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मिर्गी को खत्म करना है तो होना होगा जागरूक : डॉ़ मोना
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डाॅ. मोना नागपाल।
स्वीटी सांगवान
पानीपत। मिर्गी का मर्ज लोगों में दर्द बढ़ा रही है। इससे बड़े बुजुर्गों के साथ युवा और बच्चे भी ग्रस्त हैं। अकेले जिला नागरिक अस्पताल में हर रोज मिर्गी की बीमारी को लेकर 15-20 मरीज ओपीडी में पहुंच रहे हैं। इसमें एक बड़ा कारण मोबाइल का लंबे समय तक चलाना भी है। इसको लेकर लोगों में जागरूकता भी आई है। पहले लोग इसे भूत-प्रेत का मामला समझकर झाड़-फूंक कराते थे। अब इसका इलाज कराने में भरोसा रखे हैं।
17 नवंबर को राष्ट्रीय मिर्गी दिवस मनाया जाता है। इस बीमारी को खत्म करने के लिए जागरूकता भी जरूरी है। मिर्गी हमारे नर्वस सिस्टम को प्रभावित करती है। जिससे दौरे पड़ते हैं। मिर्गी दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य लोगों को मिर्गी के बारे में जागरूक करना है और फैली अफवाहों से बचाना है। इसके लिए सरकारी और निजी संगठन कार्यक्रम और जागरूकता अभियान चलाते हैं।
जिला नागरिक अस्पताल में मनोचिकित्सक डाॅ. मोना नागपाल ने बताया कि मिर्गी की बीमारी दिमाग में कीड़ा या दिमागी हालत ठीक न होने के कारण अधिक होती है। वहीं कैंसर और दुर्घटना में सिर पर चोट लगने के कारण भी मिर्गी आती है। मिर्गी का दौरा पड़ने के दौरान मांसपेशियां सख्त हो जाती हैं। हाथ-पैर पर काबू नहीं रहता है। उन्होंने बताया कि लोगों को किसी भी झाड़ फूंक के रास्ते को नहीं अपनाना चाहिए। उनको चिकित्सक के पास इसका इलाज कराना चाहिए। डाॅ. मोना के अनुसार हर उम्र के लोग इस बीमारी के शिकार हो रहे हैं। ओपीडी में प्रतिदिन मिर्गी के 15-20 मरीजों का इलाज किया जाता है। मिर्गी के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इससे बचने के लिए स्वयं के साथ दूसरों को भी जागरूक करना चाहिए।
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मिर्गी से बचाव के उपाय
मिर्गी के मरीज को समय पर दवा लेनी चाहिए।
व्यक्ति को पर्याप्त नींद लेनी चाहिए। कई बार नींद पूरी न होने पर मिर्गी के दौरे आने लगते हैं।
रात के समय मोबाइल के प्रयोग से बचना चाहिए
शादियों व समारोह में रंग बिरंगी तेज लाइटों के संपर्क में आने से बचना चाहिए
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पानीपत। मिर्गी का मर्ज लोगों में दर्द बढ़ा रही है। इससे बड़े बुजुर्गों के साथ युवा और बच्चे भी ग्रस्त हैं। अकेले जिला नागरिक अस्पताल में हर रोज मिर्गी की बीमारी को लेकर 15-20 मरीज ओपीडी में पहुंच रहे हैं। इसमें एक बड़ा कारण मोबाइल का लंबे समय तक चलाना भी है। इसको लेकर लोगों में जागरूकता भी आई है। पहले लोग इसे भूत-प्रेत का मामला समझकर झाड़-फूंक कराते थे। अब इसका इलाज कराने में भरोसा रखे हैं।
17 नवंबर को राष्ट्रीय मिर्गी दिवस मनाया जाता है। इस बीमारी को खत्म करने के लिए जागरूकता भी जरूरी है। मिर्गी हमारे नर्वस सिस्टम को प्रभावित करती है। जिससे दौरे पड़ते हैं। मिर्गी दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य लोगों को मिर्गी के बारे में जागरूक करना है और फैली अफवाहों से बचाना है। इसके लिए सरकारी और निजी संगठन कार्यक्रम और जागरूकता अभियान चलाते हैं।
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जिला नागरिक अस्पताल में मनोचिकित्सक डाॅ. मोना नागपाल ने बताया कि मिर्गी की बीमारी दिमाग में कीड़ा या दिमागी हालत ठीक न होने के कारण अधिक होती है। वहीं कैंसर और दुर्घटना में सिर पर चोट लगने के कारण भी मिर्गी आती है। मिर्गी का दौरा पड़ने के दौरान मांसपेशियां सख्त हो जाती हैं। हाथ-पैर पर काबू नहीं रहता है। उन्होंने बताया कि लोगों को किसी भी झाड़ फूंक के रास्ते को नहीं अपनाना चाहिए। उनको चिकित्सक के पास इसका इलाज कराना चाहिए। डाॅ. मोना के अनुसार हर उम्र के लोग इस बीमारी के शिकार हो रहे हैं। ओपीडी में प्रतिदिन मिर्गी के 15-20 मरीजों का इलाज किया जाता है। मिर्गी के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इससे बचने के लिए स्वयं के साथ दूसरों को भी जागरूक करना चाहिए।
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मिर्गी से बचाव के उपाय
मिर्गी के मरीज को समय पर दवा लेनी चाहिए।
व्यक्ति को पर्याप्त नींद लेनी चाहिए। कई बार नींद पूरी न होने पर मिर्गी के दौरे आने लगते हैं।
रात के समय मोबाइल के प्रयोग से बचना चाहिए
शादियों व समारोह में रंग बिरंगी तेज लाइटों के संपर्क में आने से बचना चाहिए