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बैंक को ताला जड़ फसल बीमा पॉलिसी का किया विरोध
ब्यूरो/अमर उजाला,पानीपत
Updated Thu, 04 Aug 2016 12:10 AM IST
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फसल बीमा पॉलिसी
- फोटो : ब्यूरो
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मतलौडा। भारतीय किसान यूनियन पानीपत इकाई के पदाधिकारियों ने स्थानीय को-ऑपरेटिव बैंक पर ताला जड़कर दो घंटे तक केंद्र सरकार की फसल बीमा योजना का विरोध प्रदर्शन किया और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
किसान यूनियन के जिला प्रधान जयकरण कादियान व उप प्रधान बिंटू मलिक के नेतृत्व में किसानों के सहयोग से बुधवार दोपहर 12 बजे स्थानीय को-ऑपरेटिव के कर्मचारियों को अंदर बैठे बैठाए बाहर से बैंक के गेट पर ताला लगा दिया। उन्होंने केंद्र सरकार की बीमा पॉलिसी का विरोध किया।
प्रधान जयकरण कादियान व बिंटू मलिक ने कहा कि सरकार ने एक एकड़ फसल के दाम 25 हजार रुपये तय किए हैं और इसका प्रीमियम 500 रुपये लिया जा रहा है। जिसकी अवधि मात्र 6 माह है। उन्होंने उदाहरण दिया कि एक मोटरसाइकिल का बीमा मात्र आठ सौ रुपये में होता है। इसकी वैधता एक साल तक होती है।
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बीमा कंपनी पूरी पॉलिसी की जानकारी और पैसों की रसीद देती है और चोरी व आगजनी होने की सूरत में उसको बाइक की पूरी कीमत दी जाती है। उन्होंने कहा कि फसल बीमा पॉलिसी की जानकारी देने वाला कोई नही है। एक निजी कंपनी को ठेका दिया गया है। जबकि सरकार एजेंट का काम कर रही है।
इस पॉलिसी में गांव को इकाई माना गया है। यह सब गलत है। प्राकृतिक आपदा में गांव की फसल कहीं ठीक रहती हैं तो कहीं खराब हो जाती है। आगजनी और पाले का कोई क्लेम नहीं दिया जाता। ऐसे में किसान को इस पॉलिसी का कोई फायदा होने वाला नहीं है। सरकार को इसमें संशोधन करना चाहिए।
किसान यूनियन ने दोपहर बाद दो बजे धरना समाप्त किया। धरने के दौरान किसान यूनियन के लोगों अंदर बैठे बैंक कर्मचारियों से पानी मांगा, लेकिन बैंककर्मियों ने उनको पानी तक नहीं दिया।
शायद बैंक कर्मचारी इस बात से खफा थे कि धरने के समय बैंक को ताला लगाने के कारण दो घंटे तक कोई भी कर्मचारी व अधिकारी अंदर बाहर नहीं आ-जा सका। इस अवसर पर ओमप्रकाश, प्रेम सिंह, ईश्वर, कृष्ण कुमार, सतपाल सिंह, सत्यनारायण बांगड़, सुरत सिंह, रमेश चंद्र व चांद सिंह मौजूद रहे।
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किसान यूनियन के जिला प्रधान जयकरण कादियान व उप प्रधान बिंटू मलिक के नेतृत्व में किसानों के सहयोग से बुधवार दोपहर 12 बजे स्थानीय को-ऑपरेटिव के कर्मचारियों को अंदर बैठे बैठाए बाहर से बैंक के गेट पर ताला लगा दिया। उन्होंने केंद्र सरकार की बीमा पॉलिसी का विरोध किया।
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प्रधान जयकरण कादियान व बिंटू मलिक ने कहा कि सरकार ने एक एकड़ फसल के दाम 25 हजार रुपये तय किए हैं और इसका प्रीमियम 500 रुपये लिया जा रहा है। जिसकी अवधि मात्र 6 माह है। उन्होंने उदाहरण दिया कि एक मोटरसाइकिल का बीमा मात्र आठ सौ रुपये में होता है। इसकी वैधता एक साल तक होती है।
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बीमा कंपनी पूरी पॉलिसी की जानकारी और पैसों की रसीद देती है और चोरी व आगजनी होने की सूरत में उसको बाइक की पूरी कीमत दी जाती है। उन्होंने कहा कि फसल बीमा पॉलिसी की जानकारी देने वाला कोई नही है। एक निजी कंपनी को ठेका दिया गया है। जबकि सरकार एजेंट का काम कर रही है।
इस पॉलिसी में गांव को इकाई माना गया है। यह सब गलत है। प्राकृतिक आपदा में गांव की फसल कहीं ठीक रहती हैं तो कहीं खराब हो जाती है। आगजनी और पाले का कोई क्लेम नहीं दिया जाता। ऐसे में किसान को इस पॉलिसी का कोई फायदा होने वाला नहीं है। सरकार को इसमें संशोधन करना चाहिए।
किसान यूनियन ने दोपहर बाद दो बजे धरना समाप्त किया। धरने के दौरान किसान यूनियन के लोगों अंदर बैठे बैंक कर्मचारियों से पानी मांगा, लेकिन बैंककर्मियों ने उनको पानी तक नहीं दिया।
शायद बैंक कर्मचारी इस बात से खफा थे कि धरने के समय बैंक को ताला लगाने के कारण दो घंटे तक कोई भी कर्मचारी व अधिकारी अंदर बाहर नहीं आ-जा सका। इस अवसर पर ओमप्रकाश, प्रेम सिंह, ईश्वर, कृष्ण कुमार, सतपाल सिंह, सत्यनारायण बांगड़, सुरत सिंह, रमेश चंद्र व चांद सिंह मौजूद रहे।