{"_id":"6a973dfc7bf5bd6bab0b755d","slug":"land-measurement-using-the-dgps-machine-has-been-completed-in-jagannath-vihar-colony-the-land-width-was-initially-stated-as-22-feet-then-revised-to-12-feet-and-is-now-reported-as-25-feet-panipat-news-c-244-1-pnp1001-163408-2026-09-02","type":"story","status":"publish","title_hn":"Panipat News: ड्रेन नंबर-1 की पैमाइश पूरी, अब पक्के निशान पर हटेंगे कब्जे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Panipat News: ड्रेन नंबर-1 की पैमाइश पूरी, अब पक्के निशान पर हटेंगे कब्जे
विज्ञापन
ड्रेन नंबर-1 पर पैमाइश करते निगम की टीम। संवाद
माई सिटी रिपोर्टर
पानीपत। ड्रेन नंबर-1 के साथ अतिक्रमण हटाने की कवायद के बीच नगर निगम ने अत्याधुनिक डीजीपीएस मशीन से पैमाइश पूरी कर ली है। मंगलवार को दूसरे दिन देवी मंदिर से पैमाइश शुरू कर छोटूराम चौक की ओर काम पूरा किया गया। अब पैमाइश के आधार पर मौके पर पक्के निशान लगाए गए हैं। इन्हीं निशानों के आधार पर आगामी दिनों में जेसीबी चलाकर कब्जे हटाए जाएंगे।
जगन्नाथ विहार में पैमाइश के आंकड़ों को लेकर भी सवाल उठे हैं। एक मकान को पहले 22 और फिर 12 फीट कब्जे का नोटिस दिया गया था, जबकि नई पैमाइश में 25 फीट जमीन दिखाई गई है। एक अन्य व्यक्ति के 40 गज के मकान को भी अवैध बताया गया है। इस बीच निगम ने लोधी पार्क से बेरी वाली मस्जिद तक ड्रेन के दूसरी तरफ के कब्जे नहीं हटाने का फैसला लिया है। इस हिस्से में ड्रेन को कवर कर टू-वे सड़क बनाने के लिए प्रोजेक्ट में बदलाव किया जाएगा।
एक टीम ने पैमाइश, दूसरी ने बदला प्रोजेक्ट : नगर निगम की एक टीम ने मंगलवार को देवी मंदिर से पैमाइश शुरू की और शाम तक छोटूराम चौक की तरफ काम पूरा किया। दूसरी टीम ने ड्रेन नंबर-1 के प्रोजेक्ट में बदलाव पर काम किया। तकनीकी टीम ने निगम आयुक्त डॉ. पंकज और मेयर कोमल सैनी को नए बदलावों की जानकारी दी। जनहित को देखते हुए ड्रेन के कुछ हिस्से को कवर करने के फैसले पर उन्होंने सहमति जताई। अब इसी आधार पर पूरे प्रोजेक्ट में बदलाव किया जाएगा।
विज्ञापन
निगम ने ड्रेन नंबर-1 के दोनों किनारों पर 237 अवैध कब्जाधारियों को चिह्नित कर नोटिस जारी किए थे। पिछले सप्ताह अभियान चलाकर दो दिन में 85 कब्जे ध्वस्त किए गए थे। इसके बाद सटीक सीमा तय करने के लिए डीजीपीएस से दोबारा पैमाइश कराई गई।
लोग लामबंद, पक्षपात का आरोप; करनाल मॉडल की मांग
पैमाइश टीम के लौटने के बाद न्यू जगन्नाथ कॉलोनी के लोगों ने पूर्व जिला पार्षद जोगिंदर स्वामी की मौजूदगी में बैठक की। स्वामी ने कहा कि 1994 में सिंचाई विभाग की पैमाइश के बाद लोगों ने मकान और दुकानें बनाई थीं। 2011 में भी कुछ कब्जे हटाकर ड्रेन को पक्का किया गया था। उन्होंने निगम पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए कहा कि माईजी कॉलोनी और जगन्नाथ विहार में नजर आने वाले कई कब्जे छोड़ दिए गए हैं, जबकि रजिस्ट्री और अन्य दस्तावेज वाले मकानों को अवैध बताया जा रहा है। उन्होंने करनाल की तर्ज पर पूरी ड्रेन को कवर करने की मांग की।
पैमाइश पर आपत्तियां
बालकिशन ने बताया कि 1971 में कमेटी की नीलामी से 300 गज जमीन ली थी। रजिस्ट्री और इंतकाल के बाद मकान बनाया। 18 जून के नोटिस में 22 फीट कब्जा बताया गया, 27 जुलाई को यह 12 फीट कर दिया गया और अब पैमाइश में 25 फीट बताया गया है।
विकास मित्तल ने बताया कि उनकी 510 गज जमीन की रजिस्ट्री और इंतकाल 2006 से है। निगम के अनुसार नाला 55 फीट का है, जबकि मौके पर पैमाइश में 65 फीट आया। उनकी फैक्टरी का करीब आठ फीट हिस्सा इसकी जद में बताया गया है।
