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Panipat News: प्रदूषण फैलाती मिली फैक्टरी, उपायुक्त का पांच घंटे का निरीक्षण
Wed, 10 Jun 2026 02:42 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
Updated Wed, 10 Jun 2026 02:42 AM IST
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एसटीपी के निरीक्षण के समय शाेधित पानी देखते उपायुक्त डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ। स्रोत : सूचना विभ
- फोटो : Archive
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माई सिटी रिपोर्टर
पानीपत। औद्योगिक नगरी पानीपत में यमुना नदी को दूषित करने वाले ड्रेन और नालों के पानी की समस्या पर उपायुक्त हरीश कुमार वशिष्ट ने मंगलवार को सख्त रुख अपनाया। उन्होंने कार्यभार संभालने के दूसरे दिन करीब पांच घंटे तक यमुना और इसमें मिलने वाली ड्रेनों का व्यापक निरीक्षण किया। इस दौरान कई खामियां पकड़ीं। साथ ही पुराने औद्योगिक क्षेत्र के दौरे के दौरान एक फैक्ट्री को प्रदूषण फैलाते हुए पकड़ा गया। उपायुक्त ने इस पर तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए।
निरीक्षण क दौरान कई स्थानों पर जल प्रदूषण नियंत्रण और शोधन व्यवस्थाओं में खामियां देखकर उपायुक्त ने अधिकारियों को इन कमियों को दूर करने और प्रदूषण फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए।
उपायुक्त वशिष्ट ने बाबरपुर मंडी के नजदीक राष्ट्रीय राजमार्ग 44 पर ड्रेन नंबर-दो क्रॉसिंग ब्रिज से जांच शुरू की। उन्होंने ड्रेन में आ रहे दूषित और जहरीले पानी पर गंभीरता से संज्ञान लिया। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि यदि कोई औद्योगिक इकाई या अन्य स्रोत बिना उपचारित पानी ड्रेन में छोड़ रहा है तो उस पर नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाए।
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ददलाना गांव के पास एचएसआईआईडीसी के नए औद्योगिक क्षेत्र में स्थित 2.5 मिलियन लीटर प्रतिदिन क्षमता के सामान्य अपशिष्ट जल शोधन संयंत्र (सीईटीपी) का भी निरीक्षण किया गया। उपायुक्त ने संयंत्र की कार्यक्षमता और प्रभावशीलता बढ़ाने के निर्देश दिए। शिमला गुजरान और खोजकीपुर के पास ड्रेन नंबर-एक और ड्रेन नंबर-दो के साथ यमुना नदी के मिलन बिंदु का भी जायजा लिया गया।
उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी स्थिति में बिना उपचारित प्रदूषित जल यमुना नदी में नहीं आना चाहिए। खोजकीपुर क्षेत्र में यमुना के बैराज और पिलरों की वर्तमान स्थिति की भी जानकारी ली गई।
जल शोधन संयंत्रों का जायजा
उपायुक्त ने जाटल सड़क स्थित 20 मिलियन लीटर प्रतिदिन मल शोधन संयंत्र (एसटीपी) की कार्यप्रणाली का अवलोकन किया। उन्होंने शोधन प्रक्रिया के बाद निकलने वाले जल की गुणवत्ता से संबंधित जैव रासायनिक ऑक्सीजन मांग (बीओडी), रासायनिक ऑक्सीजन मांग (सीओडी) और कुल घुलित ठोस (टीडीएस) मानकों की जानकारी ली। इंडेक्स प्लान की समीक्षा भी की गई। इसके साथ ही सातों सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांटों की प्रगति और कार्य क्षमता की जानकारी भी ली गई।
ददलाना क्षेत्र में अपशिष्ट जल शोधन संयंत्र (ईटीपी) और अन्य जल शोधन संसाधनों के निरीक्षण के दौरान कुछ व्यवस्थाओं पर उपायुक्त ने नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि प्रदूषण नियंत्रण और जल संरक्षण के क्षेत्र में बड़े स्तर पर कार्य करने की आवश्यकता है।
औद्योगिक प्रदूषण पर सख्त चेतावनी
उपायुक्त वशिष्ट ने औद्योगिक इकाइयों को चेतावनी दी कि ड्रेन में फैक्ट्री या नालों का पानी सीधे छोड़ने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। पंपिंग स्टेशन का भी निरीक्षण किया गया। इसकी वर्तमान उपयोगिता, क्षमता और बेहतर संचालन की संभावनाओं पर चर्चा हुई। इसे अधिक प्रभावी ढंग से संचालित करने के निर्देश दिए गए।
छाजपुर खुर्द और रसलापुर गांव के नजदीक टैंकर प्वाइंट का भी निरीक्षण किया गया और आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए। उपायुक्त हरीश कुमार वशिष्ट ने स्पष्ट किया कि प्रदूषण नियंत्रण और जल संरक्षण के प्रयासों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने संबंधित अधिकारियों और इकाइयों को संसाधनों का बेहतर और प्रभावी उपयोग करने की सलाह दी।
उपायुक्त ने कहा कि इस दिशा में कोई भी चूक होने पर संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। यमुना नदी का प्रदूषण एक गंभीर पर्यावरणीय चिंता का विषय है। इस मौके पर अतिरिक्त उपायुक्त अंकित चौकसे, पानीपत के उपमंडल अधिकारी मनदीप कुमार और समालखा के उपमंडल अधिकारी अमित कुमार मौजूद थे। सिंचाई विभाग के कार्यकारी अभियंता सुरेश सैनी और बीडीपीओ शक्ति सिंह भी निरीक्षण दल में शामिल थे।
