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लावारिस बच्चियों के आरोपियों तक नहीं पहुंच पाती पुलिस
अमर उजाला ब्यूरो, पानीपत।
Updated Tue, 22 Nov 2016 12:00 AM IST
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पानीपत। दो सालों में जिले में आधा दर्जन नवजात बच्चे और बच्चियां लावारिस हालत में मिल चुकी हैं। एक दर्जन से अधिक भ्रूण नालों या कूड़े ढेरों में मिल चुके हैं। एक बच्ची को तो जिंदा ही सेक्टर-25 के पास नाले में फेंक दिया गया था। बाद में उसकी मौत हो गई थी। पुलिस इनमें से एक भी मामले में आरोपियों को पकड़ना तो दूर उनकी पहचान तक नहीं कर सकी है। इंसानियत को शर्मसार करने वाले यह सभी मामले पुलिस की फाइलों में दफन हो चुके है। लावारिस मिली बच्चियां शिशु गृह में पल रही हैं।
हाली की धरती पानीपत से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान की शुरू किया था। इस अभियान की शुरुआत के बाद से अभी तक जिले में आधा दर्जन से अधिक बच्चियां लावरिस मिल चुकी हैं। गनीमत रही कि सिविल अस्पताल के डॉक्टरों ने इन सभी बच्चियों को बचा लिया। लेकिन, पुलिस इस मामले में किसी को भी गिरफ्तार नहीं कर सकी है। मामलों में पैरवी करने वाले न होने के कारण सभी मामले फाइलों में दफन हो गए हैं। हालांकि, पुलिस सभी मामलों की जांच का दावा कर रही है।
यह बच्चियां मिलीं लावारिस
आठ फरवरी 2014 को जाटल रोड पर वाल्मीकि बस्ती में खाली प्लॉट में पांच घंटे की नवजात बच्ची मिली। बच्ची को कपड़े में लपेटकर फेंका गया था। उसे सिविल अस्पताल में इलाज के बाद शिशु गृह भेज दिया गया। पुलिस मामले का खुलासा नहीं कर सकी।
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19 फरवरी को जाटल रोड स्थित बाल अनाथालय के बाहर पालने में एक नवजात लावारिस हालत में मिली। बच्ची लगभग दस दिन की थी। पुलिस इस मामले में किसी आरोपी को गिरफ्तार नहीं कर पाई।
मार्च 2015 में बबैल रोड पर खाली पड़े प्लॉट में आठ माह की नवजात बच्ची मृत अवस्था में मिली। बच्ची को जन्म के बाद हत्या कर फेंका गया था। इसमें भी दोषी पकड़ से बाहर हैं।
नवंबर 2015 में सेक्टर-25 के गंदे नाले में मृत अवस्था में एक नवजात बच्ची मिली। पुलिस मामले की गहराई तक नहीं जा सकी।
दिसंबर 2015 में सनौली रोड पर साईं चौक के पास खाली प्लॉट में एक नवजात बच्ची मिली। बच्ची को कपड़े में लपेटकर फेंका गया था। स्थानीय लोगों ने बच्ची को सिविल अस्पताल में भिजवाया था। बाल विकास एवं कल्याण समिति ने बच्ची को इलाज के बाद शिशु गृह भेज दिया।
इसी वर्ष 14 सितंबर को सेक्टर 11-12 में एक डॉक्टर के घर के बाहर दो नवजात जुड़वा बच्ची लावारिस मिलीं। दोनों बच्चियों को भी सिविल अस्पताल में इलाज के बाद शिशु गृह राई भेज दिया गया। पुलिस ने मामले का पर्दाफाश करने के लिए पांच टीमें गठित की थीं, लेकिन फेंकने वालों का अभी तक पता नहीं चल सका है।
इसी वर्ष 15 सितंबर को सेक्टर-25 में पेट्रोल पंप के पास खाली प्लॉट में एक नवजात बच्चा मिला। बच्चे को कपड़े में लपेटकर फेंका गया था। राहगीरों ने पुलिस को सूचना देकर बच्चे को सिविल अस्पताल में भिजवाया था। फिलहाल बच्चा शिशु गृह राई में है।
इसी वर्ष 17 नवंबर को जीटी रोड पर एसडी कॉलेज के सामने एक नवजात बच्ची कंबल में लिपटी हुई मिली। बच्ची को फिलहाल इलाज के लिए सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस मामले की जांच की बात कह रही है।
औसतन हर माह मिल रहा एक भ्रूण
पानीपत में हर माह भ्रूण मिले रहे हैं। थाना चांदनी बाग, थाना शहर, थाना सदर, थाना मॉडल टाउन समेत जिले के विभिन्न क्षेत्रों में औसतन हर माह इंसानी भ्रूण मिल चुका है। सबसे अधिक तहसील कैंप क्षेत्र में छह माह में पांच भ्रूण मिल चुके हैं। भ्रूणों को नालों या कूड़े के ढेरों में फेंका गया। पुलिस किसी भी मामले में खुलासा नहीं कर सकी है।
वर्जन
