 करोड़ रुपये मिलने हैं।
उल्लेखनीय है जून तक जिला नागरिक अस्पताल के अपग्रेड होने की उम्मीद है। स्वास्थ्य विभाग ब्लड बैंक को अपग्रेड करने में रिफाइनरी की मदद भी ले रहा है। गौरतलब है कि कंपोनेंट मशीनें डेंगू, बर्न केस, थैलेसीमिया व एड्स के मामलों में लाभकारी होगी। अब मरीजों को ब्लड कंपोनेंट मशीन के लिए पीजीआई व दूसरे जिलों की रोजाना दौड़ लगानी पड़ रही है।
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ब्लड सेपरेटर मशीन खून में शामिल तत्वों को अलग अलग कर देती है। यह मशीन लाल रक्त कणिकाएं (आरबीसी), श्वेत रक्त कणिकाएं (डब्ल्यूबीसी), प्लेटलेट्स, प्लाज्मा, फ्रेश फ्रोजन प्लाज्मा (एफएफपी) को अलग करती है।। पैथालॉजिस्ट डॉ. रजत गुप्ता विशेषज्ञों के अनुसार थैलेसीमिया के मरीजों को आरबीसी, डेंगू के मरीजों को प्लेटलेट्स, बर्न के मरीजों को प्लाज्मा व एफएफपी व एड्स के मरीजों को डब्ल्यूबीसी की जरूरत पड़ती है।
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