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Panipat News: मनोहर लाल के मोदी कैबिनेट में मंत्री बनने से औद्योगिक नगरी की बढ़ी उम्मीदें
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पानीपत। नरेंद्र मोदी की तीसरी बार सरकार में करनाल सांसद एवं पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल को कैबिनेट मंत्री बनाने पर औद्योगिक नगरी पानीपत की विकास कार्यों को लेकर उम्मीदें बढ़ गई हैं। उनको दो मंत्रालय मिले हैं। करनाल लोकसभा से 25 साल बाद केंद्र सरकार में कैबिनेट मंत्री पद मिला है। राजनीतिक जानकारों की भी माने तो मनोहर लाल की करनाल लोकसभा सीट पर जीत में सबसे बड़ा पानीपत का योगदान रहा है। उन्होंने चुनाव जीतने के बाद कार्यकर्ताओं से रूबरू होकर गर्मी में उनके लिए बहाए पसीने का कर्ज चुकाने का भरोसा भी दिया था।
पानीपत की पहचान हैंडलूम नगरी से है। यहां कंबल, बेडशीट, तकिया-सोफा कवर, पर्दे और तौलिये समेत तमाम उत्पाद बनते हैं। इन उत्पादों का घरेलू बाजार करीब 80 हजार करोड़ और निर्यात करीब 16 हजार करोड़ है। करीब 112 देशों में यहां का उत्पाद निर्यात होता है। इन सबके बीच पानीपत की इंडस्ट्री के सामने कई चुनौतियां आज भी खड़ी हैं।
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दिल्ली एनसीआर से बाहर करने की बड़ी मांग
उद्यमी पानीपत को दिल्ली एनसीआर से बाहर करने की मांग कर रहे हैं। पिछले लोकसभा और राज्यसभा सदन में सांसदों ने इस बात को प्रमुखता के साथ रखा था। उद्यमियों की मांग है कि सर्दी के मौसम में दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स कम होने पर ग्रैप के नियम पानीपत में भी लागू होते हैं। जबकि पानीपत का एयर क्वालिटी इंडेक्स दिल्ली से काफी बेहतर होता है। इससे उद्यमियों को कई शर्तों की पालना से छुटकारा मिल जाएगा।
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कॉमन बॉयलर लंबे समय से मांग
उद्योगों का अधिकतम काम डाई इंडस्ट्री पर निर्भर रहता है। सरकार ने 2001 में डाई हाउस के लिए अलग से सेक्टर भी दिया है। डाई हाउस संचालकों को अपने स्तर पर बॉयलर चलाने पड़ते हैं। इनको चलाना काफी महंगा पड़ता है। डाई उद्यमी लंबे समय से कॉमन बॉयलर की मांग कर रहे हैं। इसको लेकर कई बार सर्वे भी हो चुका है, लेकिन यह प्रोजेक्ट सिरे नहीं चढ़ पाया है।
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जेडएलडी प्रोजेक्ट से बड़ी उम्मीद
शहर में पानी की सबसे अधिक खपत है। अधिकतर खपत उद्योगों में होती है। उद्यमियों को इस पानी को बाहर छोड़ने से पहले पूरी तरह से शोधित करना होता है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड इसकी अनदेखी करने पर मोटा जुर्माना लगाता है। उद्यमियों को ईटीपी लगाना होता है। इसको चला पाना काफी महंगा होता है। उद्यमी इसको लेकर जेडएलडी प्रोजेक्ट की मांग कर रहे हैं। इसको लेकर सर्वे भी हो चुका है, लेकिन प्रोजेक्ट काफी महंगा होने पर सरकार इसको शुरू करने को आगे नहीं आ रही है।
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रेनीवेल प्रोजेक्ट से मिलना है शहर को पानी
शहर में भूजल तेजी के साथ घट रहा है। कई जगह ट्यूबवेल भी फेल हो रहे हैं। शहर में पेयजल सप्लाई को लेकर रेनीवेल प्रोजेक्ट बनाया गया है। यह करीब 800 करोड़ रुपये का है। इस प्रोजेक्ट के अंतर्गत यमुना की तलहटी में कुएं बनाकर यहां से शोधित पानी शहर में सप्लाई करने की योजना है। यह प्रोजेक्ट कई साल से अटका हुआ है। इसको अब तेजी मिलने की उम्मीद है।
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पानीपत की पहचान हैंडलूम नगरी से है। यहां कंबल, बेडशीट, तकिया-सोफा कवर, पर्दे और तौलिये समेत तमाम उत्पाद बनते हैं। इन उत्पादों का घरेलू बाजार करीब 80 हजार करोड़ और निर्यात करीब 16 हजार करोड़ है। करीब 112 देशों में यहां का उत्पाद निर्यात होता है। इन सबके बीच पानीपत की इंडस्ट्री के सामने कई चुनौतियां आज भी खड़ी हैं।
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दिल्ली एनसीआर से बाहर करने की बड़ी मांग
उद्यमी पानीपत को दिल्ली एनसीआर से बाहर करने की मांग कर रहे हैं। पिछले लोकसभा और राज्यसभा सदन में सांसदों ने इस बात को प्रमुखता के साथ रखा था। उद्यमियों की मांग है कि सर्दी के मौसम में दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स कम होने पर ग्रैप के नियम पानीपत में भी लागू होते हैं। जबकि पानीपत का एयर क्वालिटी इंडेक्स दिल्ली से काफी बेहतर होता है। इससे उद्यमियों को कई शर्तों की पालना से छुटकारा मिल जाएगा।
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कॉमन बॉयलर लंबे समय से मांग
उद्योगों का अधिकतम काम डाई इंडस्ट्री पर निर्भर रहता है। सरकार ने 2001 में डाई हाउस के लिए अलग से सेक्टर भी दिया है। डाई हाउस संचालकों को अपने स्तर पर बॉयलर चलाने पड़ते हैं। इनको चलाना काफी महंगा पड़ता है। डाई उद्यमी लंबे समय से कॉमन बॉयलर की मांग कर रहे हैं। इसको लेकर कई बार सर्वे भी हो चुका है, लेकिन यह प्रोजेक्ट सिरे नहीं चढ़ पाया है।
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जेडएलडी प्रोजेक्ट से बड़ी उम्मीद
शहर में पानी की सबसे अधिक खपत है। अधिकतर खपत उद्योगों में होती है। उद्यमियों को इस पानी को बाहर छोड़ने से पहले पूरी तरह से शोधित करना होता है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड इसकी अनदेखी करने पर मोटा जुर्माना लगाता है। उद्यमियों को ईटीपी लगाना होता है। इसको चला पाना काफी महंगा होता है। उद्यमी इसको लेकर जेडएलडी प्रोजेक्ट की मांग कर रहे हैं। इसको लेकर सर्वे भी हो चुका है, लेकिन प्रोजेक्ट काफी महंगा होने पर सरकार इसको शुरू करने को आगे नहीं आ रही है।
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रेनीवेल प्रोजेक्ट से मिलना है शहर को पानी
शहर में भूजल तेजी के साथ घट रहा है। कई जगह ट्यूबवेल भी फेल हो रहे हैं। शहर में पेयजल सप्लाई को लेकर रेनीवेल प्रोजेक्ट बनाया गया है। यह करीब 800 करोड़ रुपये का है। इस प्रोजेक्ट के अंतर्गत यमुना की तलहटी में कुएं बनाकर यहां से शोधित पानी शहर में सप्लाई करने की योजना है। यह प्रोजेक्ट कई साल से अटका हुआ है। इसको अब तेजी मिलने की उम्मीद है।