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हम सब एक हैं तो सुरक्षित : आर्षमति
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पानीपत। जैन मोहल्ला स्थित श्री 1008 महावीर स्वामी दिगंबर जिनालय (छोटा मंदिर) का नवीनीकरण पांच दिवसीय महोत्सव का समापन का बुधवार को हो गया। यह आयोजन गणिनी आर्यिका 105 आर्षमति माता ससंघ के सानिध्य में मनाया गया। बुधवार सुबह की विधि विस्थापन की प्रक्रिया प्रतिष्ठाचार्य डाॅ. अभिषेक जैन दमोह के निर्देशन में शुरू हुई।
जैन समाज ने एकजुट होकर 200 वर्ष प्राचीन मंदिर नवीनीकरण के लिए संकल्प लिया कि सब मंदिर के निर्माण में सहयोगी बनेंगे। स्वामी की मूर्ति को मस्तक पर धारण कर छोटे मंदिर से बड़े मंदिर स्थित अस्थायी विधि पर विराजमान करने और प्रथम अभिषेक करने का सौभाग्य सुरेश जैन श्रीपाल जैन परिवार को प्राप्त हुआ।
माता ने कहा कि आज समाज को युवा पीढ़ी की सबसे ज्यादा आवश्यकता है। हमारे युवा अब मंदिरों में नजर नहीं आते हैं। हमारा सबसे पहला काम है कि हमें युवाओं को मंदिर से जोड़ना है और समाज की मुख्य धारा के अंदर लेकर आना है। हम सब एक हैं तो सेफ हैं और सैफ हैं तो नेक हैं।
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इस सूत्र को अंगीकार करना चाहिए। साथ रहेंगे तो परिवार, समाज और धर्म की रक्षा कर पाएंगे। दिगंबर जैन पंचायत द्वारा मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए अधिकतम सात वर्ष की समय सीमा तय की गई है परंतु पंचायत शीघ्र मंदिर का निर्माण करेगी।
मुनि दीक्षा लेने के छह माह तक तप करने के बाद जब ऋषभदेव आहार लेने के लिए लोगों के कल्याण के लिए उठे तो लोगों को आहार विधि का ज्ञान न होने के कारण अगले छह माह तक भी ऋषभदेव को उपवास ही रखना पड़ा ।
तत्पश्चात हस्तिनापुर में राजा सोम जिनको आहार विधि का ज्ञान था उन्होंने नवधा भक्ति पूर्वक ऋषभदेव भगवान का पड़ गाहन किया और उन्हें अक्षय तृतीया के ही दिन गन्ने के रस से पारणा कराया। तभी से अक्षय तृतीया का त्योहार दान दिवस के रूप में मनाया जाने लगा। संवाद
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जैन समाज ने एकजुट होकर 200 वर्ष प्राचीन मंदिर नवीनीकरण के लिए संकल्प लिया कि सब मंदिर के निर्माण में सहयोगी बनेंगे। स्वामी की मूर्ति को मस्तक पर धारण कर छोटे मंदिर से बड़े मंदिर स्थित अस्थायी विधि पर विराजमान करने और प्रथम अभिषेक करने का सौभाग्य सुरेश जैन श्रीपाल जैन परिवार को प्राप्त हुआ।
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माता ने कहा कि आज समाज को युवा पीढ़ी की सबसे ज्यादा आवश्यकता है। हमारे युवा अब मंदिरों में नजर नहीं आते हैं। हमारा सबसे पहला काम है कि हमें युवाओं को मंदिर से जोड़ना है और समाज की मुख्य धारा के अंदर लेकर आना है। हम सब एक हैं तो सेफ हैं और सैफ हैं तो नेक हैं।
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इस सूत्र को अंगीकार करना चाहिए। साथ रहेंगे तो परिवार, समाज और धर्म की रक्षा कर पाएंगे। दिगंबर जैन पंचायत द्वारा मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए अधिकतम सात वर्ष की समय सीमा तय की गई है परंतु पंचायत शीघ्र मंदिर का निर्माण करेगी।
मुनि दीक्षा लेने के छह माह तक तप करने के बाद जब ऋषभदेव आहार लेने के लिए लोगों के कल्याण के लिए उठे तो लोगों को आहार विधि का ज्ञान न होने के कारण अगले छह माह तक भी ऋषभदेव को उपवास ही रखना पड़ा ।
तत्पश्चात हस्तिनापुर में राजा सोम जिनको आहार विधि का ज्ञान था उन्होंने नवधा भक्ति पूर्वक ऋषभदेव भगवान का पड़ गाहन किया और उन्हें अक्षय तृतीया के ही दिन गन्ने के रस से पारणा कराया। तभी से अक्षय तृतीया का त्योहार दान दिवस के रूप में मनाया जाने लगा। संवाद