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पानी बना जहर, डायरिया का कहर
अमर उजाला ब्यूरो/पानीपत
Updated Tue, 28 Jul 2015 12:30 AM IST
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बतरा कॉलोनी के लोग जिस पानी को जीवन मानते थे। वहीं पानी एक बार फिर उनके बच्चों की मौत का कारण बन गया।
यहां पानी पीने से एक या दो नहीं, बल्कि पांच बच्चों की मौत हो गई और करीब दो सौ लोग डायरिया से ग्रस्त हो गए। कॉलोनी में दूसरी बार ब्रेक हुए डायरिया से हड़कंप की स्थिति है। कॉलोनी में इसी तरह कई साल पहले भी ब्रेक हुए डायरिया से कई बच्चों की मौत हो गई थी।
डायरिया से कॉलोनी के सैकड़ों लोगों के बीमार होने की सूचना मिलने पर स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन में हड़कंप मच गया।
कुछ ही देर में स्वास्थ्य और जन स्वास्थ्य विभाग की गाड़ियां पहुंचीं। विभागीय टीमों ने मरीजों को सिविल अस्पताल में दाखिल कराना और बाकी लोगों को जागरूक करना शुरू कर दिया। विभागीय टीम जैसे-जैसे आगे बढ़ी, डायरिया से पीड़ितों की संख्या वैसे-वैसे बढ़ती गई।
विभागीय टीमों के कॉलोनी में डायरिया से बच्चों की मौत होने की जानकारी मिलने पर पांव के तले की जमीन निकल गई और विभाग ने उनकी डिटेल निकलवाई। इनमें से तीन बच्चों के बारे में ही जानकारी हाथ लग सकी।
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वहीं, विभाग ने डायरिया से ग्रस्त बच्चों और महिलाओं की पहचान कर सिविल अस्पताल में दाखिल कराया। कॉलोनीवासियों ने बताया कि 24 और 26 जुलाई से इस तरह की बीमारी आई। लोगों ने अपने बच्चों के स्थानीय क्लीनिक और निजी अस्पताल में इलाज कराया। लेकिन बीती देर रात को बीमारी बढ़ गई और पूरे के पूरे परिवार इससे ग्रस्त हो गए।
सिविल अस्पताल की इमरजेंसी में एक साथ तेरह बच्चों को लाया गया। इसके बाद एक बार तो हड़कंप मच गया। स्वास्थ्य अधिकारियों ने इमरजेंसी में दूसरे डॉक्टरों की भी ड्यूटी लगा दी। शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. आलोक जैन और चमड़ी रोग विशेषज्ञ डॉ. राघवेंद्र ने कई डॉक्टरों के साथ मिलकर बच्चों का इलाज किया और कई घंटे तक इलाज किया।
उनके सामान्य होने के बाद कमरों में शिफ्ट किया और इलाज में सावधानी बरती।
बतरा कॉलोनी में डायरिया के असर से पांच बच्चों की मौत हो गई। इनमें आठ साल का सतीश, एक साल की रेखा, एक साल का आयूब और पंद्रह दिन का अजय और सुनील हैं। इनमें से अजय की मौत होने के दूसरे कारण माने जा रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग ने फिलहाल दो बच्चों की मौत डायरिया से होना माना है। वहीं, कई लोग बच्चों की मौत के बाद चुपचाप कॉलोनी छोड़कर चले गए।
बतरा कॉलोनी में डायरिया का असर इतना है कि कई परिवार पूरे के पूरे ग्रस्त हो गए। उनके घर में खाना बनाने या उनकी देखभाल करने वाला भी कोई नहीं है। जलालाबाद यूपी निवासी अरविंद अपने परिवार समेत यहां रह रहा था।
उसका छठी कक्षा में पढ़ने वाले लड़के आशिफ, पत्नी कांती को छोड़ लड़के अभिषेक और दोनों बेटियों अनामिका और अंजली को डायरिया हो गया। वह सबको लेकर सिविल अस्पताल में पहुंचा। हरदोई यूपी निवासी सूरज तीन माह पहले ही पानीपत में आया था।
वह अपने बड़े भाई पंकज के पास बतरा कॉलोनी में आकर रहने लगा। उसके चार माह के बेटे अंशुल का डायरिया हो गया। सूरज ने बताया कि वह इसके बाद काफी चिंतित है। नारायण की बेटी नेहा और सुरेश की बेटी प्रियांती को भी डायरिया के कारण अस्पताल में दाखिल कराया है।
