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Panipat News: पहचान खो रही धरोहर, काला आंब पर नहीं जल पाई अमर जवान ज्योति, संग्रहालय भी सुरक्षित नहीं
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पानीपत। विश्व धरोहर दिवस शनिवार को है। ऐतिहासिक नगरी पानीपत करीब एक दर्जन धरोहर को समेटे हुए है। अनदेखी के चलते धरोहर अपना पहचान खो रही हैं। पानीपत की तीसरी लड़ाई का सूचक काला आंब आज तक पर्यटन स्थल नहीं बन पाया है। यहां पांच साल बाद भी अमर जवान ज्योति नहीं जली है। महाराष्ट्र और हरियाणा सरकार संयुक्त रूप से 16 एकड़ में पर्यटन स्थल का रूप देने में लगी है।
इसी के भरोसे पानीपत संग्रहालय पर्यटकों की अनदेखी का शिकार हो रहा है। सलारजंग गेट, काबुली बाग मस्जिद और इब्राहिम लोधी का मकबरा समेत कई अपनी पहचान खो रही हैं। पानीपत की दूसरी लड़ाई की सूचक सौदापुर गांव में जमीन पर कब्जा कर लिया गया है। पानीपत की तीसरी लड़ाई के शौर्य का प्रतीक काला आंब अपने ही शौर्य को तरस गया है। पानीपत की तीसरी लड़ाई की याद में 14 जनवरी को आयोजित कार्यक्रम में हर बार इसे नया रूप देने की घोषणा की जा रही है। यहां शौर्य स्मारक बनना तो दूर पांच साल पहले अमर ज्योति जलाने की घोषणा भी की थी। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पिछले साल शौर्य दिवस पर आयोजित समारोह में 16 एकड़ जमीन खरीदकर इससे आधुनिक शौर्य स्मारक बनाने की घोषणा की थी। इस एक साल में जमीन ही खरीदी जा सकी है। इस पर आगे का काम बाकी है।
काला आंब
पानीपत की तीसरी लड़ाई 14 जनवरी 1761 को अहमद शाह अब्दाली और मराठों के बीच लड़ी गई थी। मराठों के सेनापति सदाशिव राव भाऊ थे। मराठा इस युद्ध में हार गए लेकिन अब्दाली भी इतना सहम गया था। वह दोबारा लौटकर नहीं आया। यहां करीब छह एकड़ में काला आंब पर्यटन स्थल बनाया गया है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस 14 जनवरी 2025 को शौर्य दिवस समारोह पर काला आंब को सुंदर पर्यटन स्थल बनाने की घोषणा की थी। इसके लिए 10 एकड़ और जमीन खरीदी जानी थी। पानीपत रिफाइनरी ने पांच साल पहले अमर जवान ज्योति बनाने की घोषणा की थी। जमीन आवंटन का कार्य चल रहा है। संग्रहालय को नहीं मिला मूर्त रूप
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प्रशासन ने एलिवेटेड हाईवे बनाते समय जीटी रोड पर लगी मूर्तियों को हटा दिया था। इनको सिंचाई विभाग के कार्यालय के साथ पानीपत संग्रहालय बनाकर शिफ्ट किया था। पानीपत संग्रहालय अनदेखी का शिकार हो रहा है। यहां कोई पर्यटक नहीं पहुंच पा रहा है। काबुली बाग मस्जिद बाबर द्वारा इब्राहिम लोधी पर विजय प्राप्त करने के बाद बनवाई गई ऐतिहासिक मस्जिद है। वहीं तहसील कैंप में इब्राहिम लोधी का मकबरा बनाया गया। बू-अली शाह कलंदर दरगाह लगभग 700 साल पुरानी सूफी संत की दरगाह है। यहां देश और विदेश से लोग अपनी मन्नत रखते हैं। सलार गंज गेट शहर की प्रमुख पहचान है। इसके चारों तरफ रेहड़ी इसकी सुंदरता को बिगाड़ रही हैं।
वर्जन :
