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निगम में फर्जीवाड़ा : सक्षम अधिकारी की मंजूरी बिना बना दी सैकड़ों प्रॉपर्टी आईडी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 07 Sep 2023 03:14 AM IST
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Fraud in corporation: Hundreds of property IDs made without the approval of the competent authority
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पानीपत। नगर निगम में अब नई प्रॉपर्टी आईडी और विभाजन की प्रॉपर्टी आईडी का बड़ा गोलमाल सामने आया है। अधिकारियों-कर्मचारियों ने बिना अनुमति और सक्षम अधिकारी की मंजूरी बिना ही सैकड़ों नई प्राॅपर्टी आईडी बना दी। वहीं, हजारों प्रॉपर्टी आईडी को बिना ऑनलाइन आपत्ति दर्ज हुए ही अपडेट कर दिया है। माना जा रहा है कि अधिकारियों और कर्मचारियों के इस कारनामे की वजह से निगम के करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ है।
ये गड़बड़झाला एनडीसी पोर्टल की समीक्षा करने पर सामने आया है। जिस पर संज्ञान लेते हुए निगम आयुक्त ने मंगलवार को संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस तक जारी कर दिए हैं। इनको जवाब देने के लिए तीन दिन का समय दिया है। नोटिस में स्पष्ट किया है कि अगर कोई अधिकारी और कर्मचारी इनका संतोषजनक जवाब नहीं देता है तो उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जा सकती है। विशेष बात यह है कि निगम की यह कार्रवाई अंदर खाते चल रही है। नोटिस तक अधिकारियों और कर्मचारियों को व्यक्तिगत रूप से सौंपे गए हैं। जिससे प्रॉपर्टी टैक्स से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों में हड़कंप मचा हुआ है। निगम के अफसर इस कार्रवाई पर बयानबाजी देने से बच रहे हैं।
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दो माह पहले चेताया, फिर भी बना दी
बताया जा रहा है कि निगम आयुक्त ने 11 जुलाई को निगम के सभी अधिकारियों ( जिनके पास एडमिन और चेकर की यूजर आईडी थी ) को स्पष्ट आदेश दिए थे कि वे अपनी यूजर आईडी से किसी भी प्रकार की नई प्राॅपर्टी आईडी और पार्ट की यानी विभाजन की आईडी नहीं बनाएगा। बावजूद अधिकारियों और कर्मचारियों ने पिछले करीब दो माह में करीब 364 नई आईडी बना दी हैं। जिसे आयुक्त की ओर से आदेशों की अवहेलना भी माना गया है।
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जनवरी से अब तक करीब चार हजार को किया अपडेट
इसके अलावा एक जनवरी से चार सितंबर तक संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों ने बिना आपत्ति दर्ज करीब 3828 प्रॉपर्टी आईडी को अपनी एडमिन या मेकर की यूजर आईडी से अपडेट किया है। इन विषयों पर संज्ञान लेते हुए निगम आयुक्त ने संबंधित सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए तीन दिन के भीतर जवाब मांगा है। इनमें नाम, क्षेत्र, संपत्ति कर, विकास शुल्क, मोबाइल नंबर समेत लिंक-डीलिंक को भी अपडेट किया जाना बताया गया है।
ये दिया नोटिस का हवाला:
निगम आयुक्त ने नोटिस के हवाले से कहा है कि जब नई प्रॉपर्टी आईडी और विभाजन की पार्ट वाली प्रॉपर्टी आईडी बनाने पर पाबंदी थी तो बिना सक्षम अधिकारी की अनुमति के इन्हें क्यों बनाया गया। ये आदेशों की अवहलेना है। क्यों न संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ प्रशासनिक कार्यवाही अमल में लाई जाए। जवाब समयावधि में न देने की सूरत में समझा जाएगा कि आपके पास जवाब देने के लिए कोई भी साक्ष्य या प्रमाण नहीं है। इसलिए आपके विरुद्ध कार्यवाही अमल में लाई जा सकती है।

अधिकारियों ने साधी चुप्पी:

इस विषय पर निगम अधिकारियों से बातचीत की गई तो उन्होंने पूरे मामला आयुक्त की जवाबदेही पर टाल दिया। आयुक्त राहुल नरवाल से बातचीत करने का प्रयास किया, लेकिन उन्होंने इस मामले में कोई बात नहीं की।
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