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न्याय दिलाने का पहला कदम है प्राथमिकी, अपराध होने पर हर हाल में दर्ज की जाए : राजेश चौधरी
Tue, 05 May 2026 06:03 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
Updated Tue, 05 May 2026 06:03 AM IST
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पुलिस सभागार में प्राथमिकी दर्ज करने की बारीकियों के बारे में बताते उप निदेशक अभियोजन। पुलिस
पानीपत। पुलिसकर्मियों को प्राथमिकी दर्ज करने की प्रक्रिया और बारीकियों से अवगत कराने के लिए सोमवार को विशेष प्रशिक्षण सत्र आयोजित किया गा। जिसमें उप निदेशक अभियोजन राजेश चौधरी ने पुलिसकर्मियों को प्राथमिकी दर्ज करने के नियमों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि संज्ञेय अपराध होने पर हर हाल में प्राथमिकी दर्ज की जानी अनिवार्य है। ऐसा नहीं करने वाले पुलिसकर्मी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जा सकती है। कुछ मामलों में जांच करने का प्रावधान है। ऐसे मामलों में जांच सात दिन में हर हाल मेंं पूरी होनी चाहिए।
सोमवार को एसपी भूपेंद्र सिंह की अध्यक्षता में सचिवालय स्थित पुलिस सभागार में प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया गया। उप निदेशक अभियोजन राजेश चौधरी ने बताया कि सही, निष्पक्ष एंव समयबद्ध तरीके से प्राथमिकी दर्ज करना पुलिस की प्राथमिक जिम्मेदारी है, और यह न्याय प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है। प्राथमिकी दर्ज करते समय सूचना देने वाले की बात को सही रूप में लिखना, उसकी प्रति निःशुल्क उपलब्ध कराना तथा केस से संबंधित सभी आवश्यक विवरण का उल्लेख करना आवश्यक है। कुछ अपवाद जैसे घरेलू मामले, आर्थिक अपराध, करप्सन, चिकित्सा लापरवाही के मामलों में जांच करके एफआईआर दर्ज की जा सकती है। लेकिन यह जांच सात दिन में पूरी होनी चाहिए।
एसपी भूपेंद्र सिंह ने कहा कि प्राथमिकी दर्ज करना दर्ज करना केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि न्याय दिलाने की दिशा में पहला और सबसे महत्वपूर्ण कदम है। यदि यह प्रक्रिया सही और पारदर्शी तरीके से की जाती है, तो इससे न केवल जांच की गुणवत्ता बेहतर होती है। साथ ही आमजन का पुलिस के प्रति विश्वास भी मजबूत होता है। ब्यूरो
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-- -- -मुख्य बिंदु-- -
अनिवार्य पंजीकरण : यदि प्राप्त जानकारी संज्ञेय अपराध को दर्शाती है, तो एफआईआर दर्ज करना अनिवार्य है।
प्रारंभिक जांच : केवल तभी अनुमति है जब यह स्पष्ट न हो कि संज्ञेय अपराध हुआ है या नहीं।
समय सीमा : यदि प्रारंभिक जांच होती है, तो इसे 7 दिनों के भीतर पूरा किया जाना चाहिए।
दंडात्मक कार्रवाई : एफआईआर दर्ज न करने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
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सोमवार को एसपी भूपेंद्र सिंह की अध्यक्षता में सचिवालय स्थित पुलिस सभागार में प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया गया। उप निदेशक अभियोजन राजेश चौधरी ने बताया कि सही, निष्पक्ष एंव समयबद्ध तरीके से प्राथमिकी दर्ज करना पुलिस की प्राथमिक जिम्मेदारी है, और यह न्याय प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है। प्राथमिकी दर्ज करते समय सूचना देने वाले की बात को सही रूप में लिखना, उसकी प्रति निःशुल्क उपलब्ध कराना तथा केस से संबंधित सभी आवश्यक विवरण का उल्लेख करना आवश्यक है। कुछ अपवाद जैसे घरेलू मामले, आर्थिक अपराध, करप्सन, चिकित्सा लापरवाही के मामलों में जांच करके एफआईआर दर्ज की जा सकती है। लेकिन यह जांच सात दिन में पूरी होनी चाहिए।
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एसपी भूपेंद्र सिंह ने कहा कि प्राथमिकी दर्ज करना दर्ज करना केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि न्याय दिलाने की दिशा में पहला और सबसे महत्वपूर्ण कदम है। यदि यह प्रक्रिया सही और पारदर्शी तरीके से की जाती है, तो इससे न केवल जांच की गुणवत्ता बेहतर होती है। साथ ही आमजन का पुलिस के प्रति विश्वास भी मजबूत होता है। ब्यूरो
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अनिवार्य पंजीकरण : यदि प्राप्त जानकारी संज्ञेय अपराध को दर्शाती है, तो एफआईआर दर्ज करना अनिवार्य है।
प्रारंभिक जांच : केवल तभी अनुमति है जब यह स्पष्ट न हो कि संज्ञेय अपराध हुआ है या नहीं।
समय सीमा : यदि प्रारंभिक जांच होती है, तो इसे 7 दिनों के भीतर पूरा किया जाना चाहिए।
दंडात्मक कार्रवाई : एफआईआर दर्ज न करने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।