राजेश के अनुसार 142 गज जमीन की रजिस्ट्री और इंतकाल 2005 से है। पहले 18 फीट और अब 10 फीट कब्जा बताया गया है। उनके घर के पास नाले की जमीन 52 फीट बनती है, जबकि पैमाइश में 53 फीट आई है। शुभम ने बताया कि उनके दादा ने 1995 में 40.4 गज प्लॉट की रजिस्ट्री और इंतकाल कराया था। निगम ने पहले 35 गज और अब पूरे 40 गज को पैमाइश में शामिल कर मकान को अवैध बताया है। उनका कहना है कि वह नियमित रूप से प्रॉपर्टी टैक्स भी जमा कराते हैं, फिर भी उनकी सुनवाई नहीं हो रही।
विज्ञापन
पानीपत। ड्रेन नंबर-1 के साथ अतिक्रमण हटाने की कवायद के बीच नगर निगम ने अत्याधुनिक डीजीपीएस मशीन से पैमाइश पूरी कर ली है। मंगलवार को दूसरे दिन देवी मंदिर से पैमाइश शुरू कर छोटूराम चौक की ओर काम पूरा किया गया। अब पैमाइश के आधार पर मौके पर पक्के निशान लगाए गए हैं। इन्हीं निशानों के आधार पर आगामी दिनों में जेसीबी चलाकर कब्जे हटाए जाएंगे।
जगन्नाथ विहार में पैमाइश के आंकड़ों को लेकर भी सवाल उठे हैं। एक मकान को पहले 22 और फिर 12 फीट कब्जे का नोटिस दिया गया था, जबकि नई पैमाइश में 25 फीट जमीन दिखाई गई है। एक अन्य व्यक्ति के 40 गज के मकान को भी अवैध बताया गया है। इस बीच निगम ने लोधी पार्क से बेरी वाली मस्जिद तक ड्रेन के दूसरी तरफ के कब्जे नहीं हटाने का फैसला लिया है। इस हिस्से में ड्रेन को कवर कर टू-वे सड़क बनाने के लिए प्रोजेक्ट में बदलाव किया जाएगा।
विज्ञापन
एक टीम ने पैमाइश, दूसरी ने बदला प्रोजेक्ट : नगर निगम की एक टीम ने मंगलवार को देवी मंदिर से पैमाइश शुरू की और शाम तक छोटूराम चौक की तरफ काम पूरा किया। दूसरी टीम ने ड्रेन नंबर-1 के प्रोजेक्ट में बदलाव पर काम किया। तकनीकी टीम ने निगम आयुक्त डॉ. पंकज और मेयर कोमल सैनी को नए बदलावों की जानकारी दी। जनहित को देखते हुए ड्रेन के कुछ हिस्से को कवर करने के फैसले पर उन्होंने सहमति जताई। अब इसी आधार पर पूरे प्रोजेक्ट में बदलाव किया जाएगा।
विज्ञापन
निगम ने ड्रेन नंबर-1 के दोनों किनारों पर 237 अवैध कब्जाधारियों को चिह्नित कर नोटिस जारी किए थे। पिछले सप्ताह अभियान चलाकर दो दिन में 85 कब्जे ध्वस्त किए गए थे। इसके बाद सटीक सीमा तय करने के लिए डीजीपीएस से दोबारा पैमाइश कराई गई।
लोग लामबंद, पक्षपात का आरोप
पैमाइश टीम के लौटने के बाद न्यू जगन्नाथ कॉलोनी के लोगों ने पूर्व जिला पार्षद जोगिंदर स्वामी की मौजूदगी में बैठक की। स्वामी ने कहा कि 1994 में सिंचाई विभाग की पैमाइश के बाद लोगों ने मकान और दुकानें बनाई थीं। 2011 में भी कुछ कब्जे हटाकर ड्रेन को पक्का किया गया था। उन्होंने निगम पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए कहा कि माईजी कॉलोनी और जगन्नाथ विहार में नजर आने वाले कई कब्जे छोड़ दिए गए हैं, जबकि रजिस्ट्री और अन्य दस्तावेज वाले मकानों को अवैध बताया जा रहा है। उन्होंने करनाल की तर्ज पर पूरी ड्रेन को कवर करने की मांग की।
पैमाइश पर आपत्तियां
बालकिशन ने बताया कि 1971 में कमेटी की नीलामी से 300 गज जमीन ली थी। रजिस्ट्री और इंतकाल के बाद मकान बनाया। 18 जून के नोटिस में 22 फीट कब्जा बताया गया, 27 जुलाई को यह 12 फीट कर दिया गया और अब पैमाइश में 25 फीट बताया गया है।
विकास मित्तल ने बताया कि उनकी 510 गज जमीन की रजिस्ट्री और इंतकाल 2006 से है। निगम के अनुसार नाला 55 फीट का है, जबकि मौके पर पैमाइश में 65 फीट आया। उनकी फैक्टरी का करीब आठ फीट हिस्सा इसकी जद में बताया गया है।
राजेश के अनुसार 142 गज जमीन की रजिस्ट्री और इंतकाल 2005 से है। पहले 18 फीट और अब 10 फीट कब्जा बताया गया है। उनके घर के पास नाले की जमीन 52 फीट बनती है, जबकि पैमाइश में 53 फीट आई है। शुभम ने बताया कि उनके दादा ने 1995 में 40.4 गज प्लॉट की रजिस्ट्री और इंतकाल कराया था। निगम ने पहले 35 गज और अब पूरे 40 गज को पैमाइश में शामिल कर मकान को अवैध बताया है। उनका कहना है कि वह नियमित रूप से प्रॉपर्टी टैक्स भी जमा कराते हैं, फिर भी उनकी सुनवाई नहीं हो रही।

ड्रेन नंबर-1 पर पैमाइश करते निगम की टीम। संवाद