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Panipat News: हिंदू-मुस्लिम एकता बढ़ाने और नफरत मिटाने पर काम करेगी जमीयत
Mon, 19 Oct 2026 03:08 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
Updated Mon, 19 Oct 2026 03:08 AM IST
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जमीयत उलेमा हिंद के सम्मेलन को संबोधित करते मौलाना सैयद अरशद मदनी। संवाद
पानीपत। जमीयत उलेमा मुत्तहिदा देश में हिंदू-मुस्लिम एकता को बढ़ावा देने की दिशा में और मजबूती से काम करेगा। रविवार को पत्थरगढ़ गांव स्थित जामिया लिल बनात स्कूल में आयोजित मजलिस-ए-मुन्तजिमा में जमीयत उलेमा यूपी के अध्यक्ष हजरत मौलाना सैयद अशहद रशीदी और राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी के बेटे मौलाना सैयद अजहर मदनी की मौजूदगी में यह प्रस्ताव पारित किया गया। इसके अलावा तीन और प्रस्ताव पारित किए गए। इस सम्मेलन में हरियाणा, पंजाब, हिमाचल व चंडीगढ़ से आए प्रतिनिधियों ने शिरकत की।
जमीयत उलेमा यूपी के अध्यक्ष हजरत मौलाना सैयद अशहद रशीदी ने कहा कि हर व्यक्ति को अपने मन में यह बात अच्छी तरह बैठा लेनी चाहिए कि जमीयत कोई राजनीतिक पार्टी नहीं, बल्कि एक विशुद्ध धार्मिक और सामाजिक संगठन है। यह संगठन धर्म के दायरे में रहते हुए देश और देशवासियों की सेवा को ही परम उद्देश्य मानता है। उन्होंने कहा कि जब देश में चुनाव होते हैं, तब जमीयत चुनावी राजनीति में भाग लेने के लिए मैदान में नहीं उतरती। जमीयत का मूल ध्येय बेसहारा लोगों को सहारा देना, बेगुनाहों की रिहाई के लिए कानूनी प्रयास करना, पीड़ितों की मदद करना, मोहब्बत बांटना और मानवता की सेवा करना है। नफरत फैलाना जमीयत का काम नहीं है। देश और समाज के हित में जमीयत जिस कार्य को आवश्यक समझती है, उसके लिए सदैव अपनी सेवाएं और कुर्बानियां पेश करती है।
मौलाना रशीदी ने जमीयत उलेमा हिंद की सेवाओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि लगभग एक सदी पहले देश पर अंग्रेजों का शासन था और अत्याचार व दमन के जरिए सत्ता को मजबूत बनाए रखने की कोशिश की जाती थी, उस समय जमीयत के बुजुर्गों ने अंग्रेजी हुकूमत की दमनकारी नीतियों के खिलाफ सबसे पहले आवाज उठाई थी। उन्होंने विशेष रूप से हजरत शेखुल हिंद मौलाना महमूद हसन देवबंदी और उनके शिष्य हजरत मौलाना सैयद हुसैन अहमद मदनी की कुर्बानियों का जिक्र किया।
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गंगा-जमुनी तहजीब ही भारत की असली खूबसूरती
मौलाना सैयद अजहर मदनी ने कहा कि जमीयत का इतिहास हमें सीख देता है कि देश के निर्माण और उसकी रक्षा के लिए आपसी एकता व सम्मान को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। धर्म के नाम पर नफरत पैदा करने के बजाय इंसानों के बीच प्रेम और विश्वास के रिश्ते मजबूत करना आज के दौर की सबसे बड़ी जरूरत है। उन्होंने कहा कि देश की खूबसूरती उसकी गंगा-जमुनी तहजीब, विभिन्न धर्मों को मानने वाले लोगों के आपसी सम्मान और साझा राष्ट्रीय जीवन में निहित है। यदि हम एक-दूसरे के दुख-दर्द में सहभागी बनें और मतभेदों के बावजूद सम्मान बनाए रखें तो नफरत की दीवारें खुद-ब-खुद ढह जाएंगी। देश तरक्की, खुशहाली और भाईचारे के रास्ते पर तेजी से आगे बढ़ेगा।