सिविल अस्पताल में डायरिया के ग्रस्त तेरह मरीजों को दाखिल कराया है। इसके अलावा काफी लोगों को आसपास के निजी अस्पतालों में दाखिल कराया है।
डायरिया फैलने के बाद बतरा कॉलोनी में दहशत मच गई। लोगों का सप्लाई का पानी पीने में मन कतराने लगा। कॉलोनीवासी कमलेंद्र, कृष्ण और राजबीर ने बताया कि कॉलोनी में कई साल पहले भी गंदे पानी की सप्लाई से डायरिया फैल गया था।
उस वक्त भी कई बच्चों की मौत हो गई थी और काफी लोगों को डायरिया हुआ था। वहीं दो साल पहले शहर की अशोक विहार कॉलोनी में भी इसी तरह बीमारी फैल गई थी।
बतरा कॉलोनी में पिछले कई दिनों से लोगों का मसीहा बना झोलाछाप डॉक्टर सोमवार को फरार हो गया। हुआ यूं कि कॉलोनी के डायरिया से पीड़ित लोग झोलाछाप डॉक्टर के पास गए थे। वह भी उनका लगातार इलाज कर रहा था। सोमवार को डायरिया ब्रेक होने के बाद सीएमओ डॉ. इंद्रजीत धनखड़ कॉलोनी में पहुंचे।
सीएमओ को देखकर झोलाछाप डॉक्टर को पसीना आ गया। वह मरीजों का इलाज छोड़कर छत के रास्ते भाग निकला। कॉलोनीवासी काफी देर तक माजरा समझ नहीं सके।
स्वास्थ्य विभाग बतरा कॉलोनी में डायरिया की रोकथाम के लिए मैदान में डट गया। विभाग ने चालीस कर्मियों की टीम कॉलोनी में लगा दी। स्वास्थ्यकर्मियों ने घर-घर जाकर ओआरएस के पैकेट बांटे और बच्चों और महिलाओं के बारे में जाना।
विभाग की ओर से क्लोरिन की करीब एक लाख गोलियां भी बांटी। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने घरों और कॉलोनी से पानी के सैंपल भरे। इनमें से कई सैंपल प्राथमिक बार में ही फेल हो गए। स्वास्थ्य विभाग ने जन स्वास्थ्य विभाग को भी शुद्ध पेयजल सप्लाई की हिदायत दी है
जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग को जो कार्य बहुत पहले कर देना चाहिए था, वह काम आज डायरिया फैलने के बाद किया। विभाग की टीम एक्सईएन रमेश कुमार के नेतृत्व में पहुंची। उन्होंने ट्यूबवेल और घरों में जाने वाले पानी से सैंपल भरे।
इनमें काफी अंतर मिला। विभागीय टीम ने बतरा कॉलोनी से 20 अवैध कनेक्शन भी काटे। विभाग इन कनेक्शनों को पहले काट देता तो आज किसी की जान पर नहीं बनती।
एक व्यक्ति को जीवित रहने के लिए हर रोज कम से कम दो लीटर पानी पीना चाहिए। मनुष्य अपने पूरे जीवनकाल के दौरान औसतन 75 हजार लीटर पानी पीता है। वयस्क के शरीर में पानी की कुल मात्रा औसतन 37 लीटर होती है।
बतरा कॉलोनी में डायरिया ब्रेक हुआ है और यह सब दो दिन में ही हो गया। विभाग की पूरी टीम कॉलोनी में है। एक एंबुलेंस कॉलोनी में तैनात कर दी है और घर-घर जाकर ओआरएस के पैकेट और क्लोरिन की टैबलेट बांट दी गई हैं। विभाग के सामने कॉलोनी के तीन बच्चों की मौत होना आया है। इनमें से दो की मौत डायरिया से होना पाया है। कॉलोनी में तेरह लोग डायरिया से ग्रस्त मिले हैं। इनको सिविल अस्पताल में उपचार के लिए दाखिल किया गया है। कॉलोनी में फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है।
डॉ. इंद्रजीत धनखड़, सीएमओ पानीपत
बतरा कॉलोनी में अधिकतर अवैध कनेक्शन हैं। ऐसे लोगों की अनदेखी से पाइप टूट जाता है और नालियों का गंदा पानी सप्लाई में चला जाता है। विभागीय टीम ने कॉलोनी में करीब 20 कनेक्शन अवैध मिले हैं। इन सबको काट दिया गया है और लोगों को चेतावनी दी है।
