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देश संभलकर नहीं चलाया गया तो कई टुकड़े हो जाएंगे: शंकराचार्य

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 30 Sep 2022 02:48 AM IST
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If the country is not run carefully, it will break into many pieces: Shankaracharya
पानीपत। गोवर्द्धन मठ जगन्नाथ पुरी के जगद्गुरु शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती ने कहा कि देश को संभलकर नहीं चलाया गया तो भारत के कई टुकड़े हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि देश का विभाजन नेताओं ने कराया, जिन्हें आज भी माना जाता है। उन नेताओं ने विभाजन के दौरान मुसलमान नेताओं को भारत में रोका और देश को कई टुकड़ों में बांटने का काम प्रशस्त कर दिया।
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शंकराचार्य एक धार्मिक कार्यक्रम में भाग लेने पानीपत पहुंचे थे। सेक्टर 12 में प्रेसवार्ता के दौरान उन्होंने हिंदू राष्ट्र, गोरक्षा, शिक्षा सहित विभिन्न विषयों पर अपने विचार खुलकर रखे। उन्होंने कहा कि स्वतंत्र भारत के विभिन्न प्रधानमंत्रियों ने देश का 14 बार विभाजन करने का प्रयास किया। ऐसे में आज संभलकर रहने की जरूरत है। शंकराचार्य ने कहा कि एक पूर्व प्रधानमंत्री ने अन्य पूर्व प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर कहा था कि खालिस्तान समेत देश में कई हिस्से हो सकते हैं।
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हिंदू राष्ट्र की बात पर शंकराचार्य ने कहा कि देश में हिंदुओं को दबाकर रखा गया है। विश्व के 204 देशों में से 54 देशों में हिंदू रहते हैं। अगर भारत खुद को हिंदू राष्ट्र घोषित कर दे तो दूसरे दिन ही 54 में से अन्य 15 देश भी ऐसा कर सकते हैं। उनके अनुसार हिंदू राष्ट्र की बात भारत से चली और आज पूरे विश्व में फैल गई है और वह तो पहले भी कह चुके हैं कि भारत हिंदू राष्ट्र घोषित होना चाहिए मगर अभी तक न तो आरएसएस से आवाज आई न ही सरकार से।
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शिक्षा पर शंकराचार्य ने कहा कि नीति चालीसा, नीति सावित्रि और नीति विधि ग्रंथों को लिखा गया है, जिसमें सृष्टि की रचना से लेकर मानव संरक्षण से संबंधित हर जानकारी बच्चों को मिल सके। इससे आधुनिक भारत में बालक, बालिकाओं को नीति ज्ञान दिया जा सके। भाजपा के समय पर मानव संसाधन मंत्री मुरली मनोहर जोशी ने पाठ्यक्रम शामिल करने के लिए भी तीन अलग ग्रंथों की रचना कराई थी। भाजपा सरकार जाने के बाद इन ग्रंथों को सांप्रदायिक बताते हुए हटा दिया गया था, जिसके बाद से अब तक विद्यार्थियों के पाठ्यक्रम में धार्मिक ग्रंथ नहीं आ पाए हैं।

शंकराचार्य ने गायों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि अगर किसी प्रजाति को विलुप्त करना हो तो उसकी उपयोगिता खत्म कर दीजिए। बैल गाड़ी का उपयोग पहले होता था। बैलों की उपयोगिता ट्रैक्टरों ने खत्म कर दी, जिसके बाद बैलों की प्रजाति लुप्त प्राय हो गई है। यही गायों के साथ हो रहा है। एक दिन ऐसा आएगा, जिस दिन महायंत्रों को नष्ट करना होगा। नहीं किया तो जल, वायु और सभी प्रजातियां लुप्त होती जाएंगी। उनके अनुसार भारत में ऐसे कई मंदिर हैं, जिसमें आरती और पूजा के लिए पैसे नहीं है। जिस मंदिरों की आमदनी होने लगती है, वहां पर राजनीति होने लगती है। उन्होंने लगातार बढ़ती जा रही गो हत्या जैसे मामलों पर भी चिंता व्यक्त की।
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