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हरियाणा के रसीले फलाें का ले सकेंगे स्वाद
अमर उजाला, पानीपत
Updated Wed, 06 Nov 2013 11:56 PM IST
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पानीपत में प्रदेशवासियों के अलावा आसपास के लोग भी हरियाणा के रसीले फलाें का स्वाद ले सकेंगे। बागवानी विभाग किसानाें को नए बाग लगाने पर चार करोड़ और पुराने बागों के रखरखाव पर 1.61 करोड़ की अनुदान राशि देगा। इससे पुराने बागाें में फलाें के उत्पादन में आ रही कमी दूर होगी।
माना जा रहा है दोनाें योजनाआें के पूरा होने से प्रदेश में फलाें के उत्पादन में बढ़ोतरी होना तय है। इसका सीधा फायदा किसानाें को मिलेगा।
प्रदेश में फलाें की खेती को नए बाग लगाने के लिए बागवानी विभाग किसानाें को चार करोड़ रुपये की अनुदान राशि से करीब 2500 हेक्टेयर में अमरूद, किन्नू, आम, बेर, चीकू, आडू, आलू बुखारा, अमरूद और नाशपाती के बाग लगाएगा।
इस योजना के तहत 75 फीसदी अनुदान देगा। इस योजना के तहत किसान को प्र्रति हेक्टेयर पहले साल 18 हजार, दूसरे और तीसरे साल छह-छह हजार रुपये समेत कुल 30 हजार रुपये की अनुदान राशि दी जाएगी।
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नए बागाें के साथ-साथ विभाग ने अब पुराने बागों में फलाें के उत्पादन को बढ़ाने की योजना तैयार की है।
योजना के तहत बागाें की कटाई, छटाई और उनका हर तरह का रखरखाव कराया जाएगा। इसके लिए प्रदेशभर में खडे़ बागाें को शामिल किया गया है। इस पर 1.61 करोड़ रुपये की अनुदान राशि देगा। किसान को प्रति हेक्टेयर 15 हजार रुपये की अनुदान राशि दी जाएगी।
विभाग का मानना है कि कटाई, छटाई और रखरखाव पुराने बागों में नई जान डालने का काम करेगा। मगर कई अवसराें पर किसान खर्चे के चलते इसकी अनदेखी कर देता है। ऐसे में धीरे-धीरे करके उत्पादन में गिरावट शुरू हो जाती है। जब तक किसान संभल पाता है तब तक देर हो चुकी होती है और बाग दम तोड़ने के कगार पर पहुंच जाता है।
अपने बागों को बचाने के लिए बिना किसी सलाह के किसान मंहगी कीटनाशक दवाआें के स्प्रे करना शुरू कर देते हैं। मगर यह पुराने बागाें को बचाने का सही रास्ता नहीं है। इसका एक ही रास्ता है कि फलदार पेड़ पर अनावश्यक टहनियाें की कटाई, छटाई और उनके रखरखाव पर ध्यान दिया जाएगा।
किसानाें की आमदनी बढ़ेगी
किसानाें का ध्यान इस ओर खींचने के लिए विभाग ने पुराने बागाें के जीर्णोंद्धार की योजना तैयार की है। अनुदान राशि मिलने पर किसानाें के बागाें का जीर्णोद्धार कराने के बाद फलाें का उत्पादन एक बार पटरी पर आ जाता है। उत्पादन बढ़ने से किसान की आमदनी बढ़ेगी जिससे उन्हें सीधा फायदा होगा।
वर्जन
लापरवाही और अज्ञानता के चलते पुराने बागाें में फलाें का उत्पादन गिर रहा है। किसानाें को जागरूक करने के लिए विभाग उन्हें आवश्यक जानकारियां तो दे ही रहा है बल्कि अनुदान राशि भी देगा। इस योजना के तहत पुराने बागों को शामिल किया गया है। आवेदन करने वाले किसान को विभाग की ओर से अनुदान राशि मुहैया कराई जाएगी। इससे प्रदेश में फलों के उत्पादन में बढ़ोतरी होने की उम्मीद की जा रही है।
डॉ. बीएस सहरावत, संयुक्त निदेशक, बागवानी विभाग
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माना जा रहा है दोनाें योजनाआें के पूरा होने से प्रदेश में फलाें के उत्पादन में बढ़ोतरी होना तय है। इसका सीधा फायदा किसानाें को मिलेगा।
प्रदेश में फलाें की खेती को नए बाग लगाने के लिए बागवानी विभाग किसानाें को चार करोड़ रुपये की अनुदान राशि से करीब 2500 हेक्टेयर में अमरूद, किन्नू, आम, बेर, चीकू, आडू, आलू बुखारा, अमरूद और नाशपाती के बाग लगाएगा।
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इस योजना के तहत 75 फीसदी अनुदान देगा। इस योजना के तहत किसान को प्र्रति हेक्टेयर पहले साल 18 हजार, दूसरे और तीसरे साल छह-छह हजार रुपये समेत कुल 30 हजार रुपये की अनुदान राशि दी जाएगी।
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नए बागाें के साथ-साथ विभाग ने अब पुराने बागों में फलाें के उत्पादन को बढ़ाने की योजना तैयार की है।
योजना के तहत बागाें की कटाई, छटाई और उनका हर तरह का रखरखाव कराया जाएगा। इसके लिए प्रदेशभर में खडे़ बागाें को शामिल किया गया है। इस पर 1.61 करोड़ रुपये की अनुदान राशि देगा। किसान को प्रति हेक्टेयर 15 हजार रुपये की अनुदान राशि दी जाएगी।
विभाग का मानना है कि कटाई, छटाई और रखरखाव पुराने बागों में नई जान डालने का काम करेगा। मगर कई अवसराें पर किसान खर्चे के चलते इसकी अनदेखी कर देता है। ऐसे में धीरे-धीरे करके उत्पादन में गिरावट शुरू हो जाती है। जब तक किसान संभल पाता है तब तक देर हो चुकी होती है और बाग दम तोड़ने के कगार पर पहुंच जाता है।
अपने बागों को बचाने के लिए बिना किसी सलाह के किसान मंहगी कीटनाशक दवाआें के स्प्रे करना शुरू कर देते हैं। मगर यह पुराने बागाें को बचाने का सही रास्ता नहीं है। इसका एक ही रास्ता है कि फलदार पेड़ पर अनावश्यक टहनियाें की कटाई, छटाई और उनके रखरखाव पर ध्यान दिया जाएगा।
किसानाें की आमदनी बढ़ेगी
किसानाें का ध्यान इस ओर खींचने के लिए विभाग ने पुराने बागाें के जीर्णोंद्धार की योजना तैयार की है। अनुदान राशि मिलने पर किसानाें के बागाें का जीर्णोद्धार कराने के बाद फलाें का उत्पादन एक बार पटरी पर आ जाता है। उत्पादन बढ़ने से किसान की आमदनी बढ़ेगी जिससे उन्हें सीधा फायदा होगा।
वर्जन
लापरवाही और अज्ञानता के चलते पुराने बागाें में फलाें का उत्पादन गिर रहा है। किसानाें को जागरूक करने के लिए विभाग उन्हें आवश्यक जानकारियां तो दे ही रहा है बल्कि अनुदान राशि भी देगा। इस योजना के तहत पुराने बागों को शामिल किया गया है। आवेदन करने वाले किसान को विभाग की ओर से अनुदान राशि मुहैया कराई जाएगी। इससे प्रदेश में फलों के उत्पादन में बढ़ोतरी होने की उम्मीद की जा रही है।
डॉ. बीएस सहरावत, संयुक्त निदेशक, बागवानी विभाग