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Panipat News: दसलक्षण पर्व के समापन पर निकली भव्य जल यात्रा
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दसलखण पर्व श्री जी का अभिषेक करते समाज के लोग। स्रोत : मंदिर
- फोटो : samvad
संवाद न्यूज एजेंसी
पानीपत। दिगंबर जैन समाज ने शुक्रवार को दसलक्षण पर्व के दसवें एवं अंतिम दिन उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म का पालन करते हुए भव्य जल यात्रा निकाली। इस अवसर पर भगवान वासुपूज्य का निर्वाणोत्सव और अनंत चतुर्दशी भी श्रद्धा एवं भक्तिभाव के साथ मनाई गई। बैंड-बाजे, धार्मिक ध्वजों और भजनों के साथ निकली शोभायात्रा ने शहर के प्रमुख बाजारों का भ्रमण किया।
जिले के सातों दिगंबर जैन मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ रही। सबसे पहले भगवान का अभिषेक और शांतिधारा की गई। इसके बाद नित्य नियम पूजन के दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान के श्रीचरणों में भक्तिभाव से निर्वाण लाडू अर्पित किए।
100 से अधिक वर्षों से चली आ रही जल यात्रा की परंपरा
अधिवक्ता मेहुल जैन ने बताया कि पानीपत में दसलक्षण पर्व के अंतिम दिन जल यात्रा निकालने की परंपरा 100 से अधिक वर्षों से चली आ रही है। इसी परंपरा के तहत श्री दिगंबर जैन बड़ा मंदिर, जैन मोहल्ला से जल यात्रा निकाली गई। इसमें इंद्र बनने का सौभाग्य अभिषेक जैन, अपूर्व जैन, प्रशांत जैन, आदित्य जैन और अर्घ जैन को प्राप्त हुआ।
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बैंड-बाजे और धार्मिक ध्वजों के साथ निकली शोभायात्रा जैन मोहल्ला से शुरू होकर गुड़ मंडी बाजार, मेन बाजार, हलवाई हट्टा, सुभाष बाजार, श्री दिगंबर जैन मंदिर दुंदीवालाना, सालारगंज गेट, इंसार बाजार और इंदिरा बाजार से होते हुए वापस बड़ा जैन मंदिर पहुंची। यात्रा के समापन के बाद मंदिर में विराजमान भगवान पार्श्वनाथ की विशाल प्रतिमा का श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से मस्तकाभिषेक किया।
उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म का महत्व
जैन दर्शन के अनुसार ब्रह्म का अर्थ आत्मा और चर्या का अर्थ उसमें लीन रहना है। उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म भौतिक परिग्रहों, वासनाओं और अनावश्यक उपभोग का त्याग कर सादगीपूर्ण जीवन जीने की प्रेरणा देता है। भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी के अवसर पर श्रद्धालुओं ने व्रत-उपवास रखे और विभिन्न जैन मंदिरों में दर्शन कर धर्मलाभ लिया।
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पानीपत। दिगंबर जैन समाज ने शुक्रवार को दसलक्षण पर्व के दसवें एवं अंतिम दिन उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म का पालन करते हुए भव्य जल यात्रा निकाली। इस अवसर पर भगवान वासुपूज्य का निर्वाणोत्सव और अनंत चतुर्दशी भी श्रद्धा एवं भक्तिभाव के साथ मनाई गई। बैंड-बाजे, धार्मिक ध्वजों और भजनों के साथ निकली शोभायात्रा ने शहर के प्रमुख बाजारों का भ्रमण किया।
जिले के सातों दिगंबर जैन मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ रही। सबसे पहले भगवान का अभिषेक और शांतिधारा की गई। इसके बाद नित्य नियम पूजन के दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान के श्रीचरणों में भक्तिभाव से निर्वाण लाडू अर्पित किए।
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100 से अधिक वर्षों से चली आ रही जल यात्रा की परंपरा
अधिवक्ता मेहुल जैन ने बताया कि पानीपत में दसलक्षण पर्व के अंतिम दिन जल यात्रा निकालने की परंपरा 100 से अधिक वर्षों से चली आ रही है। इसी परंपरा के तहत श्री दिगंबर जैन बड़ा मंदिर, जैन मोहल्ला से जल यात्रा निकाली गई। इसमें इंद्र बनने का सौभाग्य अभिषेक जैन, अपूर्व जैन, प्रशांत जैन, आदित्य जैन और अर्घ जैन को प्राप्त हुआ।
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बैंड-बाजे और धार्मिक ध्वजों के साथ निकली शोभायात्रा जैन मोहल्ला से शुरू होकर गुड़ मंडी बाजार, मेन बाजार, हलवाई हट्टा, सुभाष बाजार, श्री दिगंबर जैन मंदिर दुंदीवालाना, सालारगंज गेट, इंसार बाजार और इंदिरा बाजार से होते हुए वापस बड़ा जैन मंदिर पहुंची। यात्रा के समापन के बाद मंदिर में विराजमान भगवान पार्श्वनाथ की विशाल प्रतिमा का श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से मस्तकाभिषेक किया।
उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म का महत्व
जैन दर्शन के अनुसार ब्रह्म का अर्थ आत्मा और चर्या का अर्थ उसमें लीन रहना है। उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म भौतिक परिग्रहों, वासनाओं और अनावश्यक उपभोग का त्याग कर सादगीपूर्ण जीवन जीने की प्रेरणा देता है। भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी के अवसर पर श्रद्धालुओं ने व्रत-उपवास रखे और विभिन्न जैन मंदिरों में दर्शन कर धर्मलाभ लिया।

दसलखण पर्व श्री जी का अभिषेक करते समाज के लोग। स्रोत : मंदिर- फोटो : samvad