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बीते पांच वर्ष में पानीपत को 40 डॉक्टर मिले लेकिन सिर्फ 12 ही टिके

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 21 Feb 2022 02:07 AM IST
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In the last five years, Panipat got 40 doctors but only 12 survived.
बीते पांच वर्ष में पानीपत को 40 डॉक्टर मिले लेकिन इनमें से महज 12 ही यहां टिक सके। बाकी में से 12 डॉक्टरों ने तो ज्वाइन ही नहीं किया जबकि 16 डॉक्टर ज्वाइन करने के बाद बगैर वेतन के छुट्टी पर चले गए। स्वास्थ्य विभाग संसाधन तो बढ़ा रहा है लेकिन डॉक्टर नहीं जुटा पा रहा। इसका बड़ा कारण पीजी के दाखिले में सरकारी डॉक्टरों का कोटा खत्म होना माना जा रहा है।
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पानीपत के 24 स्वास्थ्य केंद्रों में 140 डॉक्टरों के स्वीकृत पद हैं। इनमें से 56 पद खाली पड़े हैं। जिले में महज 84 डॉक्टर ही काम कर रहे हैं। पिछले चार वर्ष से जिले में फिजिशियन नहीं है। प्रदेश की बात करें तो बीते पांच वर्ष में सरकार ने चार बार डॉक्टरों की भर्ती निकाली है। 980 मेडिकल ऑफिसर की भर्ती अभी भी चल रही है। 1050 पदों की भर्ती में से 350 डॉक्टरों ने चुने जाने के बावजूद सरकारी अस्पताल ज्वाइन नहीं किया। इन्हें कई बार नोटिस भी जारी किए गए लेकिन कोई असर नहीं पड़ा। डॉक्टरों ने सरकारी नौकरी से दूरी बना ली। बाद में इन्हें निलंबित कर दिया गया।
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सिविल अस्पताल में होने चाहिए 85 डॉक्टर
जिले के 24 स्वास्थ्य केंद्रों पर कुल डॉक्टरों के 140 पद स्वीकृत हैं। इनमें से 84 भरे और 56 चिकित्सकों की नियुक्ति का इंतजार है। अब 200 बेड के सिविल अस्पताल में 55 पद स्वीकृत हैं जबकि 85 से अधिक पद होने चाहिए। फिलहाल के लिए स्वीकृत पदों में से भी 17 रिक्त चल रहे हैं। प्रशासनिक ड्यूटी, दूसरे स्थानों पर ड्यूटी, मेटरनिटी लीव, चाइल्ड केयर लीव सहित तमाम तरह के अवकाश के कारण अस्पताल में एक समय में मात्र 14-15 चिकित्सक ही होते हैं। सीएचसी-पीएचसी, शहरी स्वास्थ्य केंद्रों, सब सेंटर पर 85 चिकित्सकों के पद हैं, जिनमें से 39 पद रिक्त हैं।
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जिले में महज दो-दो बाल रोग व एक ईएनटी
जिले के 24 स्वास्थ्य केंद्रों में महज दो आई सर्जन और दो बाल रोग विशेषज्ञ हैं। 14 लाख की आबादी वाले पानीपत में कान, नाक गले का एक ही डॉक्टर है। ये भी सिविल अस्पताल में कार्यरत है। किसी भी स्वास्थ्य केंद्र पर आई सर्जन, बाल रोग विशेषज्ञ व ईएनटी नहीं है। जिले के दूर दराज के रोगियों को इलाज के लिए सिविल अस्पताल में ही आना पड़ता है।
सब सेंटर पर डॉक्टरों को पानी तक पिलाने वाला नहीं
जिले के सब सेंटरों की स्थिति बेहद खराब है। जिले में कई पीएचसी तो ऐसी हैं जहां डॉक्टरों को पानी पिलाने वाला कोई नहीं है। डॉक्टरों को खुद ही जाकर सब सेंटर के ताले खोलने एवं बंद करने पड़ते हैं। क्लर्क का काम भी खुद ही करना पड़ता है।

स्वास्थ्य केंद्र - स्वीकृत पद - रिक्त पद
सिविल अस्पताल 55 17
समालखा अस्पताल 11 06
पीएचसी पट्टी कल्याणा 02 00
पीएचसी आट्टा 02 00
सीएचसी नारायणा 07 05
सीएचसी अहर 03 02
पीएचसी सींक 02 01
पीएचसी रेरकलां 02 00
सीएचसी नौल्था 07 04
पीएचसी मांडी 02 01
पीएचसी इसराना 02 00
सीएचसी मतलौडा- 07 05
पीएचसी कवी 02 01
सीएचसी बापौली- 06 04
पीएचसी उझा 02 00
पीएचसी उग्राखेड़ी 02 00
पीएचसी सिवाह 02 00
सीएचसी खोतपुरा 07 03
पीएचसी चुलकाना 02 00
पीएचसी काबड़ी 02 00
पीएचसी बराना 02 02
सीएचसी ददलाना 07 03
यूएचसी सेक्टर-11-12 02 01
यूएचसी सेक्टर-25 02 01
सरकार समय-समय पर डॉक्टरों की भर्तियां करती है : सिविल सर्जन
सरकार तो समय-समय पर डॉक्टरों की भर्तियां करती है। अब सरकारी नौकरी करना या न करना तो डॉक्टरों के हाथ में है। सरकार अपनी ओर से डॉक्टरों की कमी पूरा करने का प्रयास करती है।
- डॉ. जितेंद्र कादियान, सिविल सर्जन
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