बच्चियों को लावारिस हालत में छोड़ना या भ्रूण फेंकना जघन्य अपराध हैं। सभी मामलों में पुलिस ने केस दर्ज किए हैं। पुलिस सभी मामलों की जांच कर रही है। हालांकि, पुलिस को किसी मामले के आरोपियों को गिरफ्तार करने में कामयाबी नहीं मिली है। पुलिस इस बारे में लगातार सभी अस्पतालों से संपर्क कर रही है।
जगदीप दूहन, डीएसपी हेडक्वार्टर पानीपत
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हाली की धरती पानीपत से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान की शुरू किया था। इस अभियान की शुरुआत के बाद से अभी तक जिले में आधा दर्जन से अधिक बच्चियां लावरिस मिल चुकी हैं। गनीमत रही कि सिविल अस्पताल के डॉक्टरों ने इन सभी बच्चियों को बचा लिया। लेकिन, पुलिस इस मामले में किसी को भी गिरफ्तार नहीं कर सकी है। मामलों में पैरवी करने वाले न होने के कारण सभी मामले फाइलों में दफन हो गए हैं। हालांकि, पुलिस सभी मामलों की जांच का दावा कर रही है।
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यह बच्चियां मिलीं लावारिस
आठ फरवरी 2014 को जाटल रोड पर वाल्मीकि बस्ती में खाली प्लॉट में पांच घंटे की नवजात बच्ची मिली। बच्ची को कपड़े में लपेटकर फेंका गया था। उसे सिविल अस्पताल में इलाज के बाद शिशु गृह भेज दिया गया। पुलिस मामले का खुलासा नहीं कर सकी।
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19 फरवरी को जाटल रोड स्थित बाल अनाथालय के बाहर पालने में एक नवजात लावारिस हालत में मिली। बच्ची लगभग दस दिन की थी। पुलिस इस मामले में किसी आरोपी को गिरफ्तार नहीं कर पाई।
मार्च 2015 में बबैल रोड पर खाली पड़े प्लॉट में आठ माह की नवजात बच्ची मृत अवस्था में मिली। बच्ची को जन्म के बाद हत्या कर फेंका गया था। इसमें भी दोषी पकड़ से बाहर हैं।
नवंबर 2015 में सेक्टर-25 के गंदे नाले में मृत अवस्था में एक नवजात बच्ची मिली। पुलिस मामले की गहराई तक नहीं जा सकी।
दिसंबर 2015 में सनौली रोड पर साईं चौक के पास खाली प्लॉट में एक नवजात बच्ची मिली। बच्ची को कपड़े में लपेटकर फेंका गया था। स्थानीय लोगों ने बच्ची को सिविल अस्पताल में भिजवाया था। बाल विकास एवं कल्याण समिति ने बच्ची को इलाज के बाद शिशु गृह भेज दिया।
इसी वर्ष 14 सितंबर को सेक्टर 11-12 में एक डॉक्टर के घर के बाहर दो नवजात जुड़वा बच्ची लावारिस मिलीं। दोनों बच्चियों को भी सिविल अस्पताल में इलाज के बाद शिशु गृह राई भेज दिया गया। पुलिस ने मामले का पर्दाफाश करने के लिए पांच टीमें गठित की थीं, लेकिन फेंकने वालों का अभी तक पता नहीं चल सका है।
इसी वर्ष 15 सितंबर को सेक्टर-25 में पेट्रोल पंप के पास खाली प्लॉट में एक नवजात बच्चा मिला। बच्चे को कपड़े में लपेटकर फेंका गया था। राहगीरों ने पुलिस को सूचना देकर बच्चे को सिविल अस्पताल में भिजवाया था। फिलहाल बच्चा शिशु गृह राई में है।
इसी वर्ष 17 नवंबर को जीटी रोड पर एसडी कॉलेज के सामने एक नवजात बच्ची कंबल में लिपटी हुई मिली। बच्ची को फिलहाल इलाज के लिए सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस मामले की जांच की बात कह रही है।
औसतन हर माह मिल रहा एक भ्रूण
पानीपत में हर माह भ्रूण मिले रहे हैं। थाना चांदनी बाग, थाना शहर, थाना सदर, थाना मॉडल टाउन समेत जिले के विभिन्न क्षेत्रों में औसतन हर माह इंसानी भ्रूण मिल चुका है। सबसे अधिक तहसील कैंप क्षेत्र में छह माह में पांच भ्रूण मिल चुके हैं। भ्रूणों को नालों या कूड़े के ढेरों में फेंका गया। पुलिस किसी भी मामले में खुलासा नहीं कर सकी है।
वर्जन
बच्चियों को लावारिस हालत में छोड़ना या भ्रूण फेंकना जघन्य अपराध हैं। सभी मामलों में पुलिस ने केस दर्ज किए हैं। पुलिस सभी मामलों की जांच कर रही है। हालांकि, पुलिस को किसी मामले के आरोपियों को गिरफ्तार करने में कामयाबी नहीं मिली है। पुलिस इस बारे में लगातार सभी अस्पतालों से संपर्क कर रही है।
जगदीप दूहन, डीएसपी हेडक्वार्टर पानीपत