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Panipat News: भूजल बचाने के लिए पूर्व सरपंच आगे आया, अब गांव में 80 एकड़ में कर रहे सूक्ष्म सिंचाई

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 22 Mar 2023 02:09 AM IST
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Former sarpanch came forward to save groundwater, now doing micro irrigation in 80 acres in the village
पानीपत। जलसंरक्षण की दिशा में सकारात्मक प्रयास कर बिहौली गांव दूसरों के लिए मिसाल बन रहा है। यहां के किसान सूक्ष्म सिंचाई को अपनाकर हर साल लाखों लीटर पानी बचा रहे हैं। साथ ही दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित कर रहे हैं। विदित हो कि इसी गांव में प्रदेश की पहली जल पंचायत पिछले साल की गई थी। इसके सार्थक परिणाम भी अब सामने आ रहे हैं।
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पानीपत ही नहीं प्रदेश के अधिकतर क्षेत्रों में गिरता भूजल स्तर आज प्रशासन और सरकार के साथ आमजन के लिए भी चिंता का विषय बना हुआ है। ऐसे में समालखा खंड के बिहौली गांव में किसानों का प्रयास दूसरों के लिए भी प्रेरणाप्रद है। यह यूं हीं संभव नहीं हुआ, इसके पीछे ग्रामीणों का संकल्प है, जो जलसंरक्षण के लिए उन्होंने एक साल पहले शुरू किया था और आज भी जारी है। इससे पहले ग्रामीण दूसरे गांवों की तरह सामान्य खेती ही करते थे, लेकिन बीते साल अटल भूजल योजना की टीम ग्रामीणों के लिए प्रेरणा बनी। भले ही अभी समालखा खंड डार्क जोन में है, लेकिन ग्रामीणों का भगीरथ प्रयास जारी रहा तो भूजल के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
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माकाडा के एक्सईएन संदीप सिंह और सिंचाई विभाग के एक्सईएन सुरेश सैनी ने गांव में प्रदेश की पहली जल पंचायत बिहौली गांव में ही की थी। इसके तहत यहां ग्रामीणों को जागरूक किया और उनको सूक्ष्म सिंचाई से होने वाले फायदों को गिनवाया। इसके बाद गांव के पूर्व सरपंच जिले सिंह ने आगे आकर सूक्ष्म सिंचाई को अपनाया। देखते ही देखते अब गांव में करीब 80 एकड़ में सूक्ष्म सिंचाई की जा रही है। किसान ऐसा कर हर सीजन में लाखों लीटर पानी बचा रहे हैं।
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अटल भूजल योजना की टीम ने गांव में जाकर बारीकी से अध्ययन करने के ग्रामीणों को गिरते भूजल के खतरों से भी आगाह किया था। बताया गया था कि अगर यही स्थिति रही तो 25 साल बाद ग्रामीणों को पीने के पानी को भी तरसना पड़ेगा। इसके साथ ही ग्रामीणों को जलसंरक्षण के लिए जागरूक किया था। अनुमानित आकड़ों के आधार पर 2002 में गांव का भूजल स्तर पर 77 फीट था। यह 2022 में 130 फीट पर चला गया। 2047 में यह 187 फीट पर पहुंच जाएगा।
प्रदेश के 14 जिले और 36 ब्लॉक अटल भूजल योजना के अंतर्गत लिए गए हैं। माइक्रो इरीगेशन एंड कमांड एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (मीकाडा ) ने जिले के समालखा व बापौली ब्लॉक की 55 ग्राम पंचायतों को शामिल किया है। किसान सूक्ष्म सिंचाई को अपनाएं तो 30 से 40 प्रतिशत पानी की बचत कर सकते हैं। गन्ने में आधुनिक विधि को अपनाकर 20 से 25, धान में डीएसआर का प्रयोग कर 25 से 30 और गेहूं में शून्य जुताई से 20 से 25 प्रतिशत पानी की बचत कर सकते हैं।

भूजल प्रबंधन को लेकर गांवों में जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। इसके लिए गांवों में जल पंचायत भी की जा रही हैं। इसके साथ ग्राम जल सुरक्षा योजना में प्रस्तावित गतिविधियों का क्रियान्वयन किया जा रहा है। इसका असर बिहौली गांव में दिख रहा है, जहां किसान सूक्ष्म सिंचाई से खेती कर रहे हैं।
संदीप सिंह, कार्यकारी अभियंता, मीकाडा।
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