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Panipat News: सरकार के पास भी नहीं सभी संपत्तियों का सटीक रिकार्ड

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 01 Feb 2024 04:48 AM IST
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Even the government does not have accurate records of all properties
पानीपत। सरकार के पास प्रदेश भर की सभी संपत्तियों का सही और सटीक रिकॉर्ड तक नहीं है। इसके लिए एकमात्र विकल्प सभी संपत्तियों का उनके मालिकों से स्वयं सत्यापन बचा था, इसे भी पूरा कराने में प्रदेश भर के निकाय फेल साबित हो रहे हैं। सरकार के दबाव के बाद भी अब तक निकाय अधिकारी प्रदेश में केवल 11 प्रतिशत संपत्तियों का स्वयं सत्यापन करा पाए हैं। जबकि 31 जनवरी तक कम से कम 25 प्रतिशत का स्वयं सत्यापन कराया जाना था। इस काम में लापरवाही बरतने वाले निकाय अधिकारियों के खिलाफ अब सरकार कार्रवाई करने में मूड में है।
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इसे लेकर 19 जनवरी को चंडीगढ़ में शहरी स्थानीय निकाय मंत्री ने प्रदेश भर के नगर निगम, पालिका और परिषद के अधिकारियों की बैठक ली भी थी। जिसमें स्पष्ट तौर पर संपत्तियों के स्वयं सत्यापन पर जोर दिया गया था। इस बैठक का हवाला देकर सरकार ने मंगलवार को प्रदेश भर के निकाय अधिकारियों को फिर से पत्राचार किया है जिसमें स्पष्ट कहा गया है कि जिन्होंने 25 प्रतिशत स्वयं सत्यापन नहीं कराया है उनके खिलाफ कार्रवाई होगी। जिसमें जुर्माना भी लगाया जा सकता है।
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उल्लेखनीय है कि प्रदेश में फिलहाल निकाय क्षेत्रों में कुल 4743120 संपत्तियां हैं। इनमें से अब तक केवल 11 प्रतिशत यानी 517954 का ही स्वयं सत्यापन हो सका है। इनमें से पानीपत में कुल 1.75 लाख संपत्ययों में से करीब 22.5 हजार यानी करीब 12.8 प्रतिशत का स्वयं सत्यापन हो पाया है। जब प्रदेश की सभी संपत्तियों का स्वयं सत्यापन हो जाएगा तब सरकार के पास भी संपत्तियों का आरओआर यानी रिकॉर्ड ऑफ राइट भी मिल जाएगा। यहां आरओआर के मायने संपत्तियों के सही रिकॉर्ड से हैं।
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निकाय ने उल्लेख किया कि वर्तमान में हमारे पास राज्य में शहरी क्षेत्रों के लिए अधिकारों का कोई रिकॉर्ड (आरओआर) नहीं है। इस तथ्य पर जोर दिया कि संपत्ति कराधान डेटा एक बार स्व-प्रमाणित होने के बाद राज्य में शहरी क्षेत्रों के लिए आरओआर बन सकता है। गौरतलब है कि निगम अधिकारियों ने संपत्तियों के स्वयं सत्यापन के लिए कैंप लगाए, मुनादी कराई लेकिन ये काम न आ सका। अधिकारियों का मानना है कि वे केवल लोगों को इस बारे जागरूक कर सकते हैं। उनके पास ऐसा कोई अधिकार नहीं है कि वे किसी से उसकी संपत्ति को जबरन स्वयं प्रमाणित करवा सकें। ये काम लोगों का है। उन्होंने सुविधा के लिए कैंप तक लगाए हैं।


बॉक्स
नहीं हुआ स्वयं सत्यापन न एकीकरण
प्रदेश सरकार के फैसले के बाद भी निकाय अधिकारी न तो संपत्तियों का स्वयं सत्यापन करा पाए हैं और न ही संपत्तियों को एकीकृत कर सके हैं। एकीकृत को संपत्ति के इंटीग्रेशन के नाम से भी जाना जाता है। जिसमें संपत्ति की पुरानी आईडी का नई आईडी से मिलान करना होता है। प्रदेश में आज भी लाखों ऐसी संपत्ति कर की आईडी हैं जो गलत लिंक और डी लिंक पड़ी है।



वर्जन:
हम लगातार संपत्तियों के स्वयं सत्यापन के काम पर जोर दे रहे हैं। रोजाना वार्डों में कैंप लगाकर लोगों की संपत्तियों के रिकॉर्ड अपडेट करवाने के साथ उनका स्वयं सत्यापन कराया जाता है। निगम कार्यालय में भी यही काम जारी है। आगे भी पूरा प्रयास रहेगा कि जल्द से जल्द सभी संपत्तियों का स्वयं सत्यापन पूरा कराया जा सके।
मनी त्यागी, संयुक्त आयुक्त नगर निगम।
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