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Panipat News: बिना ट्रीटमेंट पानी छोड़ा तो सात दिन में बंद होंगे उद्योग
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माई सिटी रिपोर्टरपानीपत। नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत यमुना में प्रदूषण रोकने के लिए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने सख्ती बढ़ा दी है। बिना उपचारित पानी या अपशिष्ट नदी में छोड़ने और निरीक्षण टीम को रोकने वाली औद्योगिक इकाइयों इकाइयों को सात दिन के भीतर बंद करने और पर्यावरणीय मुआवजा लगाने के निर्देश हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एचएसपीसीबी) को दिए गए हैं।
सीपीसीबी ने वर्ष 2026 के वार्षिक निरीक्षण अभियान के तहत 26 प्रमुख तकनीकी संस्थानों को भी औचक जांच के लिए अधिकृत किया है। पानीपत में करीब 37 हजार छोटी-बड़ी औद्योगिक इकाइयां हैं। जिले से यमुना गुजरने के कारण औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले अपशिष्ट के नदी तक पहुंचने का खतरा बना रहता है। इसे देखते हुए सीपीसीबी ने प्रदूषणकारी उद्योगों पर निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।
आईआईटी-एनआईटी के विशेषज्ञ करेंगे जांच : सीपीसीबी ने जून से दिसंबर 2026 के बीच उद्योगों के औचक निरीक्षण के लिए देश के 26 प्रमुख तकनीकी संस्थानों को अधिकृत किया है। इनमें आईआईटी दिल्ली, आईआईटी रुड़की, एनआईटी कुरुक्षेत्र, जामिया मिल्लिया इस्लामिया, गुरु
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जम्भेश्वर विश्वविद्यालय हिसार और आईसीएआर-एनडीआरआई करनाल सहित अन्य संस्थान शामिल हैं। विशेषज्ञों की टीमें राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों के साथ औद्योगिक इकाइयों का निरीक्षण करेंगी।
औद्योगिक इकाइयों का समय-समय पर निरीक्षण किया जाता है। अब सीपीसीबी ने 26 प्रमुख तकनीकी संस्थानों को निरीक्षण के लिए अधिकृत किया है। यमुना को किसी भी सूरत में प्रदूषित नहीं होने दिया जाएगा।
-भूपेंद्र चहल, आरओ, हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
सीपीसीबी के प्रमुख निर्देश
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निरीक्षण टीम को रोका तो होगी कार्रवाई : यदि कोई उद्योग निरीक्षण टीम को प्रवेश देने से रोकता है या बाईपास के जरिये बिना उपचारित अपशिष्ट बहाता पाया जाता है तो राज्य बोर्ड को एक सप्ताह के भीतर इकाई बंद कर पर्यावरणीय मुआवजा लगाने के निर्देश दिए गए हैं।
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निरीक्षण रिपोर्ट पर 15 दिन में कार्रवाई जरूरी : निरीक्षण रिपोर्ट मिलने के बाद 15 दिन के भीतर दोषी इकाइयों के खिलाफ कार्रवाई कर इसकी रिपोर्ट सीपीसीबी के ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड करनी होगी।
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बिजली कनेक्शन काट दिया जाएगा : बंद की जाने वाली इकाइयों के आदेश जिला मजिस्ट्रेट और बिजली निगम को भेजे जाएंगे, ताकि संबंधित इकाई का बिजली कनेक्शन काटा जा सके और बंदी का भौतिक सत्यापन किया जा सके।
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30 दिन में दोबारा निरीक्षण : उल्लंघन करने वाली इकाइयों को कारण बताओ नोटिस जारी करने के 30 दिन के भीतर दोबारा निरीक्षण किया जाएगा। सुधार नहीं मिलने पर इकाई को पूरी तरह बंद करने की कार्रवाई की जाएगी।
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सीपीसीबी ने वर्ष 2026 के वार्षिक निरीक्षण अभियान के तहत 26 प्रमुख तकनीकी संस्थानों को भी औचक जांच के लिए अधिकृत किया है। पानीपत में करीब 37 हजार छोटी-बड़ी औद्योगिक इकाइयां हैं। जिले से यमुना गुजरने के कारण औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले अपशिष्ट के नदी तक पहुंचने का खतरा बना रहता है। इसे देखते हुए सीपीसीबी ने प्रदूषणकारी उद्योगों पर निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।
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आईआईटी-एनआईटी के विशेषज्ञ करेंगे जांच : सीपीसीबी ने जून से दिसंबर 2026 के बीच उद्योगों के औचक निरीक्षण के लिए देश के 26 प्रमुख तकनीकी संस्थानों को अधिकृत किया है। इनमें आईआईटी दिल्ली, आईआईटी रुड़की, एनआईटी कुरुक्षेत्र, जामिया मिल्लिया इस्लामिया, गुरु
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जम्भेश्वर विश्वविद्यालय हिसार और आईसीएआर-एनडीआरआई करनाल सहित अन्य संस्थान शामिल हैं। विशेषज्ञों की टीमें राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों के साथ औद्योगिक इकाइयों का निरीक्षण करेंगी।
औद्योगिक इकाइयों का समय-समय पर निरीक्षण किया जाता है। अब सीपीसीबी ने 26 प्रमुख तकनीकी संस्थानों को निरीक्षण के लिए अधिकृत किया है। यमुना को किसी भी सूरत में प्रदूषित नहीं होने दिया जाएगा।
-भूपेंद्र चहल, आरओ, हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
सीपीसीबी के प्रमुख निर्देश
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निरीक्षण टीम को रोका तो होगी कार्रवाई : यदि कोई उद्योग निरीक्षण टीम को प्रवेश देने से रोकता है या बाईपास के जरिये बिना उपचारित अपशिष्ट बहाता पाया जाता है तो राज्य बोर्ड को एक सप्ताह के भीतर इकाई बंद कर पर्यावरणीय मुआवजा लगाने के निर्देश दिए गए हैं।
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निरीक्षण रिपोर्ट पर 15 दिन में कार्रवाई जरूरी : निरीक्षण रिपोर्ट मिलने के बाद 15 दिन के भीतर दोषी इकाइयों के खिलाफ कार्रवाई कर इसकी रिपोर्ट सीपीसीबी के ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड करनी होगी।
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बिजली कनेक्शन काट दिया जाएगा : बंद की जाने वाली इकाइयों के आदेश जिला मजिस्ट्रेट और बिजली निगम को भेजे जाएंगे, ताकि संबंधित इकाई का बिजली कनेक्शन काटा जा सके और बंदी का भौतिक सत्यापन किया जा सके।
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30 दिन में दोबारा निरीक्षण : उल्लंघन करने वाली इकाइयों को कारण बताओ नोटिस जारी करने के 30 दिन के भीतर दोबारा निरीक्षण किया जाएगा। सुधार नहीं मिलने पर इकाई को पूरी तरह बंद करने की कार्रवाई की जाएगी।