रमेश कुमार, एक्सईएन, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी पानीपत
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यहां पानी पीने से एक या दो नहीं, बल्कि पांच बच्चों की मौत हो गई और करीब दो सौ लोग डायरिया से ग्रस्त हो गए। कॉलोनी में दूसरी बार ब्रेक हुए डायरिया से हड़कंप की स्थिति है। कॉलोनी में इसी तरह कई साल पहले भी ब्रेक हुए डायरिया से कई बच्चों की मौत हो गई थी।
डायरिया से कॉलोनी के सैकड़ों लोगों के बीमार होने की सूचना मिलने पर स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन में हड़कंप मच गया।
कुछ ही देर में स्वास्थ्य और जन स्वास्थ्य विभाग की गाड़ियां पहुंचीं। विभागीय टीमों ने मरीजों को सिविल अस्पताल में दाखिल कराना और बाकी लोगों को जागरूक करना शुरू कर दिया। विभागीय टीम जैसे-जैसे आगे बढ़ी, डायरिया से पीड़ितों की संख्या वैसे-वैसे बढ़ती गई।
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विभागीय टीमों के कॉलोनी में डायरिया से बच्चों की मौत होने की जानकारी मिलने पर पांव के तले की जमीन निकल गई और विभाग ने उनकी डिटेल निकलवाई। इनमें से तीन बच्चों के बारे में ही जानकारी हाथ लग सकी।
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वहीं, विभाग ने डायरिया से ग्रस्त बच्चों और महिलाओं की पहचान कर सिविल अस्पताल में दाखिल कराया। कॉलोनीवासियों ने बताया कि 24 और 26 जुलाई से इस तरह की बीमारी आई। लोगों ने अपने बच्चों के स्थानीय क्लीनिक और निजी अस्पताल में इलाज कराया। लेकिन बीती देर रात को बीमारी बढ़ गई और पूरे के पूरे परिवार इससे ग्रस्त हो गए।
सिविल अस्पताल की इमरजेंसी में एक साथ तेरह बच्चों को लाया गया। इसके बाद एक बार तो हड़कंप मच गया। स्वास्थ्य अधिकारियों ने इमरजेंसी में दूसरे डॉक्टरों की भी ड्यूटी लगा दी। शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. आलोक जैन और चमड़ी रोग विशेषज्ञ डॉ. राघवेंद्र ने कई डॉक्टरों के साथ मिलकर बच्चों का इलाज किया और कई घंटे तक इलाज किया।
उनके सामान्य होने के बाद कमरों में शिफ्ट किया और इलाज में सावधानी बरती।
बतरा कॉलोनी में डायरिया के असर से पांच बच्चों की मौत हो गई। इनमें आठ साल का सतीश, एक साल की रेखा, एक साल का आयूब और पंद्रह दिन का अजय और सुनील हैं। इनमें से अजय की मौत होने के दूसरे कारण माने जा रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग ने फिलहाल दो बच्चों की मौत डायरिया से होना माना है। वहीं, कई लोग बच्चों की मौत के बाद चुपचाप कॉलोनी छोड़कर चले गए।
बतरा कॉलोनी में डायरिया का असर इतना है कि कई परिवार पूरे के पूरे ग्रस्त हो गए। उनके घर में खाना बनाने या उनकी देखभाल करने वाला भी कोई नहीं है। जलालाबाद यूपी निवासी अरविंद अपने परिवार समेत यहां रह रहा था।
उसका छठी कक्षा में पढ़ने वाले लड़के आशिफ, पत्नी कांती को छोड़ लड़के अभिषेक और दोनों बेटियों अनामिका और अंजली को डायरिया हो गया। वह सबको लेकर सिविल अस्पताल में पहुंचा। हरदोई यूपी निवासी सूरज तीन माह पहले ही पानीपत में आया था।
वह अपने बड़े भाई पंकज के पास बतरा कॉलोनी में आकर रहने लगा। उसके चार माह के बेटे अंशुल का डायरिया हो गया। सूरज ने बताया कि वह इसके बाद काफी चिंतित है। नारायण की बेटी नेहा और सुरेश की बेटी प्रियांती को भी डायरिया के कारण अस्पताल में दाखिल कराया है।
