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विनम्रता न हो तो धन रुकता नहीं बह जाता है : अरुण मुनि

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 03 Aug 2025 02:35 AM IST
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If there is no humility then money does not stay but flows away: Arun Muni
अग्रवाल मंडी में प्रवचन सुनते श्रावक। स्रोत : संगठन 
अग्रवाल मंडी स्थित जैन स्थानक में शनिवार को आयोजित हुआ कार्यक्रम
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संवाद न्यूज एजेंसी
पानीपत। अग्रवाल मंडी स्थित जैन स्थानक में शनिवार को धार्मिक प्रवचन हुआ। अरुण मुनि महाराज ने प्रतिक्रमण विषय पर प्रवचन किए। उन्होंने बताया कि प्रतिक्रमण आत्मा की स्वच्छता का विज्ञान है। प्रतिक्रमण केवल धार्मिक विधि नहीं बल्कि एक वैज्ञानिक और आत्म-शुद्धिकरण प्रक्रिया है। अरिहंत परमात्मा की साधना हृदय को प्रकाशित करती है यही प्रतिक्रमण है। यह आत्मा को उसकी मूल स्थिति में लाने की साधना है। पुराने कर्मों की समीक्षा, दोषों की स्वीकृति, और निन्दामि की भावना यही प्रतिक्रमण का सार है।
मैं प्रभु से मिलना चाहता हूं... प्रवचन में आत्मा की पीड़ा को स्वर देते हुए मुनि ने कहा कि प्रभु मैं आपसे जुड़ना चाहता हूं, आपकी शरण चाहता हूं क्योंकि संसार की शरण में मुझे कभी सच्चा सुख नहीं मिला। मैं तो प्रतिदिन आता हूं पर आज का मनुष्य सुन ही नहीं पाता। चिंतन के तीन स्वरूप जीवन की दिशा तय करते हैं। उत्तम चिंतन वह जो आत्मा और साधना की ओर ले जाए। मध्य चिंतन वह जो इंद्रिय विषयों और भौतिकता की ओर आकर्षित करे। अधम चिंतन वह जो लोभ, स्वार्थ, धन लिप्सा से ग्रसित करे। जो सुबह उठते ही पैसा-पैसा पुकारता है, पर भूखे को रोटी नहीं देता, मुनियों को कभी आहार नहीं देता, गुरु-दर्शन नहीं करता वह कभी स्थानक नहीं आता वह अधम चिंतन में है। पैसे के साथ विनम्रता और सादगी न हो तो वह धन रुकता नहीं बह जाता है।
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जीवन की घड़ियां व्यर्थ न जाएं
केवल पूजा-पाठ, माला-जप पर्याप्त नहीं। आत्मा में रमण, आत्मा की खोज और दोषों का त्याग ही सच्चा धर्म है। प्रवचन के समापन पर मुनि ने श्रावकों से आत्मा की ओर मुड़ने का आह्वान किया और कहा कि यदि किसी को 24 घंटे में केवल पांच मिनट भी आत्मा में रमण मिल जाए तो समझो वह परम भाग्यशाली है। जीवन की घड़ियां व्यर्थ न जाएं, वीर को भजो, महावीर को साथी बनाओ। आयोजन अरुण मुनि महाराज के ऐतिहासिक चातुर्मासिक प्रवास के अंतर्गत संपन्न हुआ। प्रवचन के समापन पर श्रावकों ने गुरु वंदना के माध्यम से अपनी भक्ति समर्पित की। वहीं राजाखेड़ी गांव स्थित जैन स्थानक में श्रेयांश मुनि महाराज ने प्रवचन किए।
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