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टेक्सटाइल नगरी की लाइफलाइन मध्यम, लघु व सुक्ष्म उद्योग -
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पानीपत। जिले में 21453 मध्यम, लघु एवं सूक्ष्म उद्योग टेक्सटाइल नगरी की लाइफलाइन हैं। इन उद्योगों ने देशभर के तीन लाख लोगों को रोजगार दिया है। यही नहीं सरकार को इससे हर साल आठ हजार करोड़ रुपये का टैक्स मिलता है। माना जाता है कि रोजगार की उम्मीद लेकर आने वाले प्रवासियों को यह नगरी कभी निराश नहीं करती। यहां तक कोरोना काल में भी यह श्रमिकों के लिए संकटमोचक बनी रही। इसके बावजूद एमएसएमई के अंतर्गत आने वाले उद्योगों को सरकार से सहायता नहीं मिल पा रही है। पीएनजी की बाध्यता के कारण अब कई उद्योग बंद होने की कगार पर हैं।
दरअसल, एमएसएमई के अंतर्गत आने वाले उद्योगों को कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट ने 30 सितंबर तक पीएनजी पर आने का अल्टीमेटम दिया है। कमीशन ने पीएनजी पर न आने वाले उद्योगों को बंद करने की भी चेतावनी दी है। इससे परेशान उद्यमी यहां से पलायन कर रहे हैं। ऐसे में यहां कार्यरत श्रमिकों के रोजगार पर भी संकट मंडरा रहा है। इस संबंध में पानीपत इंडस्ट्रियल एसोसिएशन के प्रधान प्रीतम सचदेवा ने कहा कि एमएसएमई के अंतर्गत आने वाले उद्योग लाखों लोगों को रोजगार दे रहे हैं। ऐसे में सरकार को इन उद्योगों की ओर ध्यान देना चाहिए। वहीं डायर्स एसोसिएशन प्रधान भीम राणा ने कहा कि पानीपत को एनसीआर में होने का बड़ा खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। पानीपत को एनसीआर की कोई सुविधा नहीं मिल रही है, जबकि पानीपत को इससे करोड़ों रुपये का नुकसान हो चुका है। हम दूसरे प्रदेश के उद्यमियों से कंपीटीशन नहीं कर पा रहे हैं। अब पीएनजी की बाध्यता से उद्योग बंद हो जाएंगे।
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दरअसल, एमएसएमई के अंतर्गत आने वाले उद्योगों को कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट ने 30 सितंबर तक पीएनजी पर आने का अल्टीमेटम दिया है। कमीशन ने पीएनजी पर न आने वाले उद्योगों को बंद करने की भी चेतावनी दी है। इससे परेशान उद्यमी यहां से पलायन कर रहे हैं। ऐसे में यहां कार्यरत श्रमिकों के रोजगार पर भी संकट मंडरा रहा है। इस संबंध में पानीपत इंडस्ट्रियल एसोसिएशन के प्रधान प्रीतम सचदेवा ने कहा कि एमएसएमई के अंतर्गत आने वाले उद्योग लाखों लोगों को रोजगार दे रहे हैं। ऐसे में सरकार को इन उद्योगों की ओर ध्यान देना चाहिए। वहीं डायर्स एसोसिएशन प्रधान भीम राणा ने कहा कि पानीपत को एनसीआर में होने का बड़ा खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। पानीपत को एनसीआर की कोई सुविधा नहीं मिल रही है, जबकि पानीपत को इससे करोड़ों रुपये का नुकसान हो चुका है। हम दूसरे प्रदेश के उद्यमियों से कंपीटीशन नहीं कर पा रहे हैं। अब पीएनजी की बाध्यता से उद्योग बंद हो जाएंगे।
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