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सम्मेलन में पास किए गए चार मुख्य प्रस्ताव
हिंदू-मुस्लिम एकता को बढ़ावा और नफरत का खात्मा : दोनों समुदायों के बीच प्रेम, सौहार्द और भाईचारे को बढ़ावा देने तथा अपने अच्छे आचरण से लोगों का दिल जीतने का संकल्प लिया गया। मौलाना सैयद अजहर मदनी ने कहा कि यदि किसी स्थान पर आप स्वयं को अकेला महसूस करें, तो अपनी खुशमिजाजी, अच्छे व्यवहार और मोहब्बत के जरिए दूसरों को अपना बनाएं। अपने अच्छे गुणों को इस प्रकार प्रस्तुत करें कि गलतफहमियां दूर हों और आपसी विश्वास मजबूत हो।
-दीनी के साथ आधुनिक शिक्षा का समावेश : समुदाय में दीनी (धार्मिक) शिक्षा के साथ-साथ आधुनिक (सांसारिक/वैज्ञानिक) शिक्षा को अपनाने पर विशेष जोर दिया गया। मौलाना सैयद अजहर मदनी ने कहा कि वक्त की जरूरत को समझते हुए बच्चों को उच्च व आधुनिक शिक्षा से जोड़ना अनिवार्य है।
व्यापार में ईमानदारी और सच्चाई: व्यापार में ईमानदारी और सच्चाई को अपनाने का प्रस्ताव पास किया गया। मौलाना सैयद अजहर मदनी ने कुरान का हवाला देते हुए कहा कि ईमानदारी सबसे बड़ी नेकी है। ग्राहक व्यापारी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है, यदि हम अपने कार्य में बेईमानी करेंगे तो कभी तरक्की नहीं कर सकते।
-जमीयत उलमा मुत्तहिदा को मजबूती : संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने और समाज के हर वर्ग तक इसके कल्याणकारी संदेश को पहुंचाने का संकल्प लिया गया।
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चार राज्यों के प्रतिनिधि हुए शामिल
जमीयत उलेमा यूपी के अध्यक्ष हजरत मौलाना सैयद अशहद रशीदी और राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी के बेटे मौलाना सैयद अजहर मदनी शामिल हुए। मुत्तहिदा पंजाब के पूर्व अध्यक्ष सरपरस्ती हजरत मौलाना हारून और पंजाब व हिमाचल प्रदेश के अध्यक्ष हजरत मौलाना हकीमुद्दीन अशरफ ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। कार्यक्रम का संचालन संगठन के महासचिव हजरत कारी इलियास ने किया। ब्यूरो
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जमीयत उलेमा यूपी के अध्यक्ष हजरत मौलाना सैयद अशहद रशीदी ने कहा कि हर व्यक्ति को अपने मन में यह बात अच्छी तरह बैठा लेनी चाहिए कि जमीयत कोई राजनीतिक पार्टी नहीं, बल्कि एक विशुद्ध धार्मिक और सामाजिक संगठन है। यह संगठन धर्म के दायरे में रहते हुए देश और देशवासियों की सेवा को ही परम उद्देश्य मानता है। उन्होंने कहा कि जब देश में चुनाव होते हैं, तब जमीयत चुनावी राजनीति में भाग लेने के लिए मैदान में नहीं उतरती। जमीयत का मूल ध्येय बेसहारा लोगों को सहारा देना, बेगुनाहों की रिहाई के लिए कानूनी प्रयास करना, पीड़ितों की मदद करना, मोहब्बत बांटना और मानवता की सेवा करना है। नफरत फैलाना जमीयत का काम नहीं है। देश और समाज के हित में जमीयत जिस कार्य को आवश्यक समझती है, उसके लिए सदैव अपनी सेवाएं और कुर्बानियां पेश करती है।
