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Panipat News: पूर्व सैनिकों की सरकारी कार्यालयों और थानों में नहीं सुनवाई

Fri, 26 Jun 2026 02:53 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत Updated Fri, 26 Jun 2026 02:53 AM IST
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Ex-servicemen's grievances go unheard in government offices and police stations.
माई सिटी रिपोर्टरपानीपत। देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले पूर्व सैनिकों को हक और न्याय के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। जिला प्रशासन और पुलिस विभाग की अनदेखी के चलते पूर्व सैनिकों की समस्याओं का समय पर समाधान नहीं हो पा रहा है।
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आलम यह है कि नियमों के बावजूद उपायुक्त कार्यालय में पूर्व सैनिकों की शिकायतों को दर्ज करने के लिए अलग से रजिस्टर तक नहीं लगाया गया है, जिससे उनकी सुनवाई पूरी तरह अधर में लटकी है। थानों और अन्य प्रशासनिक कार्यालयों में पूर्व सैनिकों के मामलों को प्राथमिकता देने के सरकारी दावों की धरातल पर धज्जियां उड़ रही हैं। भूमि विवाद, पेंशन संबंधी विसंगतियों और स्थानीय दबंगों द्वारा प्रताड़ित किए जाने के मामलों को लेकर पूर्व सैनिक महीनों से दफ्तरों की धूल फांक रहे हैं। इस प्रशासनिक उदासीनता के कारण सेवानिवृत्त सैनिकों को मानसिक व आर्थिक रूप से प्रताड़ित होना पड़ रहा है।
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डीसी दफ्तर में रजिस्टर तक गायब
नियमों के मुताबिक उपायुक्त कार्यालय में पूर्व सैनिकों की शिकायतों के त्वरित निवारण के लिए एक अलग विंग और विशेष रजिस्टर होना चाहिए। लेकिन यहां कोई सुध लेने वाला नहीं है। हमारी फाइलें एक मेज से दूसरी मेज पर धूल फांक रही हैं। -शमशेर सिंह, पूर्व सैनिक
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पुश्तैनी जमीन पर कब्जे का प्रयास
पूर्व सैनिकों की शिकायत व समस्याओं का कोई समाधान नहीं किया। प्रशासनिक अधिकारियों लिखित शिकायत और साक्ष्य सौंपे, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। देश की रक्षा करने वाले आज अपने ही घर में असुरक्षित और बेबस महसूस कर रहे हैं। -जगदीश राठी, पूर्व सैनिक।



थानों में नहीं मिलता सम्मान
हम जीवनभर सेना के कड़े अनुशासन में रहे हैं। जब किसी समस्या को लेकर थाने जाते हैं, तो वहां पुलिस का रवैया बेहद उदासीन और निराशाजनक होता है। शिकायत को ठंडे बस्ते में डाल देते हैं और रसूखदारों के आगे आवाज दबा दी जाती है। -राजकुमार, पूर्व सैनिक।


वादे कागजों और मंचों तक सीमित
सरकारें मंचों से पूर्व सैनिकों के सम्मान और कल्याण की बातें करती हैं, लेकिन धरातल पर सच्चाई बिल्कुल उलट है। प्रशासनिक अधिकारी हमें आम फरियादी की तरह टरका देते हैं। तंत्र की इस घोर अनदेखी से पूर्व सैनिक समाज में भारी रोष है। -सुभाष पंवार, पूर्व सैनिक।
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