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एक साल में 1874 गठिया रोगी इलाज कराने पहुंचे

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 12 Oct 2022 02:36 AM IST
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In one year, 1874 arthritis patients arrived for treatment.
पानीपत। विश्व गठिया दिवस पर फिजियोथैरेपिस्ट डॉ. नेहा बंसल ने लोगों को गठिया रोग के बारे में जागरूक किया। उन्होंने गठिया रोग की बारीकी से जानकारी दी। डॉ. नेहा ने बताया कि यह सामान्यत: तीन प्रकार का जैसे आस्टियो आर्थराइटिस, रुमेटाइड आर्थराइटिस और गाउट होता है।
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सिविल अस्पताल के प्रथम तल पर बनी फिजियोथैरेपी यूनिट में एक साल के अंतराल में 1872 मरीज इलाज कराने पहुंचे। मरीजों को खानपान में बदलाव और व्यायाम की सीख दी गई। यूनिट की फिजियोथेरेपिस्ट नेहा बंसल ने बताया कि आस्टियो आर्थराइटिस के ज्यादा मामले सामने आते हैं। बढ़ती उम्र के लोगों को होता है। उंगलियां, कूल्हे और घुटने सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं। जोड़ों में चोट लगने से आस्टियो आर्थराइटिस हो सकता है। रुमेटाइड आर्थराइटिस यानी, बीमारियों से बचाने वाला रोग प्रतिरोधी तंत्र ही शरीर को नुकसान पहुंचाने लगता है। गाउट जोड़ों में चर्बी जमने के कारण होता है। पैरों की उंगलियों को भी प्रभावित करता है। गठिया अनुवांशिक और जीवनशैली से जुड़ी बीमारी है। शुरुआत में इलाज नहीं मिला तो हड्डियां कमजोर हो जाती हैं। जोड़ों में दर्द बढ़ जाता है। शरीर में कैल्शियम की कमी के कारण गठिया की समस्या होती है। फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. नेहा के मुताबिक कालांतर में यह समस्या 60-70 वर्ष की आयु में होती थी।
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