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मौलाना रशीदी ने जमीयत उलेमा हिंद की सेवाओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि लगभग एक सदी पहले देश पर अंग्रेजों का शासन था और अत्याचार व दमन के जरिए सत्ता को मजबूत बनाए रखने की कोशिश की जाती थी, उस समय जमीयत के बुजुर्गों ने अंग्रेजी हुकूमत की दमनकारी नीतियों के खिलाफ सबसे पहले आवाज उठाई थी। उन्होंने विशेष रूप से हजरत शेखुल हिंद मौलाना महमूद हसन देवबंदी और उनके शिष्य हजरत मौलाना सैयद हुसैन अहमद मदनी की कुर्बानियों का जिक्र किया।
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गंगा-जमुनी तहजीब ही भारत की असली खूबसूरती
मौलाना सैयद अजहर मदनी ने कहा कि जमीयत का इतिहास हमें सीख देता है कि देश के निर्माण और उसकी रक्षा के लिए आपसी एकता व सम्मान को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। धर्म के नाम पर नफरत पैदा करने के बजाय इंसानों के बीच प्रेम और विश्वास के रिश्ते मजबूत करना आज के दौर की सबसे बड़ी जरूरत है। उन्होंने कहा कि देश की खूबसूरती उसकी गंगा-जमुनी तहजीब, विभिन्न धर्मों को मानने वाले लोगों के आपसी सम्मान और साझा राष्ट्रीय जीवन में निहित है। यदि हम एक-दूसरे के दुख-दर्द में सहभागी बनें और मतभेदों के बावजूद सम्मान बनाए रखें तो नफरत की दीवारें खुद-ब-खुद ढह जाएंगी। देश तरक्की, खुशहाली और भाईचारे के रास्ते पर तेजी से आगे बढ़ेगा।
सम्मेलन में पास किए गए चार मुख्य प्रस्ताव
हिंदू-मुस्लिम एकता को बढ़ावा और नफरत का खात्मा : दोनों समुदायों के बीच प्रेम, सौहार्द और भाईचारे को बढ़ावा देने तथा अपने अच्छे आचरण से लोगों का दिल जीतने का संकल्प लिया गया। मौलाना सैयद अजहर मदनी ने कहा कि यदि किसी स्थान पर आप स्वयं को अकेला महसूस करें, तो अपनी खुशमिजाजी, अच्छे व्यवहार और मोहब्बत के जरिए दूसरों को अपना बनाएं। अपने अच्छे गुणों को इस प्रकार प्रस्तुत करें कि गलतफहमियां दूर हों और आपसी विश्वास मजबूत हो।
-दीनी के साथ आधुनिक शिक्षा का समावेश : समुदाय में दीनी (धार्मिक) शिक्षा के साथ-साथ आधुनिक (सांसारिक/वैज्ञानिक) शिक्षा को अपनाने पर विशेष जोर दिया गया। मौलाना सैयद अजहर मदनी ने कहा कि वक्त की जरूरत को समझते हुए बच्चों को उच्च व आधुनिक शिक्षा से जोड़ना अनिवार्य है।
व्यापार में ईमानदारी और सच्चाई: व्यापार में ईमानदारी और सच्चाई को अपनाने का प्रस्ताव पास किया गया। मौलाना सैयद अजहर मदनी ने कुरान का हवाला देते हुए कहा कि ईमानदारी सबसे बड़ी नेकी है। ग्राहक व्यापारी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है, यदि हम अपने कार्य में बेईमानी करेंगे तो कभी तरक्की नहीं कर सकते।
-जमीयत उलमा मुत्तहिदा को मजबूती : संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने और समाज के हर वर्ग तक इसके कल्याणकारी संदेश को पहुंचाने का संकल्प लिया गया।
चार राज्यों के प्रतिनिधि हुए शामिल
जमीयत उलेमा यूपी के अध्यक्ष हजरत मौलाना सैयद अशहद रशीदी और राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी के बेटे मौलाना सैयद अजहर मदनी शामिल हुए। मुत्तहिदा पंजाब के पूर्व अध्यक्ष सरपरस्ती हजरत मौलाना हारून और पंजाब व हिमाचल प्रदेश के अध्यक्ष हजरत मौलाना हकीमुद्दीन अशरफ ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। कार्यक्रम का संचालन संगठन के महासचिव हजरत कारी इलियास ने किया। ब्यूरो

जमीयत उलेमा हिंद के सम्मेलन को संबोधित करते मौलाना सैयद अरशद मदनी। संवाद