सिविल अस्पताल में डायरिया के ग्रस्त तेरह मरीजों को दाखिल कराया है। इसके अलावा काफी लोगों को आसपास के निजी अस्पतालों में दाखिल कराया है।
डायरिया फैलने के बाद बतरा कॉलोनी में दहशत मच गई। लोगों का सप्लाई का पानी पीने में मन कतराने लगा। कॉलोनीवासी कमलेंद्र, कृष्ण और राजबीर ने बताया कि कॉलोनी में कई साल पहले भी गंदे पानी की सप्लाई से डायरिया फैल गया था।
उस वक्त भी कई बच्चों की मौत हो गई थी और काफी लोगों को डायरिया हुआ था। वहीं दो साल पहले शहर की अशोक विहार कॉलोनी में भी इसी तरह बीमारी फैल गई थी।
बतरा कॉलोनी में पिछले कई दिनों से लोगों का मसीहा बना झोलाछाप डॉक्टर सोमवार को फरार हो गया। हुआ यूं कि कॉलोनी के डायरिया से पीड़ित लोग झोलाछाप डॉक्टर के पास गए थे। वह भी उनका लगातार इलाज कर रहा था। सोमवार को डायरिया ब्रेक होने के बाद सीएमओ डॉ. इंद्रजीत धनखड़ कॉलोनी में पहुंचे।
सीएमओ को देखकर झोलाछाप डॉक्टर को पसीना आ गया। वह मरीजों का इलाज छोड़कर छत के रास्ते भाग निकला। कॉलोनीवासी काफी देर तक माजरा समझ नहीं सके।
स्वास्थ्य विभाग बतरा कॉलोनी में डायरिया की रोकथाम के लिए मैदान में डट गया। विभाग ने चालीस कर्मियों की टीम कॉलोनी में लगा दी। स्वास्थ्यकर्मियों ने घर-घर जाकर ओआरएस के पैकेट बांटे और बच्चों और महिलाओं के बारे में जाना।
विभाग की ओर से क्लोरिन की करीब एक लाख गोलियां भी बांटी। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने घरों और कॉलोनी से पानी के सैंपल भरे। इनमें से कई सैंपल प्राथमिक बार में ही फेल हो गए। स्वास्थ्य विभाग ने जन स्वास्थ्य विभाग को भी शुद्ध पेयजल सप्लाई की हिदायत दी है
जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग को जो कार्य बहुत पहले कर देना चाहिए था, वह काम आज डायरिया फैलने के बाद किया। विभाग की टीम एक्सईएन रमेश कुमार के नेतृत्व में पहुंची। उन्होंने ट्यूबवेल और घरों में जाने वाले पानी से सैंपल भरे।
इनमें काफी अंतर मिला। विभागीय टीम ने बतरा कॉलोनी से 20 अवैध कनेक्शन भी काटे। विभाग इन कनेक्शनों को पहले काट देता तो आज किसी की जान पर नहीं बनती।
एक व्यक्ति को जीवित रहने के लिए हर रोज कम से कम दो लीटर पानी पीना चाहिए। मनुष्य अपने पूरे जीवनकाल के दौरान औसतन 75 हजार लीटर पानी पीता है। वयस्क के शरीर में पानी की कुल मात्रा औसतन 37 लीटर होती है।
बतरा कॉलोनी में डायरिया ब्रेक हुआ है और यह सब दो दिन में ही हो गया। विभाग की पूरी टीम कॉलोनी में है। एक एंबुलेंस कॉलोनी में तैनात कर दी है और घर-घर जाकर ओआरएस के पैकेट और क्लोरिन की टैबलेट बांट दी गई हैं। विभाग के सामने कॉलोनी के तीन बच्चों की मौत होना आया है। इनमें से दो की मौत डायरिया से होना पाया है। कॉलोनी में तेरह लोग डायरिया से ग्रस्त मिले हैं। इनको सिविल अस्पताल में उपचार के लिए दाखिल किया गया है। कॉलोनी में फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है।
डॉ. इंद्रजीत धनखड़, सीएमओ पानीपत
बतरा कॉलोनी में अधिकतर अवैध कनेक्शन हैं। ऐसे लोगों की अनदेखी से पाइप टूट जाता है और नालियों का गंदा पानी सप्लाई में चला जाता है। विभागीय टीम ने कॉलोनी में करीब 20 कनेक्शन अवैध मिले हैं। इन सबको काट दिया गया है और लोगों को चेतावनी दी है।
रमेश कुमार, एक्सईएन, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी पानीपत