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रिव्यू टीम अंदर, तीमारदार बाहर
अमर उजाला, पानीपत
Updated Tue, 15 Oct 2013 12:20 AM IST
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पानीपत में एनआरएचएम की 20 टीमों ने जिले के सभी सब सेंटर से लेकर जिला अस्पताल तक की स्वास्थ्य सेवाओं और व्यवस्थाओं को एक साथ जांचा।
टीम पूरा दिन जांच में लगी रही और यहां पर मरीजों की देखभाल कर रहे तीमारदार मिलने के लिए तरसते रहे। इसे लेकर तीमारदारों और मरीजों में काफी रोष रहा। किसी ने उनकी एक नहीं सुनी। डॉक्टर अपने कामों में लगे रहे।
एनआरएचएम की 40 सदस्यों की 20 टीम सोमवार को स्वास्थ्य सेवाओं की जांच को पहुंची। टीमों ने सब सेंटर, हेल्थ सेंटर, सीएचसी से लेकर अर्बन हेल्थ सेंटर और अस्पताल में पहुंचकर मरीजों को दी जाने वाली सुविधाओं के साथ व्यवस्थाओं को जांचा।
मेटरनल हेल्थ डॉ. अल्का, सपोर्टी सुपरविजन डॉ. विनोद और मदर एंड चाइल्ड और कंप्यूटर से संबंधित जांच की देखरेख डॉ. कश्मीर और डॉ. हरीश विष्ट ने की। टीम सुबह आठ बजे अलग-अलग केंद्रों पर पहुंच गई और पूरा दिन मामले की जांच करते रहे।
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किसी को नहीं आने दिया अंदर
सिविल अस्पताल में सुबह महिला वार्ड में टीम पहुंच गई। टीम के अंदर आते ही दरवाजा बंद कर लिया। टीम ने पहले व्यवस्थाओं को जांचा। लेकिन वहां पर मरीजों के लिए संतोषजनक व्यवस्था नहीं मिली। इसके बाद स्टाफ की जानकारी की। जिसको लेकर स्टाफ की दिनभर सांसें फूली रही। वहीं, गेट बंद होने पर तीमारदार बाहर और मरीज अंदर चिल्लातेे रहे। लेकिन उनकी सुनने वाला कोई नहीं मिला।
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टीम पूरा दिन जांच में लगी रही और यहां पर मरीजों की देखभाल कर रहे तीमारदार मिलने के लिए तरसते रहे। इसे लेकर तीमारदारों और मरीजों में काफी रोष रहा। किसी ने उनकी एक नहीं सुनी। डॉक्टर अपने कामों में लगे रहे।
एनआरएचएम की 40 सदस्यों की 20 टीम सोमवार को स्वास्थ्य सेवाओं की जांच को पहुंची। टीमों ने सब सेंटर, हेल्थ सेंटर, सीएचसी से लेकर अर्बन हेल्थ सेंटर और अस्पताल में पहुंचकर मरीजों को दी जाने वाली सुविधाओं के साथ व्यवस्थाओं को जांचा।
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मेटरनल हेल्थ डॉ. अल्का, सपोर्टी सुपरविजन डॉ. विनोद और मदर एंड चाइल्ड और कंप्यूटर से संबंधित जांच की देखरेख डॉ. कश्मीर और डॉ. हरीश विष्ट ने की। टीम सुबह आठ बजे अलग-अलग केंद्रों पर पहुंच गई और पूरा दिन मामले की जांच करते रहे।
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किसी को नहीं आने दिया अंदर
सिविल अस्पताल में सुबह महिला वार्ड में टीम पहुंच गई। टीम के अंदर आते ही दरवाजा बंद कर लिया। टीम ने पहले व्यवस्थाओं को जांचा। लेकिन वहां पर मरीजों के लिए संतोषजनक व्यवस्था नहीं मिली। इसके बाद स्टाफ की जानकारी की। जिसको लेकर स्टाफ की दिनभर सांसें फूली रही। वहीं, गेट बंद होने पर तीमारदार बाहर और मरीज अंदर चिल्लातेे रहे। लेकिन उनकी सुनने वाला कोई नहीं मिला।