Neeraj Chopra Interview: 'विदेश में रहकर अंग्रेजी बोलना सीख गया हूं, लेकिन मुझे हरियाणवी बोलना ज्यादा पसंद'
गोल्डन बॉय नीरज चोपड़ा का पैतृक गांव खंडरा पहुंचने पर गर्मजोशी से स्वागत हुआ। चीन में भाषा के चलते कई बार दिक्कत आई, लेकिन निशाना स्वर्ण पदक पर रहा। नीरज बोले कि पदक की चमक देख खिलाड़ी को फील्ड नहीं बदलनी चाहिए, मेरा अगला लक्ष्य पेरिस ओलंपिक है।
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युवाओं को दूसरे खिलाड़ियों के पदक की चमक देखकर अपने खेल का फील्ड नहीं बदलना चाहिए। उन्हें अपने खेल में दो या तीन साल जमकर मेहनत करनी चाहिए। वे लक्ष्य निर्धारित करेंगे तो एक दिन खुद इस मुकाम पर पहुंच जाएंगे। मेरे सामने भी शुरुआत में यही दिक्कत थी। माता-पिता केवल दौड़ तक सीमित रखना चाहते थे, लेकिन मैंने जेवलिन में भविष्य देखा और कई साल लगातार मेहनत की। मेरा अगला लक्ष्य 2024 में पेरिस ओलंपिक है। मैं देश की झोली में एक और स्वर्ण पदक डालना चाहता हूं। यहां से जीत की स्वर्ण पारी को दोहराने के लिए मैदान में उतरना है। यह कहना है गोल्डन बॉय नीरज चोपड़ा का।
नीरज चाेपड़ा विश्व एथलेटिक्स ओलंपिक और एशियाई खेलों में पदक जीतने के बाद शुक्रवार देर रात अपने पैतृक गांव खंडरा पहुंचे। नीरज ने पहुंचते ही अपने पिता सतीश कुमार, माता सुदेश देवी व चाचा भीम चोपड़ा के पैर छूकर आशीर्वाद लिया। मां ने बेटे को गले लगाकर शुभकामनाएं दी। पानीपत शहर विधायक प्रमोद विज, उपायुक्त डॉ. वीरेंद्र दहिया और पुलिस अधीक्षक अजीत सिंह शेखावत खंडरा गांव स्थित उनके घर पहुंचकर उन्हें बधाई दी।
नीरज चोपड़ा से सात सवाल और उनके जवाब
प्रश्न : क्या एशियाई खेलों में आपको किसी प्रकार की परेशानी आई। पहले के थ्रो में तकनीकी विषय उलझन बना था।
उत्तर : एशियाई खेलों में कोई बड़ी परेशानी नहीं आई, लेकिन भाषा के चलते कुछ दिक्कत जरूर रही।
प्रश्न : आप ठेठ हरियाणवी बोलते हैं, क्या यह भी कारण रहा है?
उत्तर : ऐसा नहीं है। मैं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अंग्रेजी का प्रयोग करता हूं। हरियाणवी बोलना मुझे अच्छा लगता है और मैं इसे अपनाकर रखना चाहता हूं।
प्रश्न : एशियाई खेलों में किशोर जेना ने रजत पदक जीता है। उनका थ्रो भी आपकी तरह है। इस बारे में क्या कहेंगे?
उत्तर : किशोर जेना का थ्रो अच्छा रहा है। वे लगातार मेहनत कर रहे हैं, लेकिन थ्रो करने की मेरी तकनीक अलग है। हर खिलाड़ी की अपनी तकनीक होती है। वह सामान्य रूप से नजर नहीं आती।
प्रश्न : पाकिस्तान के अरशद नदीम चोट के चलते एशियाई खेलों में नहीं खेल पाए। आपका क्या कहना है?
उत्तर : अरशद नदीम चोट के चलते एशियाई खेलों में नहीं खेल पाए। यह एक खिलाड़ी के लिए बड़ी चुनौती होती है। मैं खुद कॉमनवेल्थ गेम्स में चोट लगने के कारण नहीं खेल पाया था।
प्रश्न : आपका अगला लक्ष्य क्या है?
उत्तर : मेरा अगजा लक्ष्य पेरिस ओलंपिक-2024 में देश को एक और स्वर्ण पदक दिलाना है। मैं अब जीत दोहराना चाहता हूं।
प्रश्न : विश्व चैंपियनशिप और एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने के साथ युवाओं की पहली पसंद बन गए हैं। काफी युवा दूसरे खेल छोड़कर जेवलिन में आ रहे हैं। इस पर आपका क्या कहना है?
उत्तर : प्रत्येक खिलाड़ी का अपना लक्ष्य और फील्ड होता है। उसे अपने खेल में ही मेहनत करनी चाहिए। वह पदक के लिए फील्ड बदलेगा तो लक्ष्य पाना मुश्किल हो जाएगा।
प्रश्न : पहले कहावत थी कि पढ़ोगे लिखोगे तो बनोगे नवाब और खेलों और कूदोगे तो बनोगे खराब। इस पर क्या कहना है?
उत्तर : समय के साथ सब कुछ बदलता है। आज खेलों में भविष्य है और युवा पीढ़ी इसमें आगे आ रही है। यह नए दौर की कहानी को दर्शाता है।
प्रश्न : युवा पीढ़ी और नौकरीपेशा लोगों को क्या संदेश देंगे?
उत्तर : युवाओं को पढ़ाई-लिखाई के साथ खेलों में भी आगे आना चाहिए। उन्हें हर रोज एक से दो घंटे खेल को देना चाहिए। इससे उनकी फिटनेस भी बनी रहेगी।