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Panipat News: छह वर्ग की जांच में 60.17 फीसदी लोग एनीमिया से ग्रसित मिले

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 20 Sep 2024 07:10 AM IST
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In the investigation of six groups, 60.17 percent people were found suffering from anemia.
कुरुक्षेत्र। जिले में एनीमिया मुक्त भारत के लिए चले अभियान के तहत 60.17 फीसदी लोगों में रक्त की कमी पाई गई। इस 100 दिन के अभियान में स्वास्थ्य विभाग ने कुल एक लाख चार हजार 619 लोगों के रक्त सैंपल लेकर हीमोग्लोबिन को जांचा, जिसमें कुल 62 हजार 955 लोग एनीमिया से ग्रसित पाए गए। विदित रहे कि इस अभियान में छह से 59 माह, पांच से 10 साल, 10 से 19 साल, गर्भवती, स्तनपान कराने वालीं समेत डब्ल्यूआरए (20 से 49 साल की महिलाएं) छह वर्ग के लोगों को शामिल किया गया था। इस छह वर्ग के अलावा 131 फ्रंट लाइन कर्मियों में भी एनीमिया को जांचा गया। विभाग के ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड डेटा के मुताबिक 41,640 यानी 38.83 फीसदी लोगों में रक्त की कमी नहीं पाई गई।
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उधर, रिपोर्ट के मुताबिक अधिकतर लोगों में मॉडरेट यानी दूसरे स्तर का एनीमिया पाया गया। 19 फीसदी यानी 19,956 लोग पहले स्तर यानी मिल्ड (सात से 11 ग्राम रक्त) से ग्रसित मिले। दूसरे स्तर (सात से नौ ग्राम) में सबसे अधिकतर 40,773 यानी 38.97 लोग मॉडरेट में दर्ज किए गए। इसके अलावा 2.21 फीसदी यानी 2,226 लोग गंभीर स्तर यानी सीवियर एनीमिया का शिकार मिले। विभाग की ओर से एनीमिया से ग्रसित लोगों को तुरंत उपचार दिया गया।
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इन छह वर्ग की जांच में सबसे अधिक युवाओं में रक्त की जांच की गई। इस जांच में 10 से 19 साल के कुल 26,401 युवाओं को शामिल किया गया। दूसरी सूची में डब्ल्यूआरए वर्ग की महिलाएं शामिल हैं, जिसमें कुल 22,350 महिलाओं की जांच की गई। छह से 59 माह वर्ग में कुल 12,986, पांच से नौ साल में 16,339, गर्भवती 4,310, स्तनपान कराने वालीं 1,594 और अन्य में 20,504 लोगों की जांच की गई।
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41,679 को दिया गया उपचार
डॉ. प्रदीप नागर ने बताया कि विभाग की ओर एनीमिया से ग्रसित कुल 41,679 लोगों में उपचार दिया गया। उनको आयरन की गोलियां व सुक्रोज डोज दी गई। इसके अलावा 3,455 लोग गंभीर एनीमिया से ग्रसित थे। उनको तुरंत एलएनजेपी अस्पताल रेफर करके उपचार किया गया।



तुरंत दिया गया रोगी को उपचार : डॉ. मनीषा सिंह
कार्यक्रम की जिला नोडल अधिकारी डॉ. मनीषा सिंह ने बताया कि एनीमिया मुक्त भारत अभियान का समापन हो गया है। जांच, इलाज व जागरूकता से एनीमिया से निपटा गया। उसके बाद एनीमिया से ग्रसित लोगों पर निगरानी भी रखी गई। रक्त की कमी को पूरा करने के लिए उपचार के साथ उनको पौष्टिक आहार लेने के लिए जागरूक किया। मिल्ड और मॉडरेट एनीमिया से ग्रसित लोगों को आयरन की दवा व डोज देकर उपचार किया गया, जबकि रेफर व सीवियर रोगी को जरूरत के अनुसार रक्त भी चढ़ाया गया।
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