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पानीपत। औद्योगिक नगरी पानीपत में यमुना नदी को दूषित करने वाले ड्रेन और नालों के पानी की समस्या पर उपायुक्त हरीश कुमार वशिष्ट ने मंगलवार को सख्त रुख अपनाया। उन्होंने कार्यभार संभालने के दूसरे दिन करीब पांच घंटे तक यमुना और इसमें मिलने वाली ड्रेनों का व्यापक निरीक्षण किया। इस दौरान कई खामियां पकड़ीं। साथ ही पुराने औद्योगिक क्षेत्र के दौरे के दौरान एक फैक्ट्री को प्रदूषण फैलाते हुए पकड़ा गया। उपायुक्त ने इस पर तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए।
निरीक्षण क दौरान कई स्थानों पर जल प्रदूषण नियंत्रण और शोधन व्यवस्थाओं में खामियां देखकर उपायुक्त ने अधिकारियों को इन कमियों को दूर करने और प्रदूषण फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए।
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उपायुक्त वशिष्ट ने बाबरपुर मंडी के नजदीक राष्ट्रीय राजमार्ग 44 पर ड्रेन नंबर-दो क्रॉसिंग ब्रिज से जांच शुरू की। उन्होंने ड्रेन में आ रहे दूषित और जहरीले पानी पर गंभीरता से संज्ञान लिया। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि यदि कोई औद्योगिक इकाई या अन्य स्रोत बिना उपचारित पानी ड्रेन में छोड़ रहा है तो उस पर नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाए।
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ददलाना गांव के पास एचएसआईआईडीसी के नए औद्योगिक क्षेत्र में स्थित 2.5 मिलियन लीटर प्रतिदिन क्षमता के सामान्य अपशिष्ट जल शोधन संयंत्र (सीईटीपी) का भी निरीक्षण किया गया। उपायुक्त ने संयंत्र की कार्यक्षमता और प्रभावशीलता बढ़ाने के निर्देश दिए। शिमला गुजरान और खोजकीपुर के पास ड्रेन नंबर-एक और ड्रेन नंबर-दो के साथ यमुना नदी के मिलन बिंदु का भी जायजा लिया गया।
उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी स्थिति में बिना उपचारित प्रदूषित जल यमुना नदी में नहीं आना चाहिए। खोजकीपुर क्षेत्र में यमुना के बैराज और पिलरों की वर्तमान स्थिति की भी जानकारी ली गई।
जल शोधन संयंत्रों का जायजा
उपायुक्त ने जाटल सड़क स्थित 20 मिलियन लीटर प्रतिदिन मल शोधन संयंत्र (एसटीपी) की कार्यप्रणाली का अवलोकन किया। उन्होंने शोधन प्रक्रिया के बाद निकलने वाले जल की गुणवत्ता से संबंधित जैव रासायनिक ऑक्सीजन मांग (बीओडी), रासायनिक ऑक्सीजन मांग (सीओडी) और कुल घुलित ठोस (टीडीएस) मानकों की जानकारी ली। इंडेक्स प्लान की समीक्षा भी की गई। इसके साथ ही सातों सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांटों की प्रगति और कार्य क्षमता की जानकारी भी ली गई।
ददलाना क्षेत्र में अपशिष्ट जल शोधन संयंत्र (ईटीपी) और अन्य जल शोधन संसाधनों के निरीक्षण के दौरान कुछ व्यवस्थाओं पर उपायुक्त ने नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि प्रदूषण नियंत्रण और जल संरक्षण के क्षेत्र में बड़े स्तर पर कार्य करने की आवश्यकता है।
औद्योगिक प्रदूषण पर सख्त चेतावनी
उपायुक्त वशिष्ट ने औद्योगिक इकाइयों को चेतावनी दी कि ड्रेन में फैक्ट्री या नालों का पानी सीधे छोड़ने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। पंपिंग स्टेशन का भी निरीक्षण किया गया। इसकी वर्तमान उपयोगिता, क्षमता और बेहतर संचालन की संभावनाओं पर चर्चा हुई। इसे अधिक प्रभावी ढंग से संचालित करने के निर्देश दिए गए।
छाजपुर खुर्द और रसलापुर गांव के नजदीक टैंकर प्वाइंट का भी निरीक्षण किया गया और आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए। उपायुक्त हरीश कुमार वशिष्ट ने स्पष्ट किया कि प्रदूषण नियंत्रण और जल संरक्षण के प्रयासों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने संबंधित अधिकारियों और इकाइयों को संसाधनों का बेहतर और प्रभावी उपयोग करने की सलाह दी।
उपायुक्त ने कहा कि इस दिशा में कोई भी चूक होने पर संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। यमुना नदी का प्रदूषण एक गंभीर पर्यावरणीय चिंता का विषय है। इस मौके पर अतिरिक्त उपायुक्त अंकित चौकसे, पानीपत के उपमंडल अधिकारी मनदीप कुमार और समालखा के उपमंडल अधिकारी अमित कुमार मौजूद थे। सिंचाई विभाग के कार्यकारी अभियंता सुरेश सैनी और बीडीपीओ शक्ति सिंह भी निरीक्षण दल में शामिल थे।

एसटीपी के निरीक्षण के समय शाेधित पानी देखते उपायुक्त डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ। स्रोत : सूचना विभ- फोटो : Archive