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Panipat News: पहले हंसना सीखा, फायदे जाने तो दूसरे को लगे हंसाने

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 08 May 2023 01:35 AM IST
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Learned to laugh first, knowing the benefits, started making others laugh
पानीपत। रोते हुए आते हैं सब हंसता हुआ जो जाएगा....मुकद्दर का सिकंदर फिल्म में किशोर कुमार का गाया यह गीत आज भी लोगों के बुझे चेहरे पर रौनक ला देता है। गीतों की इन लाइनों पर ही लोगों के चेहरों पर हंसी लाने का काम कर रहे हैं पानीपत के बजाज बंधु अरविंद और सुनील, जिनकी हंसी के शहरवासी कायल हैं। दोनों की उम्र 60 वर्ष से अधिक है, लेकिन हंसी ने उनको जवां बना रखा है। कभी हंसने से परहेज करने वाले बजाज बंधु को जब इसके फायदे पता लगे तो उन्होंने न सिर्फ इसे जीवन में अपनाया बल्कि बड़ी संख्या में लोगों को इससे जोड़ा। अब उनका क्लब लाफ्टर क्लब के नाम से जाना जाने लगा है।
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अरविंद बजाज ने बताया कि उनकी उम्र 60 वर्ष से अधिक है। वह पहले पूरा दिन अपने काम में लगे रहते थे। वे एक दिन पार्क में गये थे, जहां उनको आर्मी से रिटायर्ड कर्नल मिल गए। उन्होंने हंसने के फायदे बताए, जिसके बाद रोज सुबह सैर के दौरान हंसने का प्रयास करने लगे। उनको शुरुआत में हंसना बड़ा मुश्किल लगा, लेकिन जब कुछ दिन इसे दिनचर्या में शामिल किया तो इसके फायदे भी नजर आने लगे। सुबह हंसने के बाद पूरा दिन ताजगी महसूस रहती थी। इसके बाद उनके साथ सुनील बजाज और मनोज मक्कड़ सहित अन्य लोग जुड़ते चले गए।
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सुनील बजाज ने बताया कि आज भी सुबह सात बजे डीएवी पार्क मॉडल टाउन में चले जाते हैं। पहले कुछ देर सैर करते हैं। योग के बाद 10 से 15 मिनट तक ठहाके लगाकर हंसते हैं। उनकी हंसी दूर-दूर तक जाती है। पहले जहां कुछ लोग ही उनके साथ होते थे। अब आसपास के लोग भी आ जाते हैं। हंसने से पूरे शरीर को पॉजिटिव एनर्जी मिलती है और पूरा दिन शरीर और मन में ताजगी रहती है। सुबह ही सैर और हंसी के बाद दिनभर किसी प्रकार का तनाव महसूस नहीं होता।
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सिविल अस्पताल पानीपत की मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. मोना नागपाल ने बताया कि आज व्यक्ति अपने तक सीमित रह गया है। वह समस्याओं से बाहर निकलता है तो मोबाइल को पकड़ लेता है। ऐसे में शारीरिक और मानसिक रूप से बीमार सा हो गया है। कोरोना के दौरान तो मनोरोगियों की संख्या एकाएक बढ़ गई थी। हंसना एक तरह की थैरेपी है। इसे हम लाफ्टर थैरेपी भी कह सकते हैं।
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