काला आंब के लिए 10 एकड़ जमीन आवंटित की जा चुकी है। इसकी डीपीआर बनाई जा रही है। इसमें पानीपत संग्रहालय स्थानांतरित किया जाएगा। इसके लिए व्यापक स्तर पर काम किया जा रहा है। बाकी स्थलों की भी देखरेख की जा रही है।
डाॅ. वीरेंद्र कुमार दहिया, उपायुक्त।
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इसी के भरोसे पानीपत संग्रहालय पर्यटकों की अनदेखी का शिकार हो रहा है। सलारजंग गेट, काबुली बाग मस्जिद और इब्राहिम लोधी का मकबरा समेत कई अपनी पहचान खो रही हैं। पानीपत की दूसरी लड़ाई की सूचक सौदापुर गांव में जमीन पर कब्जा कर लिया गया है। पानीपत की तीसरी लड़ाई के शौर्य का प्रतीक काला आंब अपने ही शौर्य को तरस गया है। पानीपत की तीसरी लड़ाई की याद में 14 जनवरी को आयोजित कार्यक्रम में हर बार इसे नया रूप देने की घोषणा की जा रही है। यहां शौर्य स्मारक बनना तो दूर पांच साल पहले अमर ज्योति जलाने की घोषणा भी की थी। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पिछले साल शौर्य दिवस पर आयोजित समारोह में 16 एकड़ जमीन खरीदकर इससे आधुनिक शौर्य स्मारक बनाने की घोषणा की थी। इस एक साल में जमीन ही खरीदी जा सकी है। इस पर आगे का काम बाकी है।
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काला आंब
पानीपत की तीसरी लड़ाई 14 जनवरी 1761 को अहमद शाह अब्दाली और मराठों के बीच लड़ी गई थी। मराठों के सेनापति सदाशिव राव भाऊ थे। मराठा इस युद्ध में हार गए लेकिन अब्दाली भी इतना सहम गया था। वह दोबारा लौटकर नहीं आया। यहां करीब छह एकड़ में काला आंब पर्यटन स्थल बनाया गया है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस 14 जनवरी 2025 को शौर्य दिवस समारोह पर काला आंब को सुंदर पर्यटन स्थल बनाने की घोषणा की थी। इसके लिए 10 एकड़ और जमीन खरीदी जानी थी। पानीपत रिफाइनरी ने पांच साल पहले अमर जवान ज्योति बनाने की घोषणा की थी। जमीन आवंटन का कार्य चल रहा है। संग्रहालय को नहीं मिला मूर्त रूप
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प्रशासन ने एलिवेटेड हाईवे बनाते समय जीटी रोड पर लगी मूर्तियों को हटा दिया था। इनको सिंचाई विभाग के कार्यालय के साथ पानीपत संग्रहालय बनाकर शिफ्ट किया था। पानीपत संग्रहालय अनदेखी का शिकार हो रहा है। यहां कोई पर्यटक नहीं पहुंच पा रहा है। काबुली बाग मस्जिद बाबर द्वारा इब्राहिम लोधी पर विजय प्राप्त करने के बाद बनवाई गई ऐतिहासिक मस्जिद है। वहीं तहसील कैंप में इब्राहिम लोधी का मकबरा बनाया गया। बू-अली शाह कलंदर दरगाह लगभग 700 साल पुरानी सूफी संत की दरगाह है। यहां देश और विदेश से लोग अपनी मन्नत रखते हैं। सलार गंज गेट शहर की प्रमुख पहचान है। इसके चारों तरफ रेहड़ी इसकी सुंदरता को बिगाड़ रही हैं।
वर्जन :
काला आंब के लिए 10 एकड़ जमीन आवंटित की जा चुकी है। इसकी डीपीआर बनाई जा रही है। इसमें पानीपत संग्रहालय स्थानांतरित किया जाएगा। इसके लिए व्यापक स्तर पर काम किया जा रहा है। बाकी स्थलों की भी देखरेख की जा रही है।
डाॅ. वीरेंद्र कुमार दहिया, उपायुक्त।