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Panipat News: हरियाणा पीसीबी का दावा, पंजाब से भी प्रदूषण लेकर आ रही टांगरी नदी
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अंबाला। मारकंडा और टांगरी नदी के प्रदूषित होने के मामले में तूल पकड़ लिया है। इस मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की दिल्ली स्थित प्रिंसिपल बैंच में सुनवाई थी, इसमें हिमाचल प्रदेश और हरियाणा के प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों को बुलाया गया था, हालांकि ट्रिब्यूनल ने सुनवाई के लिए 17 मार्च की तारीख दे दी है। सुनवाई से पहले हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एचपीसीबी) ने एक एक्शन टेकन रिपोर्ट तैयार की थी। इस रिपोर्ट की माने तो पीसीबी का कहना है कि टांगरी नदी हरियाणा से होती हुई पंजाब में जाती है और फिर पंजाब से हरियाणा के कुरुक्षेत्र में दाखिल होती है। इस रिपोर्ट में आरोप लगाया है कि जांच में सामने आया है कि पंजाब से टांगरी नदी प्रदूषण लेकर आ रही है। बोर्ड ने सुझाव दिया है कि प्रदूषण के सटीक स्रोत का पता लगाने के लिए पंजाब के हिस्से में भी निगरानी बढ़ानी होगी। अभी तक हरियाणा और हिमाचल प्रदेश को एनजीटी की सख्ती झेलनी पड़ रही है, अगली सुनवाई के बाद ट्रिब्यूनल पंजाब को भी इसमें शामिल कर सकता है।
सर्वाधिक अंबाला के नाले
एनजीटी की फटकार के बाद हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 27 नालों से सैंपल लिए थे, जिसकी रिपोर्ट काफी खराब आई। नदियों को प्रदूषित करने वाले सर्वाधिक 21 नाले अंबाला जिले में हैं। इसके अलावा कुरुक्षेत्र में 4 और पंचकूला में 2 ऐसे पॉइंट चिह्नित किए गए हैं, जहां से प्रदूषित जल नदियों में मिल रहा है।
एक्शन प्लान तैयार, 2028 तक की मांगी मोहलत
अब प्रशासन ने इन नालों को टैप करने के लिए एक्शन प्लान पेश किया है, जिसमें एनजीटी से वर्ष 2028 तक की मोहलत मांगी है। इसमें काला अंब क्षेत्र की कॉलोनियों के लिए जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) लगाएगा, जिसे पूरा होने में 2028 तक का समय लग सकता है। अंबाला के गधौली, गोकुलगढ़ और हरडा-हर्डी गांव में सींचेवाल तकनीक और सोकेज पिट्स के जरिए कचरे के निस्तारण का काम 60 से 90 फीसदी तक पूरा हो चुका है। इसे जल्द सुचारू किया जाएगा। अंबाला सदर क्षेत्र में 44 एमएलडी क्षमता के 4 एसटीपी पर काम चल रहा है, जिनमें से 2 शुरू हो चुके हैं और बाकी मार्च 2026 तक चालू होने की उम्मीद है।
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धर्मवीर की याचिका पर हुई कार्रवाई
नारायणगढ़ निवासी धर्मवीर ने वर्ष 2022 में मारकंडा नदी में हो रहे औद्योगिक प्रदूषण के लिए एनजीटी में गुहार लगाई थी। इसी पर संज्ञान लेते हुए ट्रिब्यूनल ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को विस्तृत जांच और समाधान की समय सीमा तय करने के निर्देश दिए थे।
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सर्वाधिक अंबाला के नाले
एनजीटी की फटकार के बाद हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 27 नालों से सैंपल लिए थे, जिसकी रिपोर्ट काफी खराब आई। नदियों को प्रदूषित करने वाले सर्वाधिक 21 नाले अंबाला जिले में हैं। इसके अलावा कुरुक्षेत्र में 4 और पंचकूला में 2 ऐसे पॉइंट चिह्नित किए गए हैं, जहां से प्रदूषित जल नदियों में मिल रहा है।
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एक्शन प्लान तैयार, 2028 तक की मांगी मोहलत
अब प्रशासन ने इन नालों को टैप करने के लिए एक्शन प्लान पेश किया है, जिसमें एनजीटी से वर्ष 2028 तक की मोहलत मांगी है। इसमें काला अंब क्षेत्र की कॉलोनियों के लिए जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) लगाएगा, जिसे पूरा होने में 2028 तक का समय लग सकता है। अंबाला के गधौली, गोकुलगढ़ और हरडा-हर्डी गांव में सींचेवाल तकनीक और सोकेज पिट्स के जरिए कचरे के निस्तारण का काम 60 से 90 फीसदी तक पूरा हो चुका है। इसे जल्द सुचारू किया जाएगा। अंबाला सदर क्षेत्र में 44 एमएलडी क्षमता के 4 एसटीपी पर काम चल रहा है, जिनमें से 2 शुरू हो चुके हैं और बाकी मार्च 2026 तक चालू होने की उम्मीद है।
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धर्मवीर की याचिका पर हुई कार्रवाई
नारायणगढ़ निवासी धर्मवीर ने वर्ष 2022 में मारकंडा नदी में हो रहे औद्योगिक प्रदूषण के लिए एनजीटी में गुहार लगाई थी। इसी पर संज्ञान लेते हुए ट्रिब्यूनल ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को विस्तृत जांच और समाधान की समय सीमा तय करने के निर्देश दिए थे।