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मित्रता हो तो भगवान कृष्ण और सुदामा जैसी : पांडेय

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 24 May 2026 02:39 AM IST
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Friendship should be like that of Lord Krishna and Sudama: Pandey
कथा सुनाते आचार्य लालमणि पांडेय। स्रोत : स्वयं
पानीपत। वार्ड-11 स्थित श्री महादेव मंदिर में श्रीमद्भागवत कथा का शनिवार को सातवां दिन रहा। कथाव्यास आचार्य लालमणि पांडेय ने भगवान कृष्ण और सुदामा की नि:स्वार्थ मित्रता का प्रसंग सुनाया जिससे उन्होंने सच्ची भक्ति और सच्ची मित्रता का संदेश दिया। कथा के बाद महिला भजन मंडली ने भजन-कीर्तन कर भगवान कृष्ण की महिमा का गुणगान किया।
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आचार्य लालमणि पांडेय ने सुदामा चरित्र में बताया कि भगवान किस प्रकार से मित्रता निभाते हैं और बिना बताए सब कुछ अपने मित्र सुदामा को दे देते हैं। सुदामा भी अपनी गरीबी भगवान को नहीं बताते हैं। यही ब्राह्मण और मित्रता का सच्चा परिचय है। इसलिए जीवन में यदि सच्ची मित्रता रखनी है तो भगवान कृष्ण और सुदामा जैसी रखनी चाहिए। उन्होंने भगवान कृष्ण की महिमा का गुणगान करते हुए कहा कि भगवान कृष्ण के 16108 विवाह हुए। भगवान समस्त प्राणियों के पति हैं। भगवान रुक्मिणी के साथ विनोद करते हैं और गृहस्थ आश्रम में आनंद के साथ रहने का संदेश देते हैं, उसके बाद आचार्य ने भगवान कृष्ण और बाणासुर के प्रसंग के बारे में बताया कि बाणासुर को अपनी हजार भुजाओं पर अत्यंत अहंकार था, उसकी पुत्री ऊषा को भगवान कृष्ण के पौत्र अनिरुद्ध से प्रेम हो गया।
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बाणासुर ने अनिरुद्ध को बंदी बना लिया, जिसे छुड़ाने के लिए भगवान कृष्ण युद्ध करने पहुंचे। बाणासुर भगवान शिव का भक्त था, इसलिए भगवान शिव ने बाणासुर की तरफ से युद्ध किया। कृष्ण और भगवान शिव के बीच यह अद्भुत युद्ध हुआ था। भगवान कृष्ण ने सुदर्शन चक्र से बाणासुर के हजार हाथों में से अधिकांश को काट दिया, केवल चार भुजाएं ही बचीं जिसके बाद बाणासुर का अहंकार टूट जाता है और बाणासुर ने कृष्ण और भगवान शिव के एक रूप (हरिहर) के दर्शन किए इसके बाद उन्होंने अनिरुद्ध और ऊषा के विवाह की अनुमति दी। राजसूय यज्ञ में भगवान की अग्र पूजा हुई और शिशुपाल का प्रभु ने वध किया। उसके बाद आचार्य ने भगवान कृष्ण और सुदामा की मित्रता के वर्ण किया।

कथा सुनाते आचार्य लालमणि पांडेय। स्रोत : स्वयं

कथा सुनाते आचार्य लालमणि पांडेय। स्रोत : स्वयं

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