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हिंदी हमारी मातृ और राष्ट्रभाषा, विकास पर देना होगा जोर

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 13 Aug 2021 12:17 AM IST
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Hindi is our mother and national language, emphasis will have to be given on development
हिंदी हमारी मातृ व राष्ट्रभाषा है, इसलिए हमें ज्यादा से ज्यादा इसका उपयोग करना चाहिए ताकि इसका विकास हो सके। यह हमें एक सूत्र में बांधने का काम करती है इसलिए हमें इसका मान-सम्मान करना चाहिए। यह तभी संभव होगा जब हम हिंदी बोलेंगे, पढ़ेंगे और अपने दैनिक जीवन में इसका अधिक से अधिक इस्तेमाल करेंगे।
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अमर उजाला के ‘हिंदी हैं हम’ अभियान के तहत बुद्धिजीवियों ने कहा कि मातृभाषा हिंदी को मनोवैज्ञानिक नजरिये से देखें तो यह सीखने में मुश्किल नहीं है। हिंदी संपर्क एवं राजभाषा के रूप में लगातार बढ़ रही है। 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाया जाता है। 1949 को इसी दिन संविधान सभा में हिंदी को राजभाषा का दर्जा दिया गया था। अंग्रेजी भाषा के बढ़ते चलन और हिंदी की अनदेखी को रोकने के लिए राष्ट्रभाषा प्रचार समिति के अनुरोध पर 1953 से हर वर्ष 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाने की शुरुआत की गई। इस संबंध में शिक्षाविदों का भी कहना है कि हिंदी की अनदेखी राष्ट्रहित में नहीं है। आज हिंदी दिवस पर यह संकल्प लेना चाहिए कि हम अपने जीवन में हिंदी को महत्वपूर्ण स्थान देंगे।
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भले ही आज हम अंग्रेजों से आजाद हो चुके हों लेकिन उनकी यह भाषा आज भी हम लोगों को कहीं न कहीं जकड़े हुए हैं। हम बाकी भाषाओं को ना बोलें या बोलना ही बंद कर दें, ऐसा नहीं है, लेकिन जैसे हम आज अंग्रेजी भाषा को महत्व देते हैं, वही स्थान हिंदी भाषा को क्यों नहीं दे सकते, जो हमारी राष्ट्र भाषा है। - सीमा सेठी, प्रवक्ता, एसडी विद्या मंदिर, हुडा, पानीपत।
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विश्व के ज्यादातर देशों की पहचान उनकी भाषा से है। एक देश-एक भाषा को अनिवार्य रूप से लागू किया जाना चाहिए। हमारे देश में अधिकांश लोग हिंदी भाषी है, परंतु अंग्रेजी भाषा के कारण किसी व्यक्ति की शिक्षा में अवरोध आए ऐसा नही होना चाहिए। - बोधराज श्योराण, जेबीटी अध्यापक, जीपीएस, वार्ड-10, पानीपत।
- आजकल किसी बड़े कार्यक्रम में अगर हिंदी बोलो तो ऐसा लगता है जैसे कि कोई अपराध कर दिया हो। जब चीन के लोगों को चीनी भाषा बोलने में शर्म नहीं लगती, जापानी अपनी मातृभाषा बोलते हैं तो हम क्यों नहीं? भारतीयों को हिंदी बोलने में शर्म क्यों महसूस होती है? मैं हिंदी बोलने में गर्व महसूस करता हूं। - हरिओम, शिक्षक, राजकीय प्राथमिक विद्यालय बिंझौल, पानीपत।
आज के समय में अंग्रेजी का ज्ञान होना आवश्यक हो गया है क्योंकि अंग्रेजी की अज्ञानता से हमारा कॅरियर प्रभावित होता है। परंतु इसका यह अर्थ कदापि नहीं है कि हम अपनी मातृभाषा को भूल जाएं। दोनों भाषाओं का इतना अच्छा ज्ञान हो कि कभी किसी भी बात से शर्मिंदा न होना पड़े। - रेखा शर्मा, प्राचार्या, आर्य बाल भारती स्कूल, पानीपत।

अंग्रेजों ने सरकारी कामकाज के लिए अंग्रेजी भाषा को अनिवार्य कर दिया था ताकि उनको शासन प्रशासन चलाने में कोई परेशानी का सामना न करना पड़े। परंतु समय बदल रहा है, शिक्षाविद अपनी राष्ट्रभाषा हिंदी का महत्व समझने लगे हैं। हमारी राष्ट्र भाषा हिंदी हो ताकि बच्चे का आधार या नींव सुदृढ़ हो सके। - प्रो. तकदीर सिंह, मनोविज्ञान, डाइट, पानीपत।
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