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फ्री आई कैंप में सामाजिक संस्था ने लोगों से 4 हजार रुपये लेकर कराई सर्जरी, विभाग ने छापा मारकर जब्त किया रिकॉर्ड
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Free eye examination camp, the institution underwent surgery with 4 thousand rupees, health department team raided and seized records, school bus uncontrolled, overturned in the field, injured a teacher including two children
- फोटो : Panipat
प्रदेश सरकार और स्वास्थ्य विभाग की ओर से कैंप के जरिए नेत्र सर्जरी पर प्रतिबंध के बावजूद सामाजिक संस्था और निजी अस्पतालों के डॉक्टर मान नहीं रहे हैं। 12 दिन पहले सेक्टर-12 में सति भाई साईं दास सेवा दल की ओर से आयोजित नेत्र जांच शिविर में लगभग 800 लोगों की आंखों की जांच की गई थी। जिनमें से लगभग 90-100 लोग मोतियाबिंद के रोगी मिले थे। स्वास्थ्य विभाग की जांच में पता चला कि संस्था ने कैंप में आए मोतियाबिंद के रोगियों से सर्जरी के लिए 3-4 हजार रुपये भी लिए। मरीजों की आदर्श नगर स्थित आनंद अस्पताल में सर्जरी करवाई गई। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने शुक्रवार को संस्था के कार्यालय में छापा मारा। टीम ने संस्था से मरीजों का रिकार्ड मांगा तो संस्था रिकार्ड देने में आनाकानी करने लगी। संस्था के पास मरीजों का रिकार्ड नहीं मिला। यहां पर सिर्फ रजिस्ट्रेशन रजिस्टर ही मिला। विभाग ने संस्था को रिकार्ड उपलब्ध कराने के लिए एक दिन का समय दिया है, वहीं दूसरी ओर विभाग ने निजी अस्पताल का रिकार्ड भी खंगाला। यहां पर संस्था की ओर से काटी गई पर्चियां बरामद की गईं।
सिविल सर्जन डॉ. संतलाल वर्मा ने डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. शशि गर्ग के नेतृत्व में टीम का गठन किया था। डॉ. शशि गर्ग मामले की जांच के लिए नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. शालिनी मेहता के साथ सेक्टर 12 स्थित सति भाई साईं दास सेवा दल के कार्यालय में पहुंची। संस्था ने 7 मार्च को आई कैंप लगाया था। कैंप में लगभग 800 लोगों की जांच की गई। लगभग 100 मोतियाबिंद के रोगी मिले। संस्था की ओर से आई सर्जरी की परमिशन नहीं ली गई थी। स्वास्थ्य विभाग को सूचना मिली थी कि संस्था ने कैंप में आए मरीजों की बिना अनुमति सर्जरी कराई है। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने संस्था के प्रधान रामलाल चुघ से एक घंटा तक पूछताछ की, लेकिन यहां पर मरीजों का कोई रिकार्ड नहीं मिला। कैंप की ओपीडी प्रक्रिया में भी खामियां मिली। संस्था ने शनिवार को रिकार्ड उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया है।
डॉक्टरों की टीम आनंद अस्पताल में जांच के लिए पहुंची। यहां पर डॉ. संदीप आनंद से पूछताछ की गई। डॉ. संदीप ने बताया कि उसने पैसे लेकर सर्जरी की है। सर्जरी के लिए संस्था ने लोगों की पर्चियां भी काटी हैं। उन्होंने पांच लोगों की सर्जरी की है। वह पूरे मामले में निर्दोष हैं।
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स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई को रोकने के लिए शहर के कई ने भी डिप्टी सिविल सर्जन को फोन किया और कहा कि ये तो सामाजिक कार्य करने वाली संस्था है। लोगों की सेवा करते हैं इसलिए कुछ गलत ना हो। डॉक्टर ने राजनेताओं से कहा कि भलाई के काम तो हम भी करते हैं। इसलिए गलत नहीं होने देंगे।
2015 में समालखा में एक नेत्र जांच कैंप लगाया गया था। यहां पर मरीजों की जांच करने के बाद उन्हें सलारजंग गेट के पास निजी अस्पताल में सर्जरी के लिए लाया गया था। सर्जरी के दौरान 15 लोगों की आंखों में संक्रमण हो गया था। इनको चंडीगढ़ पीजीआई रेफर कर दिया गया था। स्वास्थ्य विभाग ने इस मामले में डॉक्टर पर कानूनी कार्रवाई की थी। प्रदेश सरकार ने नेत्र कैंप में मोतियाबिंद के मरीजों की सर्जरी करने पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगा दिया था।
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सिविल सर्जन डॉ. संतलाल वर्मा ने डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. शशि गर्ग के नेतृत्व में टीम का गठन किया था। डॉ. शशि गर्ग मामले की जांच के लिए नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. शालिनी मेहता के साथ सेक्टर 12 स्थित सति भाई साईं दास सेवा दल के कार्यालय में पहुंची। संस्था ने 7 मार्च को आई कैंप लगाया था। कैंप में लगभग 800 लोगों की जांच की गई। लगभग 100 मोतियाबिंद के रोगी मिले। संस्था की ओर से आई सर्जरी की परमिशन नहीं ली गई थी। स्वास्थ्य विभाग को सूचना मिली थी कि संस्था ने कैंप में आए मरीजों की बिना अनुमति सर्जरी कराई है। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने संस्था के प्रधान रामलाल चुघ से एक घंटा तक पूछताछ की, लेकिन यहां पर मरीजों का कोई रिकार्ड नहीं मिला। कैंप की ओपीडी प्रक्रिया में भी खामियां मिली। संस्था ने शनिवार को रिकार्ड उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया है।
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डॉक्टरों की टीम आनंद अस्पताल में जांच के लिए पहुंची। यहां पर डॉ. संदीप आनंद से पूछताछ की गई। डॉ. संदीप ने बताया कि उसने पैसे लेकर सर्जरी की है। सर्जरी के लिए संस्था ने लोगों की पर्चियां भी काटी हैं। उन्होंने पांच लोगों की सर्जरी की है। वह पूरे मामले में निर्दोष हैं।
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स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई को रोकने के लिए शहर के कई ने भी डिप्टी सिविल सर्जन को फोन किया और कहा कि ये तो सामाजिक कार्य करने वाली संस्था है। लोगों की सेवा करते हैं इसलिए कुछ गलत ना हो। डॉक्टर ने राजनेताओं से कहा कि भलाई के काम तो हम भी करते हैं। इसलिए गलत नहीं होने देंगे।
2015 में समालखा में एक नेत्र जांच कैंप लगाया गया था। यहां पर मरीजों की जांच करने के बाद उन्हें सलारजंग गेट के पास निजी अस्पताल में सर्जरी के लिए लाया गया था। सर्जरी के दौरान 15 लोगों की आंखों में संक्रमण हो गया था। इनको चंडीगढ़ पीजीआई रेफर कर दिया गया था। स्वास्थ्य विभाग ने इस मामले में डॉक्टर पर कानूनी कार्रवाई की थी। प्रदेश सरकार ने नेत्र कैंप में मोतियाबिंद के मरीजों की सर्जरी करने पